जब भगवान के नाम पर कथा/प्रवचन करने वाले लोग चार्टर्ड विमान से घूमेंगे,आलीशान बंगलों में रहेंगे,ब्रांडेड कपड़े पहनेंगे और पूरी बेशर्मी से अपनी इस luxury lifestyle का दिखावा भी करेंगे तो धर्म के नाम पर लालच तो बढ़ेगा ही!आज धर्म के नाम पर हर तरफ व्यापार चल रहा है..और ये कथावाचक/प्रवचन करने वाले श्रोताओं को सादा जीवन जीने के उपदेश देते हैं😀 कहां से ये आपको साधु,संत,सिद्ध,महान दिखाई देते हैं? ये सब बस बिज़नेसमैन हैं और इन्हें वैसे ही देखा जाए..पैसे,पद,प्रसिद्धि के लालच में धर्म को बेच रहे व्यापारी🙏
धर्मेंद्र प्रधान जी को शायद नितिन जी से शासन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत सीखना चाहिए था।
इस देश में अगर किसी को परेशान करना ही है तो गरीब, छात्र और किसान को नहीं सीधा अमीर आदमी को पकड़िए।
पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाइए, टोल टैक्स में साल में दो बार संशोधन कीजिए, पार्किंग को प्रीमियम अनुभव घोषित कर दीजिए, SUV पर विशेष राष्ट्रनिर्माण शुल्क लगाइए और बीच-बीच में बिजली काटकर नागरिकों को आत्मचिंतन का अवसर भी दीजिए।
फिर देखिए लोकतंत्र कितना शांत रहता है। क्योंकि अमीर आदमी के पास आंदोलन करने का समय नहीं होता। वह सुबह बैंक, दोपहर ग्राहक, शाम अकाउंटेंट और रात को टैक्स कंसल्टेंट से जूझ रहा होता है।
इथेनॉल का उदाहरण सामने है। सोशल मीडिया पर हजार पोस्ट लिखिए, वीडियो बनाइए, विशेषज्ञों को टैग कीजिए, लेकिन अगले दिन ऑफिस जाना है तो वही पेट्रोल भरवाना पड़ेगा जो पंप पर मिलेगा।
फिर टोल टैक्स को देख लीजिए। सड़क पहले आपकी जेब के पैसों से बनेगी, फिर उसी सड़क पर चलने के लिए आपसे किराया भी लिया जाएगा। आप खुशी-खुशी देंगे भी, क्योंकि टोल प्लाज़ा पर क्रांति करने से पीछे खड़ी गाड़ियों के हॉर्न ज़्यादा तेज़ बजते हैं।
आख़िरकार अमीर आदमी की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वह नाराज़ तो बहुत होता है, लेकिन उसके पास नाराज़गी को समय देने का समय नहीं होता।
इसलिए शासन का नया सिद्धांत होना चाहिए यदि विरोध से बचना है, तो उस वर्ग पर बोझ डालिए जो सबसे अधिक भुगतान कर सकता है और सबसे कम समय निकाल सकता है।
बाकी सोशल मीडिया तो है ही। यहाँ क्रांति भी हो जाएगी, रीट्वीट भी हो जाएगा, और अगले दिन टैंक फुल भी हो जाएगा।
यह बिना लाग-लपेट के कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में अधिकारियों के स्तर का भ्रष्टाचार निर्बाध चल रहा है और @myogiadityanath इसे रोकने में असफल रहे हैं। जब IAS अधिकारी गलत करने पर निलंबित न हो कर दो महीने बाद प्लम पोस्टिंग पा जाते हों, तो यही सब होगा।
You want the young officer to sacrifice his life for the love of the Nation, but you don’t want him to express his love for his fiancée.
In the Army we say ‘Youngster nahi karega, toh kaun karega’.
If you can not find a fault in his professional capabilities, don’t do this nuktachini for such a pure gesture of love and belonging.
