"चलते है दबे पांव कोई जाग न जाये ग़ुलामी के असीरों की यही खास अदा है ,
होती नही जो क़ौम हक़ बात पे यकजा उस क़ौम का हाकिम ही फ़क़त उसकी सज़ा है..!
Faiz Ahmad Faiz
आल फ़लस्तीन का हाल देख कर करबला बहुत याद आ रही है वहाँ भी पानी बंद कर दिया था और यहाँ भी पानी बंद है और बेरहमी से बच्चों औरतो पर ज़ुल्म हो रहा है कल का यज़ीद कोई और था और आज का यज़ीद नितिन्याहु है करबला में भी मुसलमानों ने तमाशा देखा आज भी मुसलमान सिर्फ़ तमाशा ही देख रहे,, अफ़सोस
एक मुसलमान का हिंदुस्तान पर उतना ही हक़ है जितना एक भारतीय का होना चाहिये। मगर इस दोर मैं मुसलमान के साथ एक अलग ही नफ़रत भरा व्याभार किया जा रहा है।शायद वो लोग इस बात से बेख़बर है की मुसलमानों ने इस मुल्क के लिए पूरी बफादारी के साथ अपनी जानो को ���़ुर्बान कर दिया था।
#15august2023