#गजनी_ब्राह्मण_युद्ध
महमूद गजनी जोकि लुटेरा था वो जब चाहता तब आज के पंजाब,हरियाणा आदि राज्यों को लूट लिया करता था।एक बार उसकी लड़ाई आज के कानपुर उत्तर प्रदेश में स्थित ब्राह्मणों की सेना से हुई।जिसमें की सैकड़ों ब्राह्मण वीरों ने 1 लाख 20 हजार की सेना से 25 दिन तक युद्ध किया था।
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सुदामा जी ने देश की सेवा करते हुए वीरगति प्राप्त की।
एक तरफ़ ब्राह्मण देश की सेवा करते हुए शहीद हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ब्राह्मणों को अपशब्द कहे जा रहे हैं और विदेशी कहा जा रहा है।
ब्राह्मण भारत छोड़ो के नारे लग रहे है।
ब्राह्मण तेरी कब्र खुदेगी' के नफरती नारे।
अशोका विश्वविद्यालय में ब्राह्मण मुर्दाबाद के नारे लगे।
आज फिर एक ब्राह्मण वीर देश के लिए बलिदान दे गया, लेकिन लोग फिर भी ब्राह्मणों को ही गाली देंगे।
इस देश ने ब्राह्मणों को कुछ नहीं दिया है, जबकि इस देश की संस्कृति और त्योहारों की परंपरा ब्राह्मणों की ही देन है।
भारत ने एक वीर सपूत खोया:
अमर शहीद संजय पाण्डेय, देवरिया, उत्तर प्रदेश से थे।
जय हिन्द।🇮🇳
#ब्राह्मण_क्रान्तिकारी_मैनपुरी_षड्यंत्र
आज हम बात करते है महान क्रांतिकारी पंडित दम्मीलाल पांडेय जी का।पाण्डेय जी का जन्म आर्यपुर खेरी,मैनपुरी उत्तर-प्रदेश में एक जमींदार घराने में हुआ था।शुरू से ही वो क्रांतिकारी स्वभाव के थे।मैनपुरी षड्यंत्र में उनकी भूमिका बहुत बड़ी थी।
Exclusive—
ब्राह्मण-विरोध का वो पहला चैप्टर!
“पंडित हरिशंकर तिवारी के साथ जो हुआ….!!!”
पंडित हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी का सनसनीख़ेज़ इंटरव्यू
योगी की राजनीति के मूल में क्या? ये ब्राह्मण विरोध का शोर क्यों?
उन दिनों गोरखपुर में हुआ क्या?
पूरा लिंक—
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ये सवाल राजस्थान के राजपूत पूछ रहे हैं, जो वामन मेश्राम के बामसेफ में अपनी माँ को दान कर चुके हैं।
कश्मीर में 500 से अधिक राजपूत परिवारों ने कश्मीर छोड़ दिया था।
कश्मीर के पंडित भले अपनी जान बचाने के लिए कश्मीर छोड़े हों, लेकिन कम से कम दुश्मन से हाथ मिलाकर पीठ में छुरा नहीं मारा।
ये लोग खुद को राजपूत कहते हैं, लेकिन उनके साथ बैठते हैं जो प्रभु श्री राम को काल्पनिक बताते हैं और माता सीता पर टिप्पणी करते हैं।
आज देखिए, अपनी माँ को बामसेफ को दान करने के बाद ये सभी को ज्ञान दे रहे हैं।
इतिहास की धरोहर गर्व करने लायक होनी चाहिए, लेकिन ये वही राजपूत हैं जिन्होंने अपने महलों और ज़मीन के लिए बार-बार मुगलों से संधि की। हल्दीघाटी के बाद क्या हुआ?
