भारत माता की जय 🚩वंदे मातरम् 🚩
Student activist M.A. in public administration,
M.A. in Ancient indian history culture & archaeology Jiwaji University Gwalior
आभार एवं कृतज्ञता!
मुझे आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने पर आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष @NitinNabin जी तथा माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री @AmitShah जी का हृदय से आभार एवं धन्यवाद।
@IAMRAJSHEKHAWAT भोsड़ी के ब्लाउज पहन के क्षत्रियों का ठेकेदार बना घूमता है।
कहीं यहां पिटता है कही वहां पिटता है
कही अपने खुद से पगडी गिरा लेगा
नौटंकीबाज तेरे जैसे अम्मू जैसे की वजह से ठाकुरो की किरकिरी हो रही है क्यों भोसड़ी के ठाकुरों का ठेकेदार बन के वहां पहुंच गया है। उस रखैल को लेकर
#UGC
अलीगढ़ में करणी सेना जिला अध्यक्ष सचिन राघव की सड़क पर पिटाई की गई, कपड़े फाड़े गए, सड़क पर परेड निकाली गई!
"जय भीम" के नारे भी सुनाई पड़ रहे हैं!
मतलब अब यहाँ लड़का राजपूत है, और मारने वाले संवैधानिक शोषित, इसलिए कुछ नहीं होगा!
हां, अगर जाति उलट होती तो अबतक SC/ST एक्ट लग गया होता!
अब ऐसे ही सवर्णों के साथ खुलेआम सामाजिक न्याय हो रहा है! हिंदू एकता बन रही है!
और हां,
Before I forget,
Happy Birthday to Priest King 💐💐
राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा पढ़ाने का निर्णय कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है। जब वर्षों से राजस्थान की जनता राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर उसे संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग कर रही है, तब प्राथमिकता राजस्थानी भाषा के अध्ययन, शोध और संवर्धन सहित संवैधानिक दर्जे की होनी चाहिए थी।
राजस्थान का गौरवशाली इतिहास, समृद्ध लोक साहित्य, लोक संस्कृति और असंख्य ऐतिहासिक ग्रंथ राजस्थानी भाषा में सुरक्षित हैं। यदि विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा के अध्ययन एवं शोध केंद्र स्थापित किए जाएँ, तो यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उसके प्रभावी हस्तांतरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि हमारा किसी भी भाषा के प्रति न तो विरोध है और न ही कोई पूर्वाग्रह। मराठी सहित भारत की सभी भाषाएँ समान रूप से सम्मान की पात्र हैं। किंतु राजस्थान में अपनी मातृभाषा की उपेक्षा कर किसी अन्य भाषा को प्राथमिकता देना उचित प्रतीत नहीं होता।
राजस्थान के जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं को इस गंभीर विषय पर प्रदेश की भावनाओं के अनुरूप आवाज़ उठानी चाहिए, ताकि राजस्थानी भाषा को उसका उचित सम्मान और संस्थागत स्थान मिल सके।
@RajCMO@RajGovOfficial
@RavindraBhati__ महाराष्ट्र का शिक्षा मंत्री हिंदी भाषा बोलने पर गाली दे रहा है
और सरकार मराठी को अन्य राज्यों में पढाने पर जोर दे कैसा दौहरा रवैया
सरासर गलतहै
मराठी आए दिन हिंदीवासी उत्तर भारत के लोगों को पीटते है अपनी भाषा इन राज्यो पर थोप रहे हैं ऐसी सरकारी नीति निर्धारण का पुरजोर विरोध कीजिए
@BabuSahab_0003 क्षत्रिय नहीं है ना ही इनका क्षत्रिय समाज से कोई वास्ता हैं।
रावत समाज का कार्यक्रम है रावत MP में OBC में आते हैं।
दतिया के अलावा मुरैना,श्योपुर में आबादी है जो चंबल नदी से लगे इलाके में
यह लोग चंबल पार राजस्थान समीपवर्ती जिले करौली, सवाई माधोपुर में मीणाओ में शादी भी करते हैं।
@ndtvindia यह एक महाभ्रष्ट अधिकारी है यह ग्वालियर भी पदस्थ रहा था उसके बाद बालाघाट
यह निहायती जातिवादी व्यक्ति है इसके खाने के दांत और है दिखाने के और
रात्रि अगस्त में लगने वाले पुलिसकर्मियों पर FRB ड्राइवर पर 100, ₹200 भी नहीं छोड़ता है इतना हारामी है #MPPolice#DSP#HappyBirthdayDhoni
आज 795 दिवस हो गए,
प्रतिदिन बिना एक भी अवकाश, तपती गर्मी हो, तेज बारिश अथवा कंपकपाती ठंड, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, एकमूर्ति चौक स्थित प्राचीन मंदिर पर प्रतिदिन दोपहर 12 बजे भगवान का भोग लगाकर देवजनों को एक समय का भोजन करवाया जाता है, माँ सीता रसोई में।