Military equipment has been on display during many ‘Know your Army’ exhibitions around the country. The students and non military personnel have clicked pics with it showing pride and love for the Army. So, please don’t bring in the national security angle into this.
Let the young soldier do his national duty with pride and honour 👍
Jai Hind 🇮🇳
विचारधारा के स्तर पर आज की स्थिति देखी जाए तो कॉन्ग्रेस और भाजपा दोनों 99% एक जैसी हो चुकी हैं। 19-21 का अंतर है और जिससे अब कोई अंतर नहीं पड़ता।
अब तक का सारा खेल टॉप लीडरशिप(पार्टी फेस) का था। मुझे कॉन्ग्रेस का पार्टी फेस PM पद के लायक नहीं लगता था/है और अब 12 सालों के बाद मेरे लिए भाजपा का टॉप पार्टी फेस भी आगे PM पद पर बने रहने के लायक नहीं बचा है।
सरल भाषा में बताऊँ तो अब मेरे लिए कॉन्ग्रेस और भाजपा, दोनों एक ही पायदान पर खड़े हैं। मेरे पास आज एक भी ठोस कारण नहीं है कि मैं इन में किसी भी एक को दूसरे के ऊपर रखकर चुन सकूँ।
अब दोनों पार्टियाँ या तो ऑफर करें कि भविष्य के लिए उनके पास क्या है? क्योंकि दोनों के पास जो वर्तमान पार्टी फेस हैं, इनको देखकर या इनके नाम पर तो मैं घंटा वोट नहीं डालने वाला।
हाँ यदि इन दोनों में से कोई कुछ अल्टीमेट कर देता है तो सोच सकते हैं, जैसे कि दोनों में कोई भी यदि जातिगत आरक्षण हटाने का ऐलान कर दे...
हो-हो-हो
अभी-अभी रियलाइज हुआ कि मैं भी राहुल-नरेंद्र के लेवल के चुटकुले मार लेता हूँ। अपने आप को ही चुन लूँगा 2029 में।
और हाँ, मुझसे ये 'भाजपा हिंदूवादी है', 'भाजपा ही हमें मु$लमानों से बचा सकती है' टाइप कि बक^दी मत करना नहीं तो मैं उस विषय पर भी असल सवाल पूछ लूँगा।
वही सवाल जो न तो आपके स्वघोषित हिंदूवादी इंफ्लुएंसर्स लोग कभी अपनी फेवरिट हिंदूवादी पार्टी/सरकार से पूछते हैं न ही आप लोग 'हिंदुत्व की रक्षा' के नाम पर QR-UPI से ₹100-200-1000 देने के बाद अपने उन इंफ्लुएंसर्स से पूछते हैं। जैसे कि:
सबको पता है कि इ$लाम में समस्या है। लेकिन इस समस्या और 25-30 करोड़ भारत के मु$लमानों को लेकर आपकी स्वघोषित हिंदूवादी पार्टी के पास क्या ब्लूप्रिंट है?
>क्या भाजपा कभी कुRAन(उसके नफरती पार्ट्स) बैन करेगी?
>क्या भाजपा 30 करोड़ मु$लमानों को हिन्दू बनाएगी(घरवापसी)?
>क्या सभी 100 करोड़ हिन्दू(खासकर सभी पंथों के टॉप आचार्य इत्यादि) इन 30 करोड़ मु$लमानों को सनातनी की तरह स्वीकार करेंगे?
>या भाजपा 30 करोड़ मु$लमानों का नरसं.. कराएगी?
