पा कर एक बुलंदी ऊंची
योद्धा चिरनिद्रा में सोता है।
आभा उसकी कहे चिरंतन
रण शूरवीर का होता है।।
उस परिपाटी का हिस्सा थे वो
जो कण कण लहू का बहा गए।
देकर जीवन नव कोपल में
वे अमिट शौर्य में समा गए।।
नमन उन नायकों को जिनके हृदय में वीरता संचरित होती थी।
#गुर्जर_आंदोलन_बलिदान_दिवस
ऐसा भी वक्त आया जब लगा की बरसों की कड़ी धूप को छांव मिलेगी
अब तो इन बंजारो को पनाह मिलेगी
ये यायावर भी घर को जाएंगे
अपने सपनों के महल को सजाएंगे
लेकिन हर सपना कहां पूरा होता है
कुछ राहगीरों को रास्तों में ही रहना होता है
अब तो हर शह में अपनी शिकस्त नजर आती है