समाज में किसी व्यक्ति की छवि बहुत अच्छी या बहुत खराब हो तो कभी गौर कीजियेगा कि चारदीवारी के अन्दर वह अपने परिवार के सदस्यों से कैसे व्यवहार करता है? अधिकतर लोग एकदम विपरीत आचरण करते देखे हैं - सारा खेल छद्म छवि का है, जो दंभ में चार चांद लगाए रखती है हर समय। निर्मल होना कठिन है!!