वैसे मेरे पास इससे बड़े-बड़े और भी सवालों की लिस्ट है पर पहले अपनी फेवरिट पार्टी और फेवरिट हिंदूवादी इंफ्लुएंसर भैया/दीदी/they/them सब से इनके जवाब ले आइए। फिर अगला होमवर्क दूँगा।
वैसे बता दूँ कि ये वाला चूरन मैं बचपन में चाट कर हजम भी कर चुका हूँ इसलिए 'किसी भी' भाजपा समर्थक इंफ्लुएंसर(डायरेक्ट और कवरिंग फायर वाले भी) में गूदा नहीं है कि इस विषय में वन ऑन वन कर सके। जी हाँ, 'किसी भी'।
इन सब डायरेक्ट-इनडायरेक्ट SM वॉरियर्स का अंतिम ब्रह्मास्त्र सदा ही 'तो क्या कॉन्ग्रेस को वोट दे दें' होता है। अब तक इससे ऊपर की स्क्रिप्ट नहीं लिख पाया कोई सेर।
और इस ब्रह्मास्त्र का उत्तर मैंने इसी ट्वीट के पहले वाक्य में दे दिया है। उसके आगे ट्वीट में व्याख्या भी दी है। लूप बना दिया है आपके लिए, यहाँ तक पढ़ें फिर दोबारा ऊपर जाएँ और पढ़ते रहें।
यहाँ तक आकर आप में से कई(मानसिक गुलाम) तो गाली बक देंगे पर कुछ सिन्सिबल(कंफ्यूज़्ड) लोग यह भी लिखेंगे कि, 'फिर हम वोट किसे दें।'
बताऊँगा-बताऊँगा, सब बताऊँगा और आपकी भावनाओं से खेलकर नहीं बल्कि तर्कों के साथ बताऊँगा। धार्मिक एंगल के साथ भी बताऊँगा। पर अभी नहीं, अगले किसी पोस्ट/वीडियो में।
और सबसे बड़ी बात, बिना QR-UPI लगाए और 'हिंदुत्व की रक्षा' के नाम पर आपसे पैसा माँगे बताऊँगा। तब के लिए...
राम राम🙏
जब कि अपना देश रेप कैपीटल के रूप में विख्यात हो ही चुका है तब क्या सरकार से क्या ये अपेक्षा हम रख सकते हैं कि इंस्टाग्राम पर नचनिया वीडियो पर लगाम लगे ।
सरकार और कुछ न कर सके तो डेटा मंहगा कर दे । इससे बहुत किस्म के अपराधों पर नियंत्रण लगेगा।
सस्ता डाटा इस देश का दुश्मन हो गया ।
Drug mafia, liquor mafia, land mafia, timber mafia... all run by politicians! Dig into pubs, clubs & bars & you'll find links to BJP leaders! Retired Army officer breaks his silence on the truth behind Brigadier Mukesh Joshi's murder.
Brigadier VK Joshi, 70, served the Army for three decades, survived war and multiple counterinsurgency operations, but lost his life to a stray bullet in a pointless clash between a group of urban dehatis.
A Delhi-registered Fortuner overtook a Scorpio N on Mussoorie Road in Dehradun, which hurt the ScorpioN occupants ego. The ScorpioN occupants gave chase. When the Fortuner didn’t yield, the ScorpioN group of urban dehatis pulled out a pistol and started firing.
At that very moment, Brigadier Joshi was out on his morning walk. A bullet from that reckless exchange found him. His friends rushed him to the hospital, but he was declared dead on arrival.
A life of service ended by someone else’s arrogance. As far as the urban dehatis are concerned, I'm sure they'll be out on bail in no time.
और आपकी सरकार ने जो ₹2,97,000 करोड़ का SC/ST बजट सवर्णों के टैक्स के भरोसे छोड़ रखा है, उसका क्या? 82 करोड़ लोगों के फ्री राशन का भार कौन सी पीढ़ी उठा रही है? हर राज्य रेवड़ियों के भार से कर्ज में डूबता जा रहा है।
जो कमाता नहीं, उसका पेट भरने के लिए कमाने वाले टैक्सपेयर को ‘टैक्सदाता’ जैसा फर्जी नाम दे कर एक्सप्लॉइट कर रही है आपकी सरकार।
जब राहुल गाँधी से ले कर आपके हर नेता तक यह मान कर बैठे हैं कि प्राइवेट सेक्टर में, या सरकारी सचिवालयों में दलित-पीड़ित-शोषित-वंचित है ही नहीं, तो उनकी सब्सिडी की फंडिंग तो वही 10% कर रहा है न? ये किसकी देन है?
