UP में न AAP का कोई मंत्री है,न सांसद है,न विधायक है.. फिर भी AAP के कार्यकर्ता सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं अपनी गिरफ्तारियां दे रहे हैं..
वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में 399 सीटों पर 2% वोट प्राप्त करने वाली कांग्रेस घर पर बैठी हुई है...
Aam Aadmi Party Telangana State is calling for Chalo Secretariat to demand improvement in government schools education quality & regulation of private school fee hikes on the 10th of July 2025, Thursday at 10:30 AM. Kindly join us & make it successful.
@ArvindKejriwal@SandeepPathak04@PKakkar_@DrDiddiSudhakar
UPSC aspirants are frustrated over anomalies in Prelims 2025, raising doubts about the process. UPSC must address these concerns to maintain credibility. #UPSC#Prelims2025#Transparency
चुनाव से पहले भाजपा के नेता मद्रासी कैम्प में प्रवास करने आए। ‘जहाँ झुग्गी, वहीं मकान’ के फॉर्म भरवा के गए।
जैसे ही भाजपा की सरकार आई, इन झुग्गियों पर बुलडोज़र चला दिया।मुट्ठी -भर लोगों को मकान दिया, वो भी नरेला में। ज़्यादातर लोग सड़क पर आ गए हैं।
ये है भाजपा की सच्चाई…
🚨 वनजमिनीचा घोटाळा उघड! पुण्यातील जमीन बळकावण्यात राजकारणी- अधिकाऱ्यांचं बिल्डरांशी संगनमत — सर्वोच्च न्यायालयाचा धडक इशारा! 🌳🏢
सर्वोच्च न्यायालयाने एका निकालात पुण्यातील मूल्यवान आरक्षित वनजमीन कशी मागास���र्गीय कुटुंबाच्या पुनर्वसनाच्या नावाखाली बेकायदेशीरपणे बिल्डरला विकली गेली, ��े उघड केलं आहे.
🔍 पार्श्वभूमी:
•1879 मध्ये कोंढवा बुद्रुकमधील 32 एकर जमीन आरक्षित वनजमीन म्हणून जाहीर.
•1934 मध्ये केवळ 3 एकर जमीनच अधिकृतपणे डि-रिझर्व्ह.
•उरलेली 29 एकर जमीन अजूनही वनजमीनच होती.
•1960च्या दशकात ‘चव्हाण’ कुटुंबाची जमीन कुष्ठरोग रुग्णालयासाठी संपादित.
•त्यांना 1968 मध्ये 1 वर्षासाठी शेतीसाठी भाडेपट्टीने जमीन देण्यात आली – अट: विक्री, हस्तांतरण, अन्य वापर नाही.
•भाडेपट्टी कधीच नूतनीकरण झाला नाही.
पण तरीही 1998 मध्ये राजकीय दबावाखाली, ही जमीन स्थायीरित्या चव्हाण कुटुंबाला देण्यात आली आणि लगेचच Richie Rich CHS नावाच्या बिल्डरला लक्झरी टॉवर बांधण्यासाठी विकली गेली! 🏗️
💥 सर्वोच्च न्यायालयाने काय म्हटलं?
•ही संपूर्ण वाटप व विक्री पूर्णतः बेकायदेशीर होती!
•2007 मध्ये दिलेली पर्यावरण मंजूरी रद्द करण्यात आली.
•राज्य महसूल विभाग, वन विभाग, व अधिकाऱ्यांची जबाबदारी ठरवली.
•जमीन ३ महिन्यांत वनविभागाकडे परत द्यावी, असा स्पष्ट आदेश.
•प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेशात विशेष चौकशी समित्या स्थापन करण्याचे निर्देश.
⚖️ गंभीर इशारा:
हा प्रकार म्हणजे राजकारणी, नोकरशहा आणि बिल्डर यांचं संगनमत कसं लोकशाही व कायद्या-नियमांची थट्टा करतं, याचं क्लासिक उदाहरण आहे — वनसंपदा लुटली गेली, पर्यावरणाला धोका दिला गेला आणि संपूर्ण यंत्रणेला फसवलं गेलं.
