अगर इस भयावह स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए मदिरापान के ठेकों को खोला जा सकता है, तो हम युवा जो इस देश की आने वाली नई पीढ़ी के रचयिता हैं उनके भविष्य के लिए पुस्तकालय का खोला जाना कोई बहुत बड़ी समस्या तो नहीं है ना महोदय हमारी आपसे नम्रता पूर्वक यह प्रार्थना है