श्री सिद्धिविनायक नमो नमः 🙏
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएँ।
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भगवान श्री कृष्ण का अंतिम प्रस्थान, जरा शिकारी के तीर से पूर्ण हुई दिव्य लीला :
महाभारत युद्ध के बाद जब धर्म की स्थापना हो चुकी थी, तब भगवान श्री कृष्ण जानते थे कि उनकी पृथ्वी पर लीला समाप्त होने का समय आ गया है। उसी दौरान यादव वंश भी आपसी कलह और अभिमान के कारण विनाश की ओर बढ़ गया। सब कुछ समय की योजना के अनुसार घटित हो रहा था।
एक दिन भगवान श्री कृष्ण समुद्र किनारे एक वन में पीपल के वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे। उनके चरणों का एक भाग झाड़ियों के बीच दिखाई दे रहा था, जो दूर से किसी हिरण जैसा प्रतीत हो रहा था। उसी समय जरा नाम का एक शिकारी ��िकार की तलाश में वहाँ पहुँचा। उसने उसे हिरण समझकर तीर चला दिया, जो सीधे भगवान श्री कृष्ण के चरण में लगा।
जब जरा पास पहुँचा और उसने देखा कि उसके सामने स्वयं भगवान श्री कृष्ण हैं, तो वह भय से काँप उठा और क्षमा माँगने लगा। तब श्री कृष्ण मुस्कुराकर बोले, डरो मत यह सब मेरी इच्छा से हुआ है। मेरी पृथ्वी की लीला पूर्ण हो चुकी है, तुम केवल एक माध्यम बने हो।
कहा जाता है कि यह घटना त्रेता युग के उस कर्म से भी जुड़ी थी, जब भगवान श्री राम ने बाली का वध किया था। इसी कर्म के परिणामस्वरूप जरा इस लीला का निमित्त बना।
इसके बाद भगवान श्री कृष्ण अपने परमधाम को प्रस्थान कर गए। उनके पृथ्वी से जाने के साथ ही द्वापर युग का अंत और कलियुग का आरंभ माना गया।
यह कथा हमें सिखाती है कि भगवान की हर लीला के पीछे गहरा उद्देश्य होता है और समय आने पर स्वयं भगवान भी अपनी भूमिका पूर्ण कर वापस अपने धाम लौट जाते हैं।
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