यह राजस्थान के करौली जिले के श्री महावीर जी ब्लॉक में महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय,योगी बस्ती इरनियां की वर्तमान हालत है जिसमें केवल एक कमरा है वही प्रधानाचार्य कक्ष, कक्षा-कक्ष, रसोई घर,स्टोर रूम और वहीं अन्य विद्यालय गतिविधियों के लिए भी है एवं न ही कोई पेयजल की व्यवस्था है!
The condition of Sonam wangchuk sir is too critical now,
This is not fair with Sonam wangchuk sir ,
He is serving the nation and raising the voice of youths and farmers of nation,
Why is he not considering by current government,
He is on hunger strike from 15 days,
Come soon more and more people to support peacefully.
At: Jantar Mantar, Delhi 📍
🥺🙏
रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी - ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।
सरकार चाहे इसे “नॉर्मल” बताए, लेकिन हकीकत ये है:
• उत्पादन और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे
• MSMEs को सबसे ज्यादा चोट लगेगी
• रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम बढ़ेंगे
• FII का पैसा और तेजी से बाहर जाएगा, जिससे शेयर बाज़ार पर दबाव बढ़ेगा
यानी, हर परिवार की जेब पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ना तय है। और यह सिर्फ वक्त की बात है - चुनाव के बाद पेट्रोल, डीज़ल, LPG की कीमतें भी बढ़ा दी जाएंगी।
मोदी सरकार के पास न दिशा है, न रणनीति - सिर्फ बयानबाज़ी है। सवाल यह नहीं कि सरकार क्या कह रही है - सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी रिपोर्ट पेश की है जिससे अरावली का दायरा सिमट गया है। अरावली राजस्थान का केवल पर्वत नहीं, हमारा 'रक्षा कवच' है। केंद्र सरकार की सिफारिश पर इसे '100 मीटर' के दायरे में समेटना, प्रदेश की 90% अरावली के 'मृत्यु प्रमाण पत्र' पर हस्ताक्षर करने जैसा है।
सबसे भयावह तथ्य यह है कि राजस्थान की 90% अरावली पहाड़ियाँ 100 मीटर से कम हैं। यदि इन्हें परिभाषा से बाहर कर दिया गया, तो यह केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि कानूनी कवच हटाना है। इसका सीधा मतलब है कि इन क्षेत्रों में अब वन संरक्षण अधिनियम लागू नहीं होगा और खनन बेरोकटोक हो सकेगा।
पहाड़ की परिभाषा उसकी ऊँचाई से नहीं, बल्कि उसकी भूगर्भीय संरचना (Geological Structure) से होती है। एक छोटी चट्टान भी उसी टेक्टोनिक प्लेट और पर्वतमाला का हिस्सा है जो एक ऊंची चोटी है। इसे अलग करना वैज्ञानिक रूप से तर्कहीन है।
अरावली थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकने वाली दीवार है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि 10 से 30 मीटर ऊंची छोटी पहाड़ियां (रिज) भी धूल भरी आंधियों को रोकने में उतनी ही कारगर होती हैं। इन छोटी पहाड़ियों को खनन के लिए खोल देने का मतलब दिल्ली और पूर्वी राजस्थान तक रेगिस्तान को खुद निमंत्रण देना है।
अरावली की चट्टानी संरचना बारिश के पानी को रोकती है और उसे जमीन के भीतर भेजती है। ये पहाड़ियाँ पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज का काम करती हैं। इन्हें हटाने का मतलब पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे उत्तर-पश्चिम भारत में सूखे को निमंत्रण देना है।
अरावली वह दीवार है जो पश्चिम से आने वाली जानलेवा 'लू' (Heat Wave) और थार रेगिस्तान को पूर्वी राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानों में घुसने से रोकती है।
यह फैसला पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि खनन माफियाओं के लिए 'रेड कार्पेट' है। थार के रेगिस्तान को दिल्ली तक जाने का निमंत्रण देकर सरकार आने वाली पीढ़ियों के साथ जो अन्याय कर रही है, उसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