युद्ध की स्थिति है, तेल की समस्या हो सकती है। ठाकुर के कुएँ में तेल थोड़ी है कि वहाँ से भी "चोचन चोचन " कहकर छीन लोगे। मूल निवासियों की समस्या यह है कि जब तक ये "ठाकुर यानि आर्यन देश यानि ईरान " का तेल नहीं पी लेंगे, तब तक इनकी मोटर ही नहीं चलेगी.. 🤪
@ajeetbharti का निर्मम प्रहार 👍
मोदी जी :
अरे शाह जी, सुना है आपका वो अजीत बड़ा तेज बोलता है, हर किसी से भिड़ जाता है?
अमित शाह:
अरे नहीं नहीं मौसी जी, भिड़ता नहीं है… बस सवाल पूछता है। और सवाल भी ऐसे कि सामने वाला सोचने पर मजबूर हो जाए।
मोदी जी:
पर सुना है कभी-कभी बहुत ज़्यादा बोल देता है।
शाह:
अरे मौसी जी, जो आदमी सच बोलने की आदत डाल ले न, उसे कभी-कभी ज़्यादा ही बोलना पड़ता है। वरना लोग समझते ही नहीं।
मोदी जी:
अच्छा… पर सरकार की भी आलोचना करता है?
शाह (हल्की मुस्कान के साथ):
मौसी जी, जो अपने ही घर से सवाल पूछ सकता है, वही तो असली अपना होता है। जो हर बात पर ताली बजाए, वो तो भीड़ होती है।
मोदी जी:
कमाता-धमाता क्या है?
शाह:
कमाता भी है मौसी जी… और सबसे बड़ी बात, अपने दम पर कमाता है। किसी के इशारे पर नहीं बोलता।
मोदी जी:
और गुस्सा?
शाह:
थोड़ा-बहुत है… पर मौसी जी, वो गुस्सा अपने लिए नहीं है, मुद्दों के लिए है।
मोदी जी (सोचते हुए):
हूँ… और अगर कल को हमसे भी सवाल पूछने लगे तो?
शाह (हँसते हुए):
तो समझिए मौसी जी कि आदमी अभी भी ईमानदार है।
मोदी जी:
अच्छा… और लोग उससे इतना डरते क्यों हैं?
शाह:
क्योंकि मौसी जी… वो आदमी लाइन में खड़ा होना नहीं जानता, और जो लाइन से बाहर खड़ा होता है न… उससे सब डरते हैं।
क्या राम मंदिर के निर्माण में उन वीर शहीद कारसेवकों का कोई योगदान नहीं था, जिनके बच्चों के खिलाफ आज UGC जैसे नियम लाए जा रहे हैं?
क्या राम मंदिर के निर्माण में उन तमाम हिंदुओं का कोई योगदान नहीं था, जिन्होंने दान दिया, जिनकी आस्था और सहयोग से राम मंदिर बना? आज उन्हीं हिंदुओं के बच्चों के खिलाफ UGC जैसे नियम लाए जा रहे हैं।
क्या सिर्फ़ UGC ही बीजेपी की एकमात्र उपलब्धि है?
