जेन जी गाली दे रही है!!
संसद से शयनकक्ष तक बड़ी चिंता है। जेन जी, गालीबाज है। घटिया मीम बनाती है, गंदे इशारे करती है।
अशिष्ट मीम बनाती है।
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चिंतित है सब। इस उम्र में अपने बच्चो को यह सब करते देखना शॉकिंग है। उस उम्र में हम भी उच्ऋंखल थे, शैतान थे,नो डाउट, लेकिन मर्यादा में रहते थे।
हमारे मां बाप तो अमीर नही थे। सरकारी हस्पताल में जन्मे, और सरकारी स्कूल में पढ़े। बीमार पड़े तो सरकारी दवा खाई। सरकारी एग्जाम पास किये, सरकारी कॉलेज गए, नौकरी की, छोटा धंधा किया, बढाया- दो पैसे कमाये।
और अपने बच्चो को हर वह चीज दी, जो हमे न मिली थी। तो कमी कहाँ रह गयी?
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जेन जी, प्राइवेट नर्सिंग होम में पैदा हुई, प्राइवेट स्कूलों में पढ़ी, प्राइवेट गाड़ी में चलती है। प्राइवेट वैक्सीन लगवाती है, प्राइवेट कॉलेज में पढ़ती है, प्राइवेट नौकरी करती है।
इस पीढ़ी ने, सरकार से कुछ लिया नही।
सरकार उससे जरूर ले रही है। टैक्स, चन्दा, रिश्वत, कमीशन, टोल, वोट, तालियां, थाली, लाइक्स।
देने वाला, मांगने वाले की..
या कहें छीनकर लेने वाले की इज्जत करे??
दुनिया मे ऐसा नही होता। तो जेन जी से यह आशा क्यो?
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और समझिये, कि इस पीढ़ी के लिए आपने कुछ छोड़ा नही है। इसके मां बाप, चचा, फूफा, मामा, ताऊ- इसके हिस्से की नियामतें खा चुके। बरबाद कर दिया है।
इसके हिस्से की हवा।
इनके हिस्से का पानी,
इसकी नदिया, इसके खनिज, इनके हिस्से की शांति, इनके हिस्से की मुस्कान
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इस पीढ़ी के सामने एक खौफनाक शून्य है।
जॉब्स, बिजनेस, शिक्षा, सुविधा, सम्मान- सब मुट्ठी भर लोगों के लिए सुरक्षित है। 90% लाकर कॉलेज नही मिलता, डिग्री लेकर जॉब नही मिलता।
जो सैलरी है, उतने में घर नही मिलता। सरनेम खास न हो तो किराए पर मकान नही मिलता।
हस्पताल में ड्यूटी पर डॉक्टर नही मिलता। पैसे देकर न्याय नही मिलता। टोल देकर सड़क नही मिलती। घर की औरतों के साथ निकले, तो इज्जत का अमान नही मिलता।
और इस पर मुंह से कुछ निकल जाये,
कचहरी से जमानत नही मिलती।
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इस पीढ़ी से सब कुछ छीन लिया गया है, जो पिछली पीढ़ियों को आसानी से, या थोड़े एफर्ट से मिल जाता था। बदले में 5 किलो राशन, 1500 नगद और ढेर सारा गर्व छोड़ा है।
मन्दिर, मुसलमान, गौमूत्र और पाकिस्तान छोड़ा है। जयजयकार की मजबूरी छोड़ी है।
नथिंग एल्ज!!
दिया कुछ नही, पर इनकी मासूमियत, जिंदगी की आसानियत, रहने का स्वस्थ महौल, भविष्य की सुरक्षा और वर्तमान का सुकून छीन लिया है।
तो देने के लिए इन हतभागियों देने को बचा क्या है?? गालियां..?
तो वही देंगे न!!
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आप कह रहे है कि जेन जी, गालीबाज है। घटिया मीम बनाती है, गंदे इशारे करती है। अशिष्ट मीम बनाती है। साहब ये तो अभी अल्हड़ उम्र की बड़ी मासूम अभिव्यक्ति है।
इसे जरा और पकने दीजिये।
इसे उबालिये, पकाइए। मुकदमे लगाइए, अकेला पाकर पीटीये, माफी मंगवा कर वीडियो बनाइये। भीतर जमा हो रहे बारुद का जखीरा बढ़ाइये। शौक से..
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और खूब बढ़ाइये।
क्योकि आप गालियों का अंत चाहते है।
और हम आपका अंत चाहते हैं।
अगर आपको लगता है कि देश की अर्थव्यवस्था “गलती से” बर्बाद हुई है…
तो आप इस मॉडल को समझ नहीं रहे।
मॉडल बहुत साफ है:
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जनता को 5 किलो राशन दो
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बीमारी में आयुष्मान कार्ड दो
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और देश की असली संपत्ति कुछ चुनिंदा लोगों को सौंप दो।
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धीरे-धीरे ऐसा समाज बनाओ जो नौकरी, राशन और इलाज के लिए पूरी तरह सत्ता पर निर्भर हो जाए।
क्योंकि आर्थिक रूप से निर्भर नागरिक…
राजनीतिक रूप से भी कमजोर हो जाता है।
इसलिए छोटे व्यापारी टूटे।
मिडिल क्लास दबा।
युवा बेरोजगार हुआ।
लेकिन कुछ कॉरपोरेट साम्राज्य लगातार बड़े होते गए।
लोकतंत्र सिर्फ वोट से नहीं चलता।
लोकतंत्र तब बचता है जब आम आदमी आर्थिक रूप से मजबूत हो।
वरना अंत में जनता के हिस्से आएगा:
5 किलो राशन…
और सवाल पूछने का खत्म होता साहस।
#घोरकलजुग
@sangeeta_tani
हम पहाड़ का सौंदर्य देखते हैं
पहाड़ का दुख नहीं,
हम समुद्र का सौंदर्य देखते हैं
समुद्र का दुख नहीं,
हम मरुस्थल का सौंदर्य देखते हैं
मरुस्थल का दुख नहीं,
हम स्त्री का सौंदर्य देखते हैं
जो पहाड़ है समुद्र है मरुस्थल है।
~ विनोद पदरज