विडंबना ये है कि सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई इसलिए शुरू हुई थी ताकि अरावली को स्पष्ट रूप से पहचाना और बचाया जा सके। लेकिन केंद्र सरकार की जिस सिफारिश को कोर्ट ने माना, उसने अरावली के 90% हिस्से को ही तकनीकी रूप से 'गायब' कर दिया।
मैं सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करता हूं कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को देखते हुए अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करे। यह फैसला सीधा विनाश को निमंत्रण देने वाला है।
#SaveAravalli
यही हमारी कमाई है…
Pinch Impact: बेड़ियां टूट गई, अदालत का आदेश Rajasthan में जानवरों की जिंदगी जी रहे लोगों को आज़ादी। हमने राजस्थान के बालोतरा में बेड़ियां स्टोरी की थी, जिसमें दिखाया कि कैसे मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों को बेड़ियों में बाँधकर सालों से रखा गया,इलाज के अभाव में।
अब राज्य के विधिक आयोग ने संज्ञान लेते हुए सभी की बेड़ियां खुलवा दी और उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है।
बिहार चुनाव धनबल और सत्ता के दुरुपयोग से लोकतंत्र की लूट है। चुनावों में हार-जीत चलती रहती है परन्तु इस चुनाव को भाजपा-JDU और चुनाव आयोग ने मिलकर हाईजैक कर लिया जिससे INDIA गठबंधन को हार का मुंह देखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बिहार में आचार संहिता लगने के बाद एक करोड़ से अधिक महिलाओं के खातों में दस-दस हजार रुपये डाले गए। यह एक तरीके से 'कैश फॉर वोट' यानी वोट खरीदी हुई और चुनाव आयोग मौन होकर देखता रहा। यह चुनावों में पैसे बांटकर वोट खरीदने के समान है जो गैरकानूनी है। यह वोट चोरी का ही एक नया संस्करण है।
राजस्थान में 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान महिलाओं को स्मार्टफोन देने वाली योजना पर रोक लगा दी गई थी जबकि ये योजना फरवरी, 2022 में आए राज्य बजट की घोषणा के अनुसार चलाई जा रही थी और करीब 30 प्रतिशत पात्र महिलाओं को स्मार्टफोन दिए जा चुके थे। इसके साथ ही पहले से चल रहीं सामाजिक सुरक्षा पेंशन, अन्नपूर्णा योजना तक को भी रोक दिया गया। इसके विपरीत बिहार में महिलाओं के खाते में चुनाव के दौरान भी 10,000 रुपये नई योजना के तहत डाले गए जो आचार संहिता से महज कुछ दिन पहले शुरू की गई थी। पहले महाराष्ट्र में भी चुनाव से पहले महिलाओं को 7500-7500 रुपये बांटे गए थे।
बिहार चुनाव से ठीक पहले, सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लिए बिना, SIR के माध्यम से लाखों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। वर्तमान में SIR से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, फिर भी 12 राज्यों में SIR लागू किया जा रहा है। ऐसे कदमों के माध्यम से निर्वाचन आयोग भी NDA की जीत में एक सहभागी बन गया है।
महाराष्ट्र के बाद बिहार में ऐसा इकतरफा चुनाव परिणाम देशवासियों के लिए चिंता का विषय है। अब समय आ गया है कि देशवासियों को लोकतंत्र बचाने के लिए संकल्प लेना पड़ेगा।
आज हर कोई दो सिम रखता है — एक इंटरनेट के लिए , दूसरा सिर्फ जरूरत पड़ने पर कॉल के लिए।
लेकिन उस दूसरे सिम को चालू रखने के लिए भी हर महीने ₹200-₹300 का रिचार्ज ठोकना पड़ता है।
ना इंटरनेट चाहिए , ना रोज बात करनी फिर भी लूट जारी है।
Jio , Airtel , Vi सबने मिलकर जनता को निचोड़ने का धंधा बना लिया है।
हर जगह “अनलिमिटेड” का झांसा लेकिन कोई सस्ता प्लान नहीं।
TRAI बस सो रहा है या शायद कंपनियों की जेब में बैठा है।
गरीब और मिडिल क्लास लोग जो अपने घरवालों, बुजुर्गों या काम के लिए दूसरा नंबर रखते हैं , उनसे जबरदस्ती पैसा वसूला जा रहा है।
सवाल सीधा है — जब इंटरनेट नहीं चाहिए, तो क्यों महंगा रिचार्ज कराओगे?
