प्रिय !
तुम्हारे होने को
मैं किसी संबोधन की तरह नहीं,
एक ऐसी अनिवार्यता की तरह जानता हूँ –
जिसके अभाव में
मेरे भीतर का संसार
व्याकरणहीन हो जाता है ।
/ आरव
आज के छात्र आंदोलन के दौरान संयम, संवेदनशीलता और पूरी जिम्मेदारी के साथ स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन और पुलिस के सभी अधिकारियों एवं जवानों का मैं धन्यवाद करता हूं।
मेरे प्यारे युवा साथियों,
आपने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठाई। लोकतंत्र में अपनी बात रखने का आपका अधिकार है और आपकी आवाज़ का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
सरकार ने आपकी बात सुनी है। हमारे सरकार के वरिष्ठ मंत्रीगण आपसे लगातार संवाद करते रहे हैं और मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आपकी मांगों पर पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई होगी।
पिछले कुछ दिनों में आपने देखा है कि दोषी चाहे कोई भी हो, सरकार ने किसी को भी बख्शा नहीं है। हमारा स्पष्ट उद्देश्य है कि व्यवस्था में ऐसी कमियां दूर हों, जिससे भविष्य में किसी भी छात्र को परेशानी न उठानी पड़े।
हम परीक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना चाहते हैं। इस बदलाव में आपकी भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
हमारा प्रयास है कि झारखंड केवल समस्याओं की चर्चा न करे, बल्कि यहाँ से समाधान की एक नई मिसाल कायम करे।
मैं यह भी समझता हूं कि आपके शांतिपूर्ण आंदोलन के बीच विपक्ष के कुछ लोगों ने राजनीतिक लाभ के लिए माहौल बिगाड़ने और छात्रों को भटकाने की कोशिश की। आप सभी से अपील है कि आप ऐसे किसी भी राजनीतिक नैरेटिव के बहकावे में न आएं।
आप झारखंड का भविष्य हैं। आपकी आवाज़ को नजरअंदाज करना नहीं, उसे सुनना और आपकी समस्याओं का समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है।
मैं अपनी बात दोहराऊंगा कि आइए, संवाद और विश्वास के साथ मिलकर इस मुद्दे का समाधान करें।
यह छात्रों पर जो बर्बरता हुई है इसके हम ख़िलाफ़ हैं.
हेमंत सोरेन को इस तरह से छात्रों डील नहीं करनी चाहिए ये युवा झारखंड को ले जाने वाले लोग हैं, ये सिर्फ अपने बेहतर भविष्य के लिए निष्पक्ष भर्ती प्रणाली की मांग ही तो कर रहे हैं!
प्रेम समाप्त नहीं होता,
वह बस अपना नाम बदल लेता है।
कभी प्रतीक्षा,
कभी प्रार्थना,
कभी कविता।
और कभी-कभी,
एक ऐसा सन्नाटा
जिसमें पूरी उम्र की बातचीत
धीरे-धीरे जलती रहती है।
/ आरव
हमारे बीच जो अंतराल है,
वह दूरी नहीं
अस्तित्व की वह सूक्ष्म दरार है
जहाँ समय स्वयं निर्वाक् हो जाता है ।
तुम अनुपस्थित होकर भी
मेरी चेतना में ऐसी उपस्थित हो
जैसे शून्य में
किसी अनाम सत्य का बोध।
शायद,
दो अस्तित्वों के बीच
अनंत का जो क्षीणतम आभास बचा रहता है
वही प्रेम है।
/ आरव
UPI फ्री रहेगा या नहीं ?
UPI यानी Unified Payments Interface से पेमेंट करते हैं तो अभी कोई चार्ज नहीं लगता है. लेकिन आप क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट करते हैं तो दुकानदार को चार्ज सर्विस प्रोवाइडर (Visa , Master कार्ड ) को देना पड़ता है.अगर यही पेमेंट आप RuPay कार्ड से करते हैं तो कोई चार्ज नहीं लगता है. कानून में प्रस्तावित बदलाव के बाद UPI और RuPay कार्ड पर भी चार्ज लग सकता है लेकिन वो आपको नहीं दुकानदार को चुकाना पड़ेगा.
