श्रद्धेय श्री अशोक सिंघल जी की जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके जीवन, कार्यों और सांस्कृतिक योगदान को स्मरण करने के लिए विशेष लोगो तैयार किया गया है।
लोगो की भगवा–केसरिया पृष्ठभूमि त्याग, तपस्या, आध्यात्मिक चेतना, शौर्य और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
@VHPDigital
मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के सताए लोगों को शरण में रखा है।
मैं आपको अपने देश की प्राचीन संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं।
'दिग्विजय दिवस' पर स्वामी विवेकानंद जी को कोटि कोटि नमन।
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मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं—वह समाज को जोड़ने वाला केन्द्र भी बन सकता है। समरसता, संस्कार और सेवा से जुड़ा मंदिर सामाजिक जीवन में नई भूमिका निभा सकता है। #VHPSthapnaDiwas
वाल्मीकि जयंती, रविदास जयंती और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में समानता और आत्मीयता का भाव मजबूत करने के प्रयास किए गए। #VHPSthapnaDiwas
विश्व हिन्दू परिषद की कार्यधारा में अस्पृश्यता के विरुद्ध संतों की आवाज एक महत्वपूर्ण अध्याय रही है। “न हिन्दू पतितो भवेत्”—हर हिन्दू के सम्मान और आत्मीयता का भाव। #VHPSthapnaDiwas
जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर हिन्दू समाज को एकात्मता के सूत्र में जोड़ने का आह्वान विभिन्न संत सम्मेलनों में हुआ। यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। #VHPSthapnaDiwas
सामाजिक समरसता केवल भाषण का विषय नहीं।
मंदिर, शिक्षा, सेवा, सामूहिक कार्यक्रम और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आत्मीयता बढ़ाना—समरस समाज की दिशा में कदम हैं।
#VHPSthapnaDiwas
हिन्दू एकता और समरसता
उडुप्पी सम्मेलन में संतों ने “हिन्दवः सोदरा सर्वे” का उद्घोष करते हुए अस्पृश्यता समाप्त करने और हिन्दू समाज को अखंड एकात्मता के सूत्र में संगठित करने का आह्वान किया। #VHPSthapnaDiwas
छह दशक से अधिक की यात्रा।
अनेक सम्मेलन, यात्राएँ, सेवा प्रकल्प, सामाजिक समरसता के प्रयास और सांस्कृतिक जागरण।
विश्व हिन्दू परिषद की यात्रा समाज से जुड़ने की यात्रा रही है। #VHPSthapnaDiwas
29 अगस्त—एक स्थापना दिवस ही नहीं, बल्कि उस संकल्प को स्मरण करने का दिन है जिसने हिन्दू समाज के संगठन और सांस्कृतिक जागरण को अपनी कार्ययात्रा का आधार बनाया। #VHPSthapnaDiwas
विश्व हिन्दू परिषद का मूल विचार है कि हिन्दू समाज अपनी परम्पराओं, धर्म और संस्कृति के प्रति गौरव का अनुभव करे और संगठित होकर समाज-जीवन में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाए। #VHPSthapnaDiwas
“मम दीक्षा हिन्दू रक्षा, मम मंत्रः समानता।”
हिन्दू समाज के संगठन के साथ समानता और सामाजिक समरसता का भाव—विश्व हिन्दू परिषद की कार्यधारा का महत्वपूर्ण आधार रहा है। #VHPSthapnaDiwas
विश्व हिन्दू परिषद के उद्देश्यों में भारत तथा विदेशों में रहने वाले हिन्दुओं के बीच भाषा, क्षेत्र, मत, सम्प्रदाय और वर्ग के भेद मिटाकर एकात्मता का अनुभव कराना प्रमुख रहा है। #VHPSthapnaDiwas
हिन्दू समाज की भाषा अलग हो सकती है, क्षेत्र अलग हो सकता है, सम्प्रदाय अलग हो सकता है—लेकिन सांस्कृतिक आत्मीयता सबको जोड़ सकती है।
यही एकात्मता परिषद की मूल भावना रही।#VHPSthapnaDiwas
1964 में आरम्भ हुई विश्व हिन्दू परिषद की यात्रा ने हिन्दू समाज के संगठन से लेकर सेवा, समरसता, धर्म-जागरण और सांस्कृतिक चेतना तक अनेक आयामों को स्पर्श किया। #VHPSthapnaDiwas
विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना केवल एक संगठन का गठन नहीं थी।
यह हिन्दू समाज की एकता, धर्म-संस्कृति के संरक्षण और सेवा को संगठित रूप देने का प्रयास था।#VHPSthapnaDiwas@madhuvanvhp
स्थापना और संकल्प
29 अगस्त 1964, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन दिन संतों, धर्माचार्यों और मनीषियों के आशीर्वाद से विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना हुई।
एक संकल्प के साथ—हिन्दू समाज को संगठित, सुदृढ़ और जागृत करना।
#VHPSthapnaDiwas
राष्ट्र साधना व धर्म जागरण में लीन विश्व हिन्दू परिषद के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर समस्त सनातन हिन्दू समाज एवं कोटिशः कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएँ।
@Bunty_Bajrangi