इन आंखों में दरिया लिए फिरती हूं,
मगर अश्क बहा लूं जी भर के,
एसा भी कहा हो पाता हैं...
मुम्किन तो नहीं के गुज़र जाए,
ये वक्त का सिलसिला यूहीं....
मगर गैरों से तो दूर ,
ख़ुद से ही मुलाक़ात हो जाए...
एसा भी कहा हो पाता हैं....
दिल में दफ्न थी जो बातें,
तेरी मुलाकातों की वो हसीन यादें,
उन्हें आज एहसासों के
धागों में पिरो दिया...
झूठे जज़्बातों की इस दुनिया ��ें,
उस एक सच्चे शख़्स को खो दिया...
अब दर्द को बयां भी करे तो कैसे,
हमने तो रो रोकर,
उन सारे ज़ख्मों को धो दिया...
@meghnagulzar @Zakirism
आज फ़िर ख़ुद को झूठा दिलासा दे कर,
तेरे लौट आने का इमकान किया हैं...
आज फ़िर तुझे सोच कर,
तेरी सारी वफाओं का गुमान किया हैं...
और उन दिनों तक़दीर से बगावत कर,
आज मैंने खुद ही ख़ुद का नुक़सान किया हैं।।।
Wo din bhi aagya jb log status or stories post krne k naam p puri Mirzapur2 dikha denge..Ese mahan vyaktiyon se anurrodh hai, vinti hai...Kripyaa apne prime subscription Ka id-password de...
Series Ka Spoiler nhi....
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