>श्रीराम को “जातिवादी हत्यारा” बताने वाली महाजन रिपोर्ट आज तक अदालत से वापस नहीं ली गई।
> हाल ही में बीजेपी द्वारा ही आंध्र प्रदेश में BC Protection Act लाया गया, जो कई मायनों में UGC जैसे प्रावधानों से मिलता-जुलता है।
>अंबेडकर जैसे व्यक्ति, जिसने राम और कृष्ण के बारे में बेहद आपत्तिजनक बातें लिखीं, जिसने कई हिंदुओं को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया उसी को भारत रत्न दिया और आज भाजपा ही उसे सबसे अधिक महिमामंडित कर रही है।
>आज हर सड़क और चौराहे पर अंबेडकर की मूर्तियाँ दिखाई देती हैं, यह भी बड़े पैमाने पर भाजपा के शासन में हुआ है।
चाहे अंबेडकर जयंती पर अवकाश की बात हो या अंबेडकर के लिए पंचतीर्थ बनवाने की, यह सब भाजपा ही कर रही है। क्या अंबेडकर को इतना महिमामंडित करने से हिंदुत्व को कोई समस्या नहीं होती, जबकि आज उसके ही समर्थक बड़ी संख्या में हिंदू देवी-देवताओं को गालियाँ दे रहे हैं?
>फुले को भी भाजपा सम्मानित कर रही है, वही फुले जिसने “मानव मोहम्मद” नाम की कविता लिखकर मोहम्मद की प्रशंसा की, जिसने लोगों को ईसाई बनने की सलाह दी, जिसने हिंदू धर्मग्रंथों को सामाजिक उत्पीड़न की कहानी बताया।
जिसने “गुलामगिरी” जैसी पुस्तक लिखकर और सभाएँ करके खुलेआम अंग्रेजों का समर्थन किया, अपनी ही जाति सहित लोगों से कहा कि अंग्रेजों का साथ दो, उन्हें इस देश से जाने मत दो क्योंकि उनका शासन हमारे लिए अच्छा है और ब्राह्मण उन्हें भगाना चाहते हैं।
>आज उसी फुले को भाजपा पूज रही है।
फुले से जुड़े स्मारक, पार्क और संस्थान बनाए जा रहे हैं।
छात्रवृत्ति, हॉस्टल और सामाजिक न्याय योजनाएँ फुले और सावित्रीबाई फुले के नाम पर चलाई जा रही हैं।
>पंचायत चुनाव में आरक्षण, पसमांदा मुसलमानों को आरक्षण, मनरेगा में आरक्षण जो भाजपा लेकर आई, क्या इससे हिंदुत्व मजबूत हो रहा है?
>मध्य प्रदेश में 94 OBC जातियों में से 38 मुस्लिम समुदाय हैं।
उत्तर प्रदेश में 79 OBC जातियों में से 38 मुस्लिम उपजातियाँ हैं।
>क्या भाजपा ने देश में गौहत्या पर प्रतिबंध लगाया?
>क्या भाजपा और आरएसएस ने काशी और मथुरा के लिए कोई ठोस कदम उठाया?
>मंदिरों को मुक्त कराने की बात तो दूर, कई जगहों पर यही भाजपा सरकार मंदिरों को अपने नियंत्रण में ले रही है जिनकी आय अब सरकार के नियंत्रण में जाती है, लेकिन अन्य धर्मों के संस्थानों पर ऐसा नियंत्रण नहीं है।
We GC are Hindu.
We don't need any certificate of our faith from anyone.
Opposing a political party doesn't cancel our religion.
Hope that's clear.
Thank you 🙏
एक संत पार्टी के खिलाफ बोले, तो उसका संत होने का सर्टिफिकेट कैंसिल,
लेकिन वहीं दूसरा संत पार्टी को सपोर्ट करे, तो वो महान?
साफ है कि संत होने का और उसके हिंदुत्व का पैमाना वो किस पार्टी को सपोर्ट करता है, उसपे टिका है!
राजनीति से दूर रहने की सलाह सिर्फ कुछ संतों को ही क्यों? बाकियों को ये सलाह क्यों नहीं?
@chidswami Maharaj , mach se ugc ka mudda kyu nhi uthna chahiye tha??
Sant samaj jab hr rajneetik mudde pr bol skta h to ugc pr kyu nhi?
Aap logo ko modi ji ka chatukar bnna h ya hindu dharam ka rakshak, ye aap santo ko bhi sochna pdega.