#हिस्सा_किताबी
1920 का दशक, कुओं, स्कूलों, अदालतों, कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के अधिकार के लिए, अछूतों द्वारा सीधी कार्यवाही के युग की शुरुआत के रूप में जाना जाता है।
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ब्राह्मणों ने तालाब का 'शुद्धिकरण किया। पवित्र मन्त्रों का उच्चारण किया गया, गाय के गोबर...
जहां केंद्र की मोदी सरकार 11 साल में करीब 6 हजार करोड़ खर्च करती है तो वहीं यूपी की योगी सरकार मात्र 8 साल में 7 हजार करोड़ के करीब विज्ञापन पर खर्च कर चुकी है.
आखिर योगी सरकार ने ये पैसे कहां खर्च किए?
जानने के लिए पढ़िए @Basantrajsonu की यह रिपोर्ट.
https://t.co/tkvT2h01zz
पाँच ट्रिलियन इकोनामी का गुब्बारा उड़ता ही जा रहा है।
पहले कहा 2022 में हो जाएगी, फिर 2025 में। इस तरह तारीख़ पर तारीख़ दी जाती रही, मगर लक्ष्य हासिल न होना था न हुआ।
अब वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा है कि 2029 तक भारत की अर्थव्यवस्था पाँच ट्रिलियन हो जाएगी।
अर्थशास्त्रियों की मानें तो अर्थव्यवस्था बुरी हालत में है और बहुत बुरा वक़्त दस्तक दे रहा है। सरकार को कुछ समझ में नहीं आ रहा है इस संकट कैसे निपटें।
ऐसे में बिल्कुल नहीं लगता कि 2029 में भी ये हो पाएगा। हो भी गया तो तब तक चीन 23-25 ट्रिलियन इकोनॉमी हो जाएगा।
Dear Gen Z
आपको बदनाम कर रहे हैं जो एंकर उनका आपने बहिष्कार किया अब बारी है उन एक्टर्स का बहिष्कार करने की जिन्होंने दलाली की और आपके आंदोलन का मज़ाक़ उड़ाया।
No to Godi Anchors
No to Godi Actors
Group A Officer बनने के बाद भी UPSC की तैयारी क्यों जारी रखी?
UPSC CSE 2025 AIR 604 Ashwani Dubey की कहानी बताती है सफलता मंज़िल नहीं, आगे बढ़ने की वजह है।
#UPSC#UPSC2025#SuccessStory
भाजपाइयों के भोजनार्थ
भ्रष्टाचारियों के शर्मनार्थ
अभिभावकों के संदर्भार्थ
मुख्यमंत्री जी यदि सक्रिय, सचेत और सजग होते तो उनके संज्ञानार्थ भी भेज देते लेकिन हमेशा के लिए जानेवालों से, चला-चली की इस अंतिम बेला में क्या तो शिकायत करें और क्या ही अपेक्षा। जो दस साल में नहीं जागे वो आख़िरी के चंद महीनों में क्या ही कर लेंगे। ये वीडियो देखकर वो कोई सुधार तो करेंगे नहीं बल्कि या तो किसी की नौकरी ले लेंगे या फिर एफ़आइआर करवा देंगे।
घोर निंदनीय… कम-से-कम बच्चों का निवाला तो न छीनें।
आजतक ने हाल ही में ढाई सौ लोगों को निकाला.. अभी Gen Z ने टीवी वालों को उनकी औकात क्या है वो दिल्ली में बताई.. लेकिन फिर भी ऐसे एंकर सुधरने का नाम नहीं ले रहे.. चापलूसी कर यह अपने आप को तो बचा लेते हैं, बेचारे कैमरामैन से लेकर टेक्निकल स्टाफ की नौकरी चली जाती है! सुधर जाओ चापलूसों
Multiple students at an Ayurveda Medical College fell ill and they were shifted to a real hospital for diagnosis and treatment.
But these are the same practitioners who call themselves "doctors" and are even allowed to perform laparoscopic surgery in India after masters degree in Ayurveda. Who's playing whom? Govt. playing the students or Ayurveda "doctors" playing the public?
इस कथन में निहित मूर्खता एवं वैचारिक विघटन स्पष्ट करता है कि क्यों आरक्षण हटाओ मुहिम आला दर्जे की जातिवादी मुहिम है तथा ये मुख्यतः जातियारी मुहिम ही है. इस तर्क से चलें तो विकलांगता सर्टिफिकेट वालों को डिसेबिलिटी जस्टिस, महिला कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं को जेंडर जस्टिस, बीपीएल और EWS वालों को इकोनॉमिक जस्टिस के लिए आवाज़ उठाने का हक़ नहीं है.
गलियों की बात चली है, तो मोदी जी अपने सामने आईना रखे!
मिक्स ब्रीड, 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड, जर्सी गाय जैसी अनगिनत गालियाँ हमारे महामानव के शब्दकोष में है।
सिर्फ मोदी जी की माँ देश की मां तो नहीं है! तेजस्वी जी, राहुल जी की माँ भी देश की मां है।
संसद और विधानसभाओं में गाली देने का रिकॉर्ड भाजपाई रखते है, भाषा के इस स्तर को किसने गिराया?
सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा में दावा किया कि अमेरिका ने गाय के मूत्र का पेटेंट कराया है। आइए, इस दावे की वास्तविकता समझते हैं।
1. जिस अमेरिकी पेटेंट का हवाला दिया जा रहा है, वह किसी अमेरिकी संस्था का नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा दायर किया गया था।
2. यह पेटेंट 2020 में मेंटेनेंस (एक्सटेंशन) फीस जमा न होने के कारण समाप्त (Expired) हो गया।
3. यह पेटेंट गाय के मूत्र पर नहीं, बल्कि गाय के मूत्र के डिस्टिलेट (Cow Urine Distillate) के असर का है अर्थात दावा मूत्र पर नहीं, बल्कि उसके आसुत (distilled) अंश के संभावित प्रभाव पर था।
4. स्वयं पेटेंट में यह भी उल्लेख है कि इसी प्रकार का प्रभाव भैंस, ऊँट और हिरण के मूत्र के डिस्टिलेट में भी देखा गया।
डिस्टिलेशन (Distillation) क्या है?
किसी भी मिश्रण में उपस्थित विभिन्न घटकों का वाष्प दाब (Vapor Pressure) और क्वथनांक (Boiling Point) अलग-अलग होता है। इसी सिद्धांत का उपयोग करके डिस्टिलेशन के माध्यम से कुछ वाष्पशील (volatile) घटकों को अलग किया जाता है। यही तकनीक पानी के शुद्धिकरण, समुद्री जल के अलवणीकरण (desalination), रसायन उद्योग और यहाँ तक कि सीवेज के उपचार में भी उपयोग की जाती है। इसलिए किसी पदार्थ का डिस्टिलेट प्राप्त होना अपने-आप में उस मूल पदार्थ के औषधीय या सेवन योग्य होने का प्रमाण नहीं है।
अब एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है। गाय सहित लगभग सभी जानवरों के मूत्र में विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव और खरनाक रोगजनक (pathogenic) बैक्टीरिया पाए जाते हैं। यदि मूत्र में इतना शक्तिशाली एंटीमाइक्रोबियल कंपोनेंट होता, तो सबसे पहले उसी में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट हो जाने चाहिए थे।
वास्तविकता यह है कि अनेक रसायनों और प्राकृतिक पदार्थों में प्रयोगशाला स्तर पर एंटीमाइक्रोबियल गतिविधि (antimicrobial activity) पाई जाती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होता कि वे सीधे पीने, खाने या चिकित्सा के लिए सुरक्षित और प्रभावी सिद्ध हो जाते हैं। किसी पदार्थ को दवा मानने के लिए कठोर प्रीक्लिनिकल और क्लिनिकल परीक्षण आवश्यक होते हैं।
भारत जैसे देश में, जहाँ अभी भी वैज्ञानिक साक्षरता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करने की आवश्यकता है, संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच से इस प्रकार के अधूरे या भ्रामक दावे करना लोगों में भ्रम और अंधविश्वास को बढ़ावा मिलेगा । सार्वजनिक जीवन में वैज्ञानिक विषयों पर चर्चा हमेशा उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों और तथ्यों के आधार उस विषय के एक्सपर्ट को करनी चाहिए न कि प्रोपेगंडा के लिए भाषण बाजी करना चाहिए।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें एक पंडित ट्रैन के एसी कोच में ऊपर की बर्थ पर बैठकर आग जलाकर पूजा कर रहा है.
ज्यादातर यात्रियों को पता ही नही था वो आदमी ऊपर बैठकर क्या कर रहा है.
एक यात्री ने धुंआ निकलते हुए देखा तो उसने मोबाइल फोन से वीडियो बनाया और पंडित को ऐसा करने से मना किया.
पंडित सुनकर भी अनसुना कर रहा था. यात्री ने बार बार कहा, पंडित जी ऐसा मत करो, कोच में आग लग सकती है, धुंए से फायर अलार्म बज जाएगा.
एसी कोच में नमाज पढ़ने पर खूब विरोध हुआ था. क्या इस पंडित की हरकत पर भी उतना विरोध होगा या ?
आंदोलनकारियों की अब पहली ज़िम्मेदारी बनती है कि वे उन कार्यकर्ताओं के लिए लड़ें जिनको सिर्फ़ इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने जंतर मंतर पर उनकी मदद की थी।
जुनैद भी वैसे ही एक शख़्स हैं, जिन्हें योगी की पुलिस ने निशाना बनाया है। उन्हें ही नहीं उनके परिजनों और रिश्तेदारों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन खत्म हो चुका है. सोनम वांगचुक मैनेज हो चुका है.
राहुल गांधी रुकने का नाम नही ले रहे हैं. राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर सवाल पूछा है.
1. क्या आपने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पेलेट गन चलाने का आदेश दिया था.
2. प्रदर्शन स्थल पर सादे कपड़ों में लाठी लिए पुलिस थी या वालंटियर्स थे? इनके डिप्लॉयमेंट का स्वीकृति किसने प्रदान की थी.
राहुल गांधी ने कहा, 19 साल का साहिल लोचब पेलेट गन से घायल हो गया. वो अपनी आंखें खो सकता है.
अमित शाह जवाब नही देंगे तो लोकसभा में पूछा जाएगा.