@RajendraMeena50 भाई तृतीय भाषा के रूप में भाषा वैकल्पिक हो��ी अनिवार्य नहीं, जिसको पढ़नी होगी वो लेगा जिनको नहीं पढ़नी होगी वो संस्कृत या अन्य कोई भाषा पढ़ेगा जैसे हम पढ़ते आए है दसवीं कक्षा तक ।
@Jat_Ethnic अगर यही अवसर राजस्थानी को मिलता तो यही भाषा धूमधाम से फलती फूलती जैसे गुजराती और अन्य भाषाएं फैली , 22वीं अनुसूची में शामिल न करने का नुकसान यह हुआ कि आज यह भाषा बैशाखियों पर है।
@Jat_Ethnic भाई अगर राजस्थानी पढ़ने का कभी अवसर ही नहीं मिला यहां की जनता अगर आधिकारिक भाषा का दर्जा पहले मिल जाता तो भाषा का एक रूप स्थापित होता ,उसका मानकीकरण होता जैसे आज़ादी के बाद हिन्दी के मानकीकरण के लिए अनेक कमेटियां बनीं जिसने यह तय किया कि भाषा में कौनसे वर्ण होंगे या नहीं होंगे
@Sanubyadwal Kisnw bola smjh nhi aati .. me simant jeele barmer se hu mujhe vo sb smjh aa gya jo aapne likha h or aap jise hadauti or dhundhadi bol rhe ho vo sb rajsthani ki boliya h jese ki marwadi h ... Or rajasthani bhasha ko koi jabardasti aap pr nhi thop rha h jiska mn hoga vo pdhega
@BhatiBalki99676@MyBharatpur Rajasthan me punjabi gujarati urdu sanskrit school me pdhai jati h tb to aapko dikkat nhi hui ek third language k roop me ose school level pe lagu kr rhe to aapko kya dikkat ho rhi h ... Ese thop to nhi rhe h jabardasti jiska mn ho vo pdhega vrna mt pdhna
@AmitYaddav मैथिली को 2001 में 8वीं अनुसूची में ��ामिल किया गया था ,बिहार में भोजपुरी बोली बोलने वाले लोगों को मैथिली नहीं आती तो क्या उनका अस्तित्व खत्म हो गया ?
@ashok_Jodhpurii विधायक महोदय को एक कमेंट पर इतना विवाद आगे नहीं बढ़ाना था। रवसा से मारवाड़ की जनता को वैसे भी बहुत उम्म���द है और भविष्य के बहुत बड़े जनप्रतिनिधि बनने की भरपूर प्रतिभा भी है इसलिए इस तरह के छोटे मोटे कमेंट्स को सहन करना भी चाहिए, फोन करके धमकी देना उनके करियर का नकारात्मक बिंदु है।