अकबर से हाथ मिला लिया।अपनी लड़ाइयाँ अपनों से लड़ते रहे और सोने-चांदी की झलक में क़ौम की इज़्ज़त दांव पर लगा दी। कश्मीर के पंडित भले अपनी जान बचाने के लिए भागे हों, लेकिन कम से कम दुश्मन से हाथ मिलाकर पीठ में छुरा नहीं मारा।
जब भारत में मराठों और सिखों ने आक्रमणकारियों से लोहा लिया, राजपूत अक्सर बाहरी शक्तियों के सहयोग पर निर्भर रहे, जिससे उनकी भूमिका कमजोर रही।
राजपूतों ने अपनी रियासतें और महलों की रक्षा के लिए कई बार अपनी स्वतंत्रता और गौरव से समझौता किया। इस वजह से उनके संघर्ष का सही उद्देश्य कभी पूरा नहीं हो पाया।
महाराणा प्रताप के साथ लड़ी गई हल्दीघाटी की लड़ाई को वीरता का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इसके बाद कुछ राजपूत राजाओं ने अकबर के साथ संधि कर ली, जिससे उनकी स्वतंत्रता की लड़ाई अधूरी रह गई।
राजपूतों के बीच आंतरिक फूट और भाई-भाई में संघर्षों ने उन्हें कमजोर किया। मेवाड़, मारवाड़, और अन्य राज्यों के बीच लगातार संघर्ष होते रहे, जिससे उनकी एकता खंडित हुई और विदेशी शक्तियों ने इसका लाभ उठाया।
अकबर और अन्य मुगलों के शासनकाल में राजपूत राजा अपनी सेना और सम्मान के साथ मुगलों की सेवा करते रहे। कई राजपूतों ने मुगल दरबार में महत्वपूर्ण पद प्राप्त किए, जिससे उनका स्वतंत्रता संघर्ष कमजोर हुआ।
ग्वालों की जिंदगी अहीरों को ही कॉपी करने में गुजर जाएगी बेशक ग्वाले हमारा नाम और गोत्र भी चुरा ले पर अहीरों जैसा नस्ल, इतिहास और रियासते कहा से लाएंगे
जौनपुर में ब्राह्मणों की रियासत थी यूं तो ग्वाले दिन रात ब्राह्मणों को गाली देते हैं और दान दक्षिणा देने की बात करते है परंतु जौनपुर के ब्राह्मण राजा ने दया दिखा एक ग्वाला को नौकर बना रखा था विडंबना देखिए ग्वाले उस नौकर को जौनपुर का राजा बता रहे जब तथ्य कि जांच की जाएगी तो बदनामी तो अहीर की होगी क्योंकि ग्वाले ग्वालवंशी अहीर जो लिख रहे इन मूर्खों ने जौनपुर के काल्पनिक जमींदारी का नामकरण भी फलाना राज कर रखा है अब इन मूर्खों को कौन बताए राज कुछ गिने चुने बड़े घराने ही लिखते थे जिनकी हजारों गांवों की रियासते होती थी !!
हकीकत तो यह है सपा सरकार से पहले इन ग्वालों के पास जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं था परंतु पश्चिमी यूपी में तो अहीरों की भरौल रूपधनी seondara जैसी रियासते थी यहां तह पूर्वी यूपी में ढढोर अहीरों की पचास गांव की भीटी रावत रियासत थी अब ग्वाले फर्जीवाड़ा कर रहे बदनामी तो होगी हम अहीरों की,
इसलिए ग्वाले तुम फर्जीवाड़ा कर काल्पनिक रियासते क्या साम्राज्य भी अपना बनाओ पर अहीर मत लिखो अपनी असली जाती ग्वाल लिखो अहीर एक स्वाभिमानी और सम्मानित कौम है भगवान का दिया हर चीज अहीरों के पास है तुम हमारे पर कीचड़ मत उछालो !!
@soti070 इन लोगों की वजह से सिंध जोकि हिंदू बाहुल्य क्षेत्र था आज पाकिस्तान में है और रोज हिंदुओं के ऊपर अत्याचार हो रहा है। उन लाखों लोगों पर हो रहे अत्याचार के यही सब जिम्मेदार हैं
500 राजपूतों का भी पलायन हुआ था और जिस समय कश्मीर का मुद्दा उठा वहां का राजा तुम्हारी बिरादरी का था जोकि डर के मारे भाग आया था इसलिए कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में है।
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