क्यों नहीं ₹50-₹100 का सस्ता प्लान लाते, जिसमें बस 100-200 मिनट कॉल और थोड़ा SMS हो?
हर चीज महंगी, अब बात करना भी लग्जरी हो गया है। TRAI और कंपनियां मिलकर गरीब का खून चूस रही हैं।
अब जनता बोलेगी सस्ता प्लान दो , वरना बंद करो ये लूट।
What a victory by our team over a mighty opponent like Australia. A great chase by the girls and a standout performance by Jemimah in a big game. A true display of resilience, belief, and passion. Well done, Team India! 🇮🇳
Jio AirFiber की घटिया सेवा – उपभोक्ताओं के साथ खुला धोखा
मैं जयपुर ज़िले के एक ग्रामीण क्षेत्र का उपभोक्ता हूँ।
एक वर्ष पहले गाँव में इंटरनेट की समस्या के कारण मजबूरी में Jio AirFiber का कनेक्शन लिया।
हर महीने ₹706 का भुगतान नियमित रूप से कर रहा हूँ।
शुरुआत के कुछ महीने ठीक रहे, लेकिन पिछले कई महीनों से हालात बदतर हो चुके हैं।
अब तो दिन में 5-7 घंटे तक ‘No Internet’ दिखाता है।
मैंने कई बार शिकायत की, हर बार बस यह कहा गया कि “टीम काम कर रही है”
अब समय आ गया है कि Jio जैसी कंपनियों की पोल खुले, हम ग्रामीण उपभोक्ता कोई भिखारी नहीं हैं - हम भी अपने अधिकारों के लिए खड़े होंगे।
ज्यादा से ज्यादा रिट्वीट करें और अपना विरोध दर्ज कराये। ✊
@JioCare@reliancejio #ambani
@narendramodi Tweeting will not do anything.
If you are truly against this, slap NSA and UAPA against the Anti-nationals who are supporting this attack online and encouraging mob violence
राजकीय अस्पताल हिंडौन सिटी में RGHS पर्ची पर डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवाइयां तो लिखी जा रही है लेकिन मोहर नहीं होने का बहाना बनाकर मोहर लगाने से मना किया जा रहा है यदि RGHS कार्ड के बावजूद बाहर से स्वयं के खर्च पर दवाई खरीदनी पड़े तो RGHS की कटौती क्यों?@RajCMO@GajendraKhimsar
इस तरह की तुलना बेहद असंवेदनशील लगती है, क्रिकेट की जीत कभी भी देश के निर्दोष नागरिकों / पर्यटकों के खून के बदले का विकल्प नहीं हो सकती..पहलगाम का दर्द क्रिकेट की जीत से नहीं मिट सकता साहब..देश की जनता ट्रॉफ़ी से पहले सुरक्षा और आतंकवाद पर सख़्त कार्रवाई चाहती है।
ऐसा लगता है कि राजस्थान की भाजपा सरकार को सरकारी कार्मिकों, पेंशनर्स एवं उनके परिजनों से कोई संवेदना नहीं है इसलिए RGHS योजना को लेकर वह गंभीर नहीं है।
25 अगस्त को निजी अस्पतालों द्वारा इस योजना में इलाज बन्द करने से बहुत से लोगों का जरूरी इलाज रुक जाएगा परन्तु सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp को इस विषय में गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।
मैं राज्य के निजी अस्पतालों से भी अपील करता हूं कि इलाज बन्द करने जैसा बड़ा कदम उठाने की बजाय संवेदनशीलता के साथ एक ऐसा रास्ता निकालने पर विचार करें जिससे मरीजों को असुविधा न हो।
