सहकारी समितियों को सौगात ।
मौजूदा थोक पेट्रोल/डीजल डीलरशिप लाइसेंसधारी PACS को रिटेल आउटलेट में बदलने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सहमति दी। साथ ही LPG डीलरशिप में भी PACS को प्राथमिकता मिलेगी।
#सहकारसेसमृद्धि@AmitShahOffice@blvermaup@pibcooperation
In a written reply of a question asked in Rajya Sabha, the Hon’ble Home & Cooperation Minister, Shri Amit Shah stated that proposals for computerization of 58,383 Functional PACS have been received from 24 states and 4 UTs.
The budget will be a big boost for the vital Cooperative Sector - Hon'ble Minister for Home and Cooperation, Shri Amit Shah.
@AmitShahOffice@blvermaup@PIB_India
A historic MoU has been signed by the Ministry of Cooperation, Ministry of Electronics & Information Technology, NABARD, and CSC e-Governance Services India Limited.
The MoU empowers PACS to deliver services provided by CSC.
@PMOIndia@AmitShahOffice@AshwiniVaishnaw
सहकार-से-समृद्धि!
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व व गृह एवँ सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में
देशभर के पैक्स का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है।
@AmitShahOffice@PIB_India@mygovindia
पैक्स के कम्प्यूटरीकरण के अंतर्गत:
1.साइबर सुरक्षा और डेटा संग्रहण के साथ क्लाउड-आधारित सा��ान्य सॉफ्टवेयर का विकास होगा।
2.पैक्स को हार्डवेयर व प्रशिक्षण के लिए सहायता मिलेगी।
3.महत्वपूर्ण रिकॉर्डों के रखरखाव की सहायता और प्रशिक्षण सहित मौजूदा अभिलेखों का डिजिटलीकरण होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में कृषि व ग्रामीण विकास बैंकों का अहम योगदान है। आज NAFCARD द्वारा आयोजित ARDBs के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए। https://t.co/EYTXGob5HP
9 दशक पहले जब कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों की शुरुआत हुई तब देश की कृषि प्रकृति व भाग्य पर आधारित थी, उसे भाग्य से परिश्रम के आधार पर परिवर्तित करने का काम हमारे कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों ने किया है।
नाबार्ड के उद्देश्यों की पूर्ति तभी हो सकती है जब एक-एक पाई जो उपलब्ध है वो ग्रामीण विकास और कृषि के क्षेत्र में ही फाइनेंस व रिफाइनेंस हो। और यह तब तक संभव नहीं हो सकता जब तक कृषि क्षेत्र के अंदर long term finance, इन्फ्रास्ट्रक्चर व माइक्रो इरिगेशन को हम बढ़ावा नहीं देते।
अनेक बैंकों ने नए-नए रिफॉर्म्स किये मगर वो रिफॉर्म्स बैंकों तक ही सीमित रह गए, उनका लाभ पूरे सेक्टर को नहीं मिला...बैंक स्पेसिफिक रिफॉर्म्स इस सेक्टर को नहीं बदल सकते। अगर सेक्टर में रिफॉर्म्स आयेंगे तो सहकारिता अपने आप मजबूत हो जाएगी।
कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक सिर्फ बैंकिंग करने की दृष्टि से काम न करें बल्क�� बैंक जिस उद्देश्यों से बने थे उनकी प्रतिपूर्ति की दिशा में काम करना हमारा ल��्ष्य होना चाहिए।
सहकारी क्षेत्र का कोई भी यूनिफाइड ड��टाबेस नहीं है, और जब तक डेटाबेस नहीं होगा आप इस क्षेत्र के विस्तार के बारे में नहीं सोच सकते हैं।
विस्तार तभी हो सकता है जब आप जानते हो कि विस्तार कहाँ करना है। सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र का डेटाबेस बनाने का काम शुरू कर दिया है।
आजादी के बाद से 70 साल में 64 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य बनी,परन्तु प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 8 साल में 64 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में वृद्धि हुई, कृषि का निर्यात पहली बार 50 बिलियन डॉलर को पार कर गया है।
यह किसान कल्याण के प्रति मोदी सरकार की निष्ठा को दर्शाता है।