इस्सस्स कितना सुकून मिलता है जब एक संस्कारी औरत अपने मजदूर नल्ले पति के काम पे जाने के बाद मुझ जैसे जालिम मर्दों को अपने घर बुलाती है
उफ्फ और एक गदरायी घोड़ी के रूप मैं अपने यौवन को तुम्हे पूरी तरह से समर्पित करती है। अपने ही पति के बेड पे वो तुम्हारी दासी होती है