बीते 10 वर्षों में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जिनमें राज्यों में मुख्यमंत्री, मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रहे विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया और कई महीनों तक उनकी जमानत तक नहीं हुई लेकिन ट्रायल के बाद ये नेता निर्दोष साबित हुए। ऐसी गिरफ्तारियों की वजह केवल भाजपा सरकार का राजनीतिक प्रतिशोध था।
अब NDA सरकार ऐसा कानून बना रही है जिससे किसी भी ऐसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर रहे नेता को गिरफ्तार कर जेल में डालकर पद से बर्खास्त कर दिया जाएगा। यह न सिर्फ विपक्षी नेताओं की राजनीति समाप्त करने का प्रयास है बल्कि हर राज्य में सरकार अस्थिर कर जनमत को कुचलने एवं भाजपा की सरकार बनाने की चाल है।
सिर्फ विपक्षी ही नहीं, सत्ता पक्ष के भी ऐसे नेता जो शीर्ष नेतृत्व की इच्छा अनुरूप काम नहीं करेंगे उन्हें भी ED, CBI द्वारा गिरफ्तार कर इस कानून के तहत गिरफ्तार कर बर्खास्त करेंगे जिससे उनकी पब्लिक इमेज भी खराब की जा सके।
ऐसे घोर अलोकतांत्रिक एवं तानाशाही मानसिकता को बढ़ावा देने बिल का सभी दलों को विरोध करना चाहिए।
वोट चोरी के विरोध में मार्च निकाल रहे कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा जी समेत अन्य सांसदों को हिरासत में लिया जाना बेहद निंदनीय एवं लोकतंत्र पर कुठाराघात है। डेमोक्रेसी में विपक्ष को अपनी बात उठाने का अधिकार है और प्रदर्शन, मार्च इत्यादि के जरिए ही वो अपने मुद्दों पर जनता की आवाज को बुलंद करते हैं। प्रदर्शन करते नेताओं को हिरासत में लेना उनके इस अधिकार का हनन है।
केन्द्र सरकार एवं चुनाव आयोग श्री राहुल गांधी द्वारा तथ्यों के साथ लगाए गए वोट चोरी के आरोप की जांच करने की बजाय ध्यान भटकाने के लिए दूसरे रास्ते अपना रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष तो क्या किसी आम आदमी या मीडिया संस्थान द्वारा भी इतनी बड़ी अनियमितताएं सामने लाने पर चुनाव आयोग का कर्तव्य है कि उनकी जांच करवाए पर चुनाव आयोग का ऐसा रुख इस संस्था में आमजन के विश्वास को खत्म कर रहा है।
A school building collapsed in Jhalawar, Rajasthan.
Innocent students at risk due to poor infrastructure.
Who is responsible for this negligence?
We need accountability. We need safety.
#Jhalawar#SchoolCollapse#RajasthanNews
वंचित और जन सहयोग से निशुल्क शिक्षा भोजन और आवास यह शब्द लिखकर हम महान बनने की कोशिश क्यों कर रहे हैं और बच्चों को यह क्यों बतलाना चाहते हैं कि तुम्हारे परिवार की हैसियत ही नहीं थी तुम्हें पढ़ाने , खिलाने और आवास सुविधा उपलब्ध कराने की इसलिए इस देश के लोगों ने तुम्हारे ऊपर यह उपकार किया है ऊपर लिखे शब्द उन्हें हमेशा यह जताते और बताते रहेंगे