🌲 संदेश स्पष्ट आहे: वनजमीन विक्रीसाठी नाही! विकास हवाच पण तो निसर्ग आणि कायद्याच्या किमतीवर नाही!
#वनजमिनीघोटाळा #सर्वोच्चन्यायालय #RichieRichFraud #PuneLandGrab #BuilderMafia #वनसंवर्धन #SCJudgment #JusticeForNature
यही हक़ीक़त है...
अकेले लड़ने पर कांग्रेस यूपी में 3% वोट भी नहीं ले पाई थी...
लेकिन कांग्रेस दरबारी पत्रकारों की मदद से फर्जी माहौल बनाकर ज्या��ा सीटों के लिए लड़ती रहती है...
अगर कांग्रेस को ज्यादा सीट न मिले तो फिर वो सहयोगी को हराने के लिए बीजेपी की मदद करने लगती है...
प्रश्न विचारणं गुन्हा कधीपासून झालं?
RTI वापरणाऱ्यांना “सराईत” म्हणणं ही अत्यंत खालची पातळी आहे.
माहिती मागणारे गुन्हेगार नाहीत — ते लोकशाहीचे रक्षक आहेत.
सराईत गुन्हेगार आहेत ते माहिती लपवणारे अधिकारी.
सराईत आहेत ते त्यांचं संरक्षण करणारे माहिती आयुक्त.
सराईत आहे ती प्रश्न टाळणारी, अपारदर्शक, भंपक व्यवस्था.
एकापेक्षा जास्त माहिती अधिकार अर्ज.
हा हव्यास नाही, ती गरज असते.
सरकारने वेळेवर माहिती दिली तर, पुन्हा पुन्हा अर्ज करण्याची वेळच येणार नाही.
जे भ्रष्टाचार उघड करतात, त्यांना ब्लॅकमेलर ठरवायचं?
माहिती मागणाऱ्याला गुन्हेगार ठरवायचं?
आणि माहिती दडपणारा निर्दोष?
चूक कोणाची?
प्रश्न विचारणाऱ्याची की ती माहिती लपवणाऱ्याची?
गुन्हेगार कोण?
उत्तर देणं टाळणारे अधिकारी.
RTI वापरणाऱ्यांचा अपमान थांबवा.
प्रश्न विचारणं हा गुन्हा नसतो — तो लोकशाहीचा श्वास असतो.
लोकशाही टिकवायची असेल,
��र माहितीचा अधिकार जपायलाच लागेल.
नाहीतर व्यवस्था सडेल, आणि जनतेचा आवाज दुर्बल ठरेल.
#RTI #लोकशाही #Transparency #RightToKnow #Marathwada
दीनानाथ मंगेशकर रुग्णालय प्रकरणी सगळी चूक रुग्णालयाचीच आहे असं म्हणता येणार नाही, पण गर्भवती महिलेबरोबरचा प्रकार असंवेदनशील होता, असं मुख्यमंत्री म्हणताहेत. रुग्णाचे नातेवाईक म्हणतात, आम्ही ४.३०-५ तास रुग्णालयात होतो, आमच्याकडे कुणी लक्ष दिलं नाही.त्या दिवसाचं सीसीटीव्ही फुटेज सार्वजनिक क��ा,जनतेला सत्य कळू द्या!
#दीनानाथप्रकरण
#सीसीटीव्हीफुटेजसार्वजनिककरा
#जनतेलासत्यकळूद्या
केजरीवाल-सिसोदिया का शिक्षा मॉडल “अनगाइडेड मिसाइल” है - रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री, दिल्ली
मुख्यमंत्री जी को लगता है कि हैप्पीनेस और देशभक्ति करिकुलम "एकेडमिक” गतिविधि नहीं है, बल्कि समय की बर्बादी है!
