हम उत्तर प्रदेश आयुष विश्वविद्यालय (Mahayogi Guru Gorakhnath AYUSH University, Gorakhpur) के छात्र हैं और पिछले कई महीनों से परिणामों की अव्यवस्था का शिकार हो रहे हैं।
📌 क्या हुआ था?
30 अक्टूबर को जब हम छात्र अपनी समस्याएँ लेकर पहुँचे, तब माननीय VC और Executive Council ने हमें 10 बोनस मार्क्स देने का आश्वासन दिया था ताकि अनुचित परिणामों में सुधार हो सके।
लेकिन…
▶️ आज 10 दिन से अधिक हो चुके हैं
▶️ कोई official notice आज तक जारी नहीं हुआ
▶️ छात्र confusion और panic में हैं
— समझ ही नहीं पा रहे कि supplementary की तैयारी करें या main की!
📍 BHMS छात्रों की स्थिति और गंभीर है
✔︎ Results 6 महीने से pending
✔︎ 2021 batch को NCH नियम अनुसार grace marks भी नहीं मिले
✔︎ Session delay की वजह से 5 वर्ष की MBBS/BHMS डिग्री 8–9 साल तक खिंच रही है
यह शिक्षा नहीं — अन्याय है!
🙏 हमारी विनम्र अपील है:
AYUSH Department Uttar Pradesh तत्काल हस्तक्षेप करे और @myogiadityanath@brajeshpathakup@CMOfficeUP@moayush
🔹Bonus marks पर official notification जारी किया जाए
🔹Pending results तुरंत घोषित किए जाएँ
🔹Session और career बचाया जाए!
हम शिक्षा से न्याय चाहते हैं, दया नहीं।
#UPAyushStudents #JusticeForAyushStudents #MGGAU #AyushUniversity #SaveAyushStudents
To,
Hon’ble Vice Chancellor Sir,
Registrar Sir,
Exam Controller Sir,
and Hon’ble Chief Minister Yogi Adityanath Ji,
Subject: Request for Fair Evaluation & Timely Session
Respected Sir,
We, the BAMS(2021 ,22,23 batch) students, are deeply hurt by the unfair result declaration. There is no system for re-evaluation or rechecking, and academic sessions are continuously delayed. This 5.5-year course is becoming even longer. Many students come from poor backgrounds. Sir, please ensure justice and transparency in the system.
#StudentVoice #AcademicDelay #ayurvedic
@CMOfficeUP@myogiadityanath@UPGovt@MoAYUSH@brajeshpathakup@Xpress_edex@DainikBhaskar@aajtak@timesofindia
महायोगी गुरु गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय में BAMS के कई छात्र परिणाम से निराश हैं।
निवेदन है कि @UPGovt@CMOfficeUP विश्वविद्यालय को कॉपी रीचेकिंग का विकल्प शुरू करने का निर्देश दें ताकि छात्रों की मेहनत का सही मूल्यांकन हो सके। 🙏
#BAMS#MGGUniversity#UPGovt#StudentLife
चंवर वंश का इतिहास
सिकन्दर लोदी (1489-1517) के शासनकाल से पहले पूरे भारतीय इतिहास में 'चमार' नाम की किसी जाति का उल्लेख नहीं मिलता | आज जिन्हें हम चमार जाति से संबोधित करते हैं और जिनके साथ छूआछूत का व्यवहार करते हैं, दरअसल वह वीर चंवर वंश के क्षत्रिय हैं | जिन्हें सिकन्दर लोदी ने चमार घोषित करके अपमानित करने की चेष्टा की |
भारत के सबसे विश्वसनीय इतिहास लेखकों में से एक विद्वान कर्नल टाड को माना जाता है जिन्होनें अपनी पुस्तक द हिस्ट्री आफ राजस्थान में चंवर वंश के बारे में विस्तार से लिखा है |
प्रख्यात लेखक डॅा विजय सोनकर शास्त्री ने भी गहन शोध के बाद इनके स्वर्णिम अतीत को विस्तार से बताने वाली पुस्तक हिन्दू चर्ममारी जाति एक स्वर्णिम गौरवशाली राजवंशीय इतिहास" लिखी | महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इस राजवंश का उल्लेख है | डॉ शास्त्री के अनुसार प्राचीनकाल में न तो चमार कोई शब्द था और न ही इस नाम की कोई जाति ही थी |
अर्वनाइजेशन' की लेखिका डॉ हमीदा खातून लिखती हैं मध्यकालीन इस्लामी शासन से पूर्व भारत में चर्म एवं सफाई कर्म के लिए किसी विशेष जाति का एक भी उल्लेख नहीं मिलता है | हिंदू चमड़े को निषिद्ध व हेय समझते थे | लेकिन भारत में मुस्लिम शासकों के आने के बाद इसके उत्पादन के भारी प्रयास किए गये थे |
डॅा विजय सोनकर शास्त्री के अनुसार तुर्क आक्रमणकारियों के काल में चंवर राजवंश का शासन भारत के पश्चिमी भाग में था और इसके प्रतापी राजा चंवरसेन थे | राणा सांगा व उनकी पत्नी झाली रानी ने चंवरवंश से संबंध रखने वाले संत रैदासजी को अपना गुरु बनाकर उनको मेवाड़ के राजगुरु की उपाधि दी थी और उनसे चित्तौड़ के किले में रहने की प्रार्थना की थी |
