नेतृत्व भाषणों से नहीं, व्यवहार से पहचाना जाता है।
80-90 वर्ष के बुज़ुर्गों के प्रति रवींद्र सिंह भाटी का सम्मान, विनम्रता और आत्मीयता बताती है कि राजनीति में आज भी कुछ लोग जनता का विश्वास जीतने नहीं, बल्कि रिश्ते निभाने निकले हैं। बुज़ुर्गों का आशीर्वाद यूँ ही नहीं मिलता।
न महलों की विरासत, न सत्ता की छाँव लेकर चला,
धूल भरे रास्तों से उठकर लोगों के दिलों तक पहुँचा,
आज जो काफ़िला दिखाई देता है,
उसकी हर गाड़ी के पीछे किसी का विश्वास जुड़ा है।
@RavindraBhati__@Ranveer11370786
"आंधियों से कह दो अपनी औकात में रहें,
हम परों से नहीं, हौसलों से उड़ान भरते हैं।
जनता का विश्वास साथ हो तो
संघर्ष भी जीत की कहानी बन जाता है।"
@RavindraBhati__
@js_rajpurohit10@mahaveersodha09@mansabeniwaljat में तो सबको मानता हु अगर में झूठ हु तो मेरे हो सबसे पहले जो शब्द आपने बोले अगर में सच हु तो मेरे से दुगुने आपके हो गांव ओर आगे शहर पर भी
आपको किसने बोला कॉमेंट करने को पहले झूठी कसमें तो खुद खा रहे हो अब बिलबिला रहे हो यूंही बिना मतलब गुरु गुरु करके ज्यादा इज्ज़त दे दी इसलिए