और इन्हीं विचारों के साथ मुख्यमंत्री जी ये भी कहती हैं की वो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार स्कूल चलायेंगी!!
पर अफ़सोस कि मुख्यमंत्री जी के कथन, उनके विचारों और इरादे के बीच गहरे विरोधाभास की तरफ़ संकेत करते हैं..
ये विरोधाभास इसलिए दिख रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री जी ने:
-बिना हैप्पीनेस और देशभक्ति करिकुलम समझे उस पर अपने विचार बना लिए ��ैं, और
-बिना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पढ़े अपना इरादा बना लिया है
अगर मुख्यमंत्री जी ने कभी भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर एक नज़र डाली होती, तो उसकी पहली लाइन ही उन्हें ये कहने से रोकती की हैप्पीनेस-देशभक्ति करिकुलम “एकेडमिक” गतिविधि नहीं है!!
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की पहली लाइन कहती है:
-“शिक्षा पूर्ण मानव क्षमता को प्राप्त करने, एक न्यायसंगत और न्यायपूर्ण समाज के विकास और राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए मूलभूत आवश्यकता है।”
अगर शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के इस लक्ष्य की प्राप्ति का साधन है, तो कृपया मुख्यमंत्री जी अपने अगले इंटरव्यू में इन दो मुद्दों पर प्रकाश डालें:
पहला, इसकी प्राप्ति के लिए स्कूलों में क्या किया जाना चाहिए, और
दूसरा, इसके आलोक में हैप्पीनेस-देशभक्ति करिकुलम “नॉन एकेडमिक” गतिविधि कैसे हुई?
बतौर शिक्षा मंत्री, मनीष सिसोदिया जी ने दिल्ली सरकार के सभी स्कूलों में 2018 में हैप्पीनेस करिकुलम और 2021 में देशभक्ति करिकुलम शुरू किया था।
पिछले पाँच सालों में देश का ऐसा कोई राज्य ��हीं होगा जहाँ के शिक्षा अधिकारी और शिक्षक दिल्ली के इन पाठ्यक्रमों को देखने और समझने के लिए दिल्ली सरकार के स्कूलों में नहीं आए होंगे।
2020 में तत्कालीन अमेरिका के राष्ट्रपति की पत्नी मिलेनिया ट्रम्प हैप्पीनेस करिकुलम की क्लास देखने दिल्ली सरकार के स्कूल में आई थीं।
उनका मानना था कि दुनिया भर में बच्चे स्ट्रेस, डिप्रेशन और एंजाइटी जैसे मुद्दों से जूझ रहे हैं, और हैप्पीनेस करिकुलम इन चुनौतियों से उभरने का एक अच्छा मॉडल है।
पर हमारी मुख्यमंत्री जी को ये अनुपयोगी और समय की बर्बादी लगता है!!
पर एक अच्छी बात ये है की मुख्यमंत्री जी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार स्कूल चलाना चाहती है।
तो अगर वो वाक़ई में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर सीरियस हैं तो ज़ाहिर है करिकुलम भी इस नीति के अनुसार ही होने चाहिए।
इसलिए मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि वो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सिर���फ़ इन दो प्रावधानों पर एक नज़र डाल लें:
-क्लॉज़ 4.4- “शिक्षा का उद्देश्य केवल संज्ञात्मक समझ न होकर चरित्र निर्माण और इ��्कीसवी शताब्दी के मुख्य कौशल से सुसज्जित करना है।”
-क्लॉज़ 4.28-“विद्यार्थियों को कम उम्र में “सही को करने” के महत्व को सिखाया जाएगा और नैतिक निर्णय लेने के लिए एक तार्किक ढांचा दिया जाएगा।”
इन प्रावधानों को पढ़ने के बाद मुख्यमंत्री जी अपनी टीम से पूछें कि केजरीवाल सरकार की “अनगाइडेड मिसाइल” के अलावा देश के किस राज्य में, कौन सा करिकुलम है जो व्यावहारिक रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के ���नुरूप है?