संत रविदास चित्तौड़ किले में कई महीने रहे थे | उनके महान व्यक्तित्व एवं उपदेशों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें गुरू माना और उनके अनुयायी बने | उसी का परिणाम है आज भी विशेषकर पश्चिम भारत में बड़ी संख्या में रविदासी हैं | राजस्थान में चमार जाति का बर्ताव आज भी लगभग राजपूतों जैसा ही है | औरतें लम्बा घूंघट रखती हैं आदमी ज़्यादातर मूंछे और पगड़ी रखते हैं |
संत रविदास की प्रसिद्धी इतनी बढ़ने लगी कि इस्लामिक शासन घबड़ा गया सिकन्दर लोदी ने मुल्ला सदना फकीर को संत रविदास को मुसलमान बनाने के लिए भेजा वह जानता था की यदि रविदास इस्लाम स्वीकार लेते हैं तो भारत में बहुत बड़ी संख्या में इस्लाम मतावलंबी हो जायेगे लेकिन उसकी सोच धरी की धरी रह गयी स्वयं मुल्ला सदना फकीर शास्त्रार्थ में पराजित हो कोई उत्तर न दे सका और उनकी भक्ति से प्रभावित होकर अपना नाम रामदास रखकर उनका भक्त वैष्णव (हिन्दू) हो गया | दोनों संत मिलकर हिन्दू धर्म के प्रचार में लग गए जिसके फलस्वरूप सिकंदर लोदी आगबबूला हो उठा एवं उसने संत रैदास को कैद कर लिया और इनके अनुयायियों को चमार यानी अछूत चंडाल घोषित कर दिया | उनसे कारावास में खाल खिचवाने, खाल-चमड़ा पीटने, जूती बनाने इत्यादि काम जबरदस्ती कराया गया उन्हें मुसलमान बनाने के लिए बहुत शारीरिक कष्ट दिए | लेकिन उन्होंने कहा :-
वेद धर्म सबसे बड़ा, अनुपम सच्चा ज्ञान,
फिर मै क्यों छोडू इसे, पढ़ लू झूठ कुरान.
वेद धर्म छोडू नहीं, कोसिस करो हज़ार,
तिल-तिल काटो चाहि, गोदो अंग कटार
संत रैदास पर हो रहे अत्याचारों के प्रतिउत्तर में चंवर वंश के क्षत्रियों ने दिल्ली को घेर लिया | इससे भयभीत हो सिकन्दर लोदी को संत रैदास को छोड़ना पड़ा था | संत रैदास का यह दोहा देखिए :-
बादशाह ने वचन उचारा ,
मत प्यारा इसलाम हमारा,
खंडन करै उसे रविदासा ,
उसे करौ प्राण कौ नाशा ,
जब तक राम नाम रट लावे ,
दाना पानी यह नहींपावे ,
जब इसलाम धर्म स्वीकारे,
मुख से कलमा आपा उचारै,
पढे नमाज जभी चितलाई ,
दाना पानी तब यह पाई
आपने और हमने संत रविदास के दोहों को ही नहीं पढ़ा, जिसमें उस समय के समाज का चित्रण है जो बादशाह सिकंदर लोदी के अत्याचार, इस्लाम में जबरदस्ती धर्मांतरण और इसका विरोध करने वाले हिंदू ब्राहमणों व क्षत्रियों को निम्न कर्म में धकेलने की ओर संकेत करता है
चंवर वंश के वीर क्षत्रिय जिन्हें सिकंदर लोदी ने 'चमार' बनाया और हमारे-आपके हिंदू पुरखों ने उन्हें अछूत बना कर इस्लामी बर्बरता का हाथ मजबूत किया | इस समाज ने पददलित और अपमानित होना स्वीकार किया, लेकिन विधर्मी होना स्वीकार नहीं किया आज भी यह समाज हिन्दू धर्म का आधार बनकर खड़ा है
आज भारत में 25 करोड़ मुसलमान हैं और लगभग 35 करोड़ अनुसूचित जातियों के लोग हैं | जरा सोचिये इन लोगों ने भी मुगल अत्याचारों के आगे हार मान ली होती और मुसलमान बन गये होते तो आज भारत में मुस्लिम 60 करोड़ के पार होती
अगर किसी शब्द से आप्ति है तो माफ़ी दीजियेगा
AYUSH और MBBS दोनों में नीट परीक्षा के माध्यम से ही दाखिला मिलता है। फिर सरकार द्वारा लागू की गई NExT परीक्षा के मानक दोनों के लिए अलग-अलग क्यूं रखे जा रहे हैं।
MBBS के लिए यह परीक्षा 2024 बैच से और AYUSH छात्र-छात्राओं के लिए यह परीक्षा 2021 बैच से लागू की जा रही है ऐसा क्यों?
इस पद्धति से पूरे भारत वर्ष में 3 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं पीड़ित हैं। जब कि NExT परीक्षा के सभी अधिकारिक सूचना 2024 में ही दी गई है जो NCISM की वेबसाइट पर मौजूद है।
@IndianAYUSHAsso
🚨 #NoNEXTForAYUSHStudents 🚨
हमारे साथ धोखा क्यों?
👉 Minister ने मीडिया में कहा था NExT 2022 batch तक हटा है।
👉 NCH ने recommend किया था कि 2023 तक हटे।
👉 फिर भी 2021, 2022 और 2023 तीनों पर थोप दिया गया।
🚨 #NoNEXTForAYUSHStudents 🚨
हमारे साथ धोखा क्यों?
👉 Minister ने मीडिया में कहा था NExT 2022 batch तक हटा है।
👉 NCH ने recommend किया था कि 2023 तक हटे।
👉 फिर भी 2021, 2022 और 2023 तीनों पर थोप दिया गया।