न रुके हैं, न थके हैं। जय श्री राम।।
#MaaSitaRasoi
@AnilYadavmedia1@b_bhushansharan@yadavakhilesh भौश्री के जातिवादी कीड़े अहीर साइकिल लिखना तो सीख ले और ठाकुर है अपनी सवारी खुद करते हैं तुम जिस साइकिल पर सवार हो वह भी एक ठाकुर की कृपा से ही बनी है अमर सिंह नाम जानते होंगे। #UP
@ArvindSBhati9 अरविंद रवसा को कार्यक्रम से दूर रखा तो तुम्हारी राजनीति शुरू होने से पहले ही खत्म व केंद्रीय मंत्री बने बैठे शेखावत उनकी हालत तो बदतर होगी=जैसे तैसे चुनाव जीते=MP मे नरेंद्र तोमर जैसी उनसे भीगई गुजरी अन्य समाजो से ही सीख लो एकजुटता जलन किसने जिताया #JNVU@RavindraBhati__#Jodhpur
आप पत्रकार हैं, आखिर कभी तो सच बोलिए। राम मंदिर की लड़ाई कोई 20-30 साल की नहीं है, बल्कि 500 वर्षों का संघर्ष है।
VHP तो पहली बार इस मुद्दे में 1964 में कूदी थी। आरएसएस ने इसे अपना आधिकारिक एजेंडा 1982 में बनाया। भाजपा 1986 में आई और मूर्तियाँ 1949 में महंत दिग्विजयनाथ की हिन्दू महासभा तथा अयोध्या के संतों द्वारा स्थापित की गई थीं।
महंत दिग्विजयनाथ अपनी अखिल भारतीय रामायण सभा के माध्यम से 1939 से ही राम मंदिर के लिए कार्य कर रहे थे, जिसमें उनकी सहायता अयोध्या के तत्कालीन मजिस्ट्रेट ठाकुर गुरुदत्त सिंह ने की।
इसके अलावा, कोर्ट में पहली याचिका हिन्दू महासभा की ओर से गोपाल सिंह विशारद ने 1950 में दायर की।
इसके बाद दूसरी याचिका दिगंबर अखाड़ा के स्वामी रामचंद्र परमहंस द्वारा दायर की गई।
फिर तीसरी याचिका निर्मोही अखाड़ा द्वारा 1959 में दायर की गई।
सबसे पहले राम मंदिर के काज हेतु 1528 में अपने प्राणों की आहुति देने वाले हँसबर के राजा रणविजय सिंह और उनकी रानी जया कुमारी थे।
1678 में राजेपुर के गजराज सिंह, सीरसिंदा के राजा गोपाल सिंह तथा बाबा केशव दास ने प्राणों की आहुति दी।
फिर 1800 में राजा गुरुदत्त सिंह और पिपरा के राजा राज कुमार सिंह तथा बाद में मकरही, गोंडा और अमेठी के राजाओं ने भी अपने प्राणों की आहुति दी, 1847-57 के बीच पूजा हेतु एक चबूतरा भी बनाया गया।
इसके साथ ही जयपुर के राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने राम जन्मभूमि की रक्षा में जो योगदान दिया, वह संभवतः किसी भी शासक का सबसे अधिक दस्तावेजीकृत योगदान है।
सन 1717 में सवाई जय सिंह ने अयोध्या के नवाब बरहान-उल-मुल्क शहादत खाँ से अयोध्या में 983 एकड़ भूमि खरीदी और वहाँ जयसिंहपुरा की स्थापना की। इस भूमि में श्रीराम जन्मस्थान भी सम्मिलित था।
यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण इसलिए था क्योंकि मुग़ल राज्य ने भी इस स्वामित्व को सन 1717 से विधिक मान्यता दी। जयपुर के सिटी पैलेस में स्थित कपड़द्वारा संग्रह में इसके दस्तावेज़ मौजूद हैं।
इसके अतिरिक्त, सवाई जय सिंह द्वारा जयपुर के निर्मोही अखाड़े के बलानंद मठ के वीर साधुओं की एक सैनिक छावनी अयोध्या में स्थापित की गई, ताकि राम जन्मभूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उसके अलावा भी कई महत्त्वपूर्ण लोगों का इसमें संघर्ष रहा है, जिनके नाम निम्नलिखित हैं:
महंत अभिराम दास, निर्वाणी अखाड़ा
के. के. नायर, तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट
महंत रघुनाथ दास (वाद संख्या 4 में प्रतिवादी)
प्रियादत्त राम (वाद संख्या 4 में प्रतिवादी)
धर्म दास (महंत अभिराम दास के शिष्य)
रमेश चंद्र त्रिपाठी (वाद संख्या 4 में प्रतिवादी)
मदन मोहन गुप्ता, अखिल भारतीय श्री राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति (संयोजक)
हरि शंकर जैन, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा (अधिवक्ता)
शर्म करिए थोड़ी, @chitraaum जी। राम मंदिर की लड़ाई को केवल भाजपा और संघ तक सीमित करके आप उन असंख्य बलिदानियों का मज़ाक बना रही हैं, जिन्होंने इसके लिए अपने प्राणों की आहुति दी।