और अब जबकि, मुख्यमंत्री जी ने अपनी सरकार के पहले बजट में “राष्ट्रनीति” और “साइंस ऑफ़ लिविंग” जैसे कार्यक्रम प्रस्तावित किये हैं, तो साथ में ये भी बता दें की क्या ये "एकेडमिक" कार्यक्रम हैं, या "नॉन-एकेडमिक"?
और क्या ये वाक़ई “हैप्पीनेस-देशभक्ति करिकुलम” से कम प्रयासों के बाद भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल लक्ष्यों को पाने में सक्षम होंगे?
उम्मीद है, दिल्ली की नई मुख्यमत्री को�� भी निर्णय लेने से पहले इन मुद्दों पर गहराई से विचार करेंगी क्योंकि ये बच्चों के भविष्य क��� सवाल है, जोकि सभी राजनैतिक पार्टियों की सामूहिक ज़िम्मेदारी होनी चाहिए…
म्यांमार और थाइलैंड में 7.7 तीव्रता का भयानक भूकंप आया है। इसके झटके दिल्ली-NCR में भी महसूस किए गए। मैं भगवान से प्रार्थना करती हूँ कि सभी सुरक्षित हों।
विविध कल्याणकारी योजना किंवा लोकांना थेट पैसे दिल्यामुळे लोक आळशी झालेत, कामगार - मजूर मिळत नाहीत असं म्हटलं जातं.मला हे पटत नाही. असं असेल तर देशात बेरोजगारी उरलेली नाही असं म्हणावं लागेल.
मुळात अशा योजना योग्य त्या लाभार्थ्यांपर्यंत पोहोचतात का ? पोहोचल्या तरी व्यसनाधीन व्हावं आणि कामधंदा करू नये एवढा पैसा किंवा मदत या योजनांमधून मिळते का? आणि मिळत असली तरी ते लोक व्यसनाधीन व्हावेत अशी व्यवस्था कोणी आणि का निर्माण केली असावी? लोक व्यसनाधीन होऊ नयेत किंवा ते व्यसनाधीन होण्यासाठी जबाबदार असणारी कारणे बंद करणे ही जबाबदारी कुणाची आहे?
त्यामुळे कल्याणकारी योजना दिल्याने लोक काम करत नाहीत व्यसनाधीन होतात हा अपप्रचार अशा योजना बंद करण्यासाठी किंवा सामान्य लोकांना त्यांच्या कर रूपातून मिळणारे हक्क बंद करण्यासाठी केला जाणारा प्रचार असावा असं माझं मत आहे.
#कल्याणकारीयोजना #बेरोजगारी #व्यसनाधीनता #कामगारसमस्या #योजनांचाप्रभाव
गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव में @AAPGujarat के कार्यकर्ता भाजपा की भय,भ्रम और भ्रष्टाचार की राजनीती के आगे झुके नहीं, तानाशाहो के आगे मजबूती से लड़ कर 35 सीट पर जीत हासिल की है। आने वाले समय में हम मजबूती से लड़ेंगे और जीतेंगे।
हम तानाशाहो के आगे झूकने वाले नहीं है।
दिल्ली के एलजी साहेब कह रहे हैं कि वो यमुना को 3 साल में साफ़ कर देंगे!!
बधाई हो बीजेपी वालों।अब आप मुख्यमंत्री और मंत्री चुनने की चिंता छोड़ दो, कोई ज़रूरत नहीं है इनकी, एलजी साहेब सब संभाल लेंगे।
आख़िर जब एलजी साहेब ख़ुद यमुना साफ़ कर सकते हैं, तो बाक़ी गवर्नेंस का ऐसा कौन सा मुद्दा है जो ये अकेले मैनेज न कर सकेंगे?