मैं पैसों से गरीब होने के वजह से भारत के कई खूबसूरत जगहों पे नही जा सकता, वहां की खूबसूरती और प्राकृतिक का प्यार नही पा सका.. औरों का तो पता नही लेकिन मुझे घूमना बेहद पसंद है.. मैं चाहता हूं पहाड़ों के ऊपर चढ़ पृथ्वी को निहारना, समुंद्र किनारे बैठ सूर्य को उगते हुए देखना,।। ☹️
मेरे जिंदगी में हुए हैं कुछ ऐसी घटनाएं जिसकी वजह से अब खुद की जिंदगी मुझे रास नहीं आती। महसूस होता है कि कुछ है मेरे अंदर जो मुझे खाए जा रहा है। हर वक्त किसी की कमी महसूस होती है। वैसे तो मैंने जिंदगी में कई दुख देखे हैं परंतु मेरे जिंदगी से उसका चले जाना एक मौत से कम नही है।
हमने तय किया था कि निर्णय तुम्हारे होंगे और मैं तुम्हारे हर निर्णय का समर्थन कहूंगा, पर मैं नहीं स्वीकार पा रहा तुम्हारा मुझे छोड़ कर जाना.. जानता हूं ये सही है मेरे लिए पर इसको स्वीकार पाना मेरे लिए प्राण छिन जाने जैसा है...!!!
अब अकेले अकेले क्या करूं मैं, यार! तुम होती साथ तो तुम्हारे प्यार के सहारे जीता रहता.. अब इच्छा ही नहीं होती साली कि आगे बढ़ूँ, मन ठहर सा गया है..पर तुम्हें रोकना मेरा ओचित्य नहीं ना ही चाहता हूं तुम वापस आओ, तुम जीयो अपना आने वाला कल बस मैं कह रहा हूं मुझमें आस नहीं बची अब...!!!
हमने तय किया था कि निर्णय तुम्हारे होंगे और मैं तुम्हारे हर निर्णय का समर्थन करूंगा , पर मैं नहीं स्वीकार पा रहा तुम्हारा मुझे छोड़ कर जाना.. जानता हूं ये सही है मेरे लिए पर इसको स्वीकार पाना मेरे लिए प्राण छिन जाने जैसा है...!!!
कभी लिखा नहीं कि कैसा अनुभव करता था तुम्हारे साथ और अब तुम्हारे बाद, मन करता है लिखूं कभी वो पीड़ा जो तुमसे दूर होकर भोगता हूं हर रात या लिखूं वो दिन जो तुमसे शाम को बात करने की आतुरता में बीत जाया करता था,जो लिखता इन दूरियों को तो तुम्हारे साथ जीया प्रेम ॠण हो जाता...!!!
मेरी सारी दौलत शोहरत बस एक तुम थी जब से तुम्हें खोया है मैं कंगाल सा हो गया हूँ अब मेरे पास खोने के लिए कुछ भी शेष नही बचा मैं बस अब दिन काट रहा हूँ म्रत्यु के इंतज़ार में..।।
तुमने कहा था कि एक दिन सब बदल जायेगा, प्रेम में परिस्थितियां हमारे अनुकूल हो सकेंगी मैं तब तुमसे मिलूंगी.. हां कुछ बदला तो है पर वो मेरे अनुकूल नहीं, हम बिछड़ गए हैं मिलने की चाह में और मैं आज भी तुम्हारे उस कहे को सच माने बैठा हूं कि कुछ तो बदलेगा कभी...!!!
मैं खुश रहूंगा
तुमसे दूर होकर
ऐसा तुम्हारा भ्रम है।
तुम खुश रहोगी
हमसे दूर होकर
ऐसा महज़ हमारा भ्रम मात्र हैं।
यकीनन,
अब यही हमारा भ्रम
हम दोनों को जीवनभर
पीड़ा देगा।।