शिव ने साबित किया कि प्रेम ही विवाह है,
कृष्ण ने समझाया कि प्रेम का अर्थ हमेशा विवाह नहीं होता।
एक ने दिखाया कि प्रेम मंडप तक पहुँचकर पूर्ण होता है,
दूसरे ने बताया कि प्रेम बिना बंधन के भी अमर होता है।
शिव का प्रेम तपस्या था, अडिग और एकनिष्ठ,
कृष्ण का प्रेम लीला था, निर्मल और अनंत।
एक ने पार्वती संग संसार बसाया,
दूसरे ने राधा संग प्रेम को शाश्वत बनाया।
सीखा हमने दोनों से —
प्रेम अधिकार नहीं, स्वीकार है;
प्रेम बंधन नहीं, समर्पण है;
और जहाँ सच्चा भाव हो,
वहीं प्रेम ही सबसे बड़ा धर्म है।
नमः पार्वती पतये हर हर महादेव 🙌🚩
जय श्री कृष्णा 🙏
❤️ जैसे नहाने से तन का,❤️
❣️मैल दूर हो जाता है--,❣️
❤️उसी प्रकार "राधा राधा "बोलने से,❤️
❣️मन की मुरादें पूरी हो जाती है -,❣️
❤️ जय श्री राधे कृष्णा,❤️
❣️ महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं ❣️
अपनी परेशानियाँ गुप्त रखें,
क्योंकि दुनिया में सहानुभूति कम और तमाशा देखने वालों की तादाद ज़्यादा है, इसलिए हमेशा खुद के सबसे अच्छे हमदर्द बनें।।
#महादेव 🙏🧡
करुणा,धर्म और सत्य के स्वरूप
राम का नाम ही जीवन को पवित्र कर देता है।
जिस हृदय में राम बसते हैं,
वहाँ भय नहीं — केवल विश्वास होता है।
वहाँ चिंता नहीं — केवल शांति होती है।
प्रभु श्रीराम आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें।
सीताराम जी की जय!
सिंदूर एक परंपरा नहीं,बल्कि विज्ञान भी
क्या आप जानते हैं कि भारतीय संस्कृति में सुहागिन महिलाओं द्वारा मांग में सिंदूर भरने के पीछे सिर्फ धार्मिक मान्यता ही नहीं
बल्कि गहरा वैज्ञानिक कारण भी छिपा है..?
सिंदूर लगाने के अद्भुत लाभ:
* ग्रंथियों का सक्रियण: यह पिट्यूटरी और पीनियल ग्रंथियों को सक्रिय करने में मदद करता है, जो हमारे शरीर के हार्मोनल संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं.
* मानसिक शांति: इसे लगाने से एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक तनाव (Stress) कम होता है.
* तापमान नियंत्रण: सिंदूर शरीर के तापमान को विनियमित (Regulate) करने में सहायक माना जाता है.
* रोग प्रतिरोधक क्षमता: पारंपरिक सिंदूर में मौजूद तत्व प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करते हैं.
* सकारात्मक ऊर्जा: यह माथे के उस बिंदु पर लगाया जाता है जिसे 'आज्ञा चक्र' कहा जाता है, जिससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
निष्कर्ष:
हमारी परंपराएं हमारे पूर्वजों के गहन शोध और ज्ञान का परिणाम हैं, सिंदूर न केवल वैवाहिक बंधन की मजबूती का प्रतीक है बल्कि यह एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा भी है.
कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारं भुजगेंद्रहारम् ।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ।।
अर्थ:
कर्पूर (कपूर) के समान श्वेत वर्ण वाले, करुणा के साक्षात अवतार, समस्त संसार के सार, और गले में सांप (भुजंग) का हार धारण करने वाले; जो भगवान शिव, माता भवानी (पार्वती) के साथ मेरे हृदय में हमेशा निवास करते हैं, मैं उनको नमन करता हूँ।
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