हफ़्ते भर से सोशल मीडिया पर बहस चल रही है कि UPI फ्री नहीं रहेगा.सरकार रोज़ाना सफ़ाई दे रही है. दरअसल लोकसभा ने कानून पारित कर दिया है कि UPI और Rupay पेमेंट पर अब MDR यानी Merchant Discount Rate लग सकता है. यह चार्ज दुकानदार या कोई भी कंपनी सर्विस प्रोवाइडर को देती है. 2020 से पहले RuPay और UPI पर भी MDR लगता था. यह चार्ज लेनदेन में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और NPCI के बीच बंटता था. National Payments Corporation of India (NPCI) ही UPI का संचालन करता है. सरकार ने स्वदेशी पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए इस पर MDR जीरो कर दिया था . अमेरिकी कंपनी Visa और Master कार्ड को यह छूट नहीं मिली.
MDR हटाने का बहुत बड़ा फ़ायदा हुआ.
UPI से आज हर रोज करीब 75 करोड़ पेमेंट हो रहे हैं जबकि 5 साल पहले यह आँकड़ा करीब 10 करोड़ था.
UPI से अब हर रोज़ करीब 1 लाख करोड़ रुपये का पेमेंट हो रहा है जबकि 5 साल पहले यह आँकड़ा करीब 20 हज़ार करोड़ रुपये था.
UPI को चलाने का खर्च पेमेंट कंपनियाँ और बैंक उठा रही हैं. इंडियन एक्सप्रेस का अनुमान है कि यह खर्च करीब 20 हज़ार करोड़ रुपये है. सरकार हर साल करीब 2 हज़ार करोड़ रुपये की सब्सिडी देती है. UPI को चलाने के लिए सर्वर और टेक्नोलॉजी का खर्च होता है. जैसे जैसे UPI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, यह खर्च भी बढ़ता जा रहा है. सिस्टम अपग्रेड करने की जरूरत है. पिछले साल भर में कई बार UPI ठप होने की खबरें भी आई थीं.
रॉयटर्स के मुताबिक़ MDR ₹2000 से ज़्यादा के लेनदेन पर ही विचार किया जा रहा है. यह चार्ज भी उन दुकानदारों या कंपनियों पर लगेगा जिनका टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपये से ज़्यादा है.सरकार का कहना है कि UPI पर MDR क्रेडिट और डेबिट कार्ड से कम होगा. यह रेट 0.3 से 0.5% होने का अनुमान लगाया जा रहा है. इसका मतलब हुआ कि ₹5000 का सामान ख़रीदा तो ₹15 से ₹25 दुकानदार चुकाएगा. लोग एक दूसरे से लेनदेन करेंगे तो उन्हें कोई चार्ज नहीं लगेगा चाहे अमाउंट कितना भी हो.
अभी ₹2000 से ज़्यादा के UPI पेमेंट हर दिन 100 में से 4 ही होते हैं लेकिन इसकी वैल्यू 100 रुपये में से ₹67 होती है. Jeffries का अनुमान है कि MDR लगने से हर साल 5 से 10 हज़ार करोड़ रुपये की कमाई होगी.
अब सवाल है कि क्या यह कमाई छोड़ी जा सकती है? रिजर्व बैंक हर साल नोट छापने पर करीब 5 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च करता है तो डिजिटल पेमेंट के लिए सब्सिडी देने में क्या हर्ज है? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि रिजर्व बैंक सरकार को 2 लाख 86 हज़ार करोड़ रुपये डिवीडेंड देती है उसका एक हिस्सा सब्सिडी में दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही अमेरिका के दबाव की बात आ रही है . जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया है कि Rupay के कारण अमेरिका की कंपनियों Master और Visa को नुक़सान हुआ है. इसी वजह से UPI और RuPay पर वापस MDR लाया जा रहा है. अमेरिका शिकायत कर चुका है कि उसकी कंपनियों को Level Playing Field नहीं मिल रही है. हालाँकि सरकार इस आरोप से इनकार करती है कि यह फ़ैसला अमेरिका के दबाव में लिया जा रहा है. वित्त मंत्री ने कहा कि रमेश दुष्प्रचार कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच इतना तय है कि फिलहाल आपके लिए UPI फ्री रहेगा. दुकानदार को ज़रूर पेमेंट करना पड़ सकता है. वैसे भी यह कानून राज्यसभा में पास होना है. फिर राष्ट्रपति को मंज़ूरी देनी है. इसके बाद रिज़र्व बैंक और अन्य संस्थाओं को तय करना होगा कि कितना चार्ज लगेगा? और कैसे लगेगा?
My cook plays the Gayatri Mantra every day when he enters my kitchen, and I listen to it every day and like it.
But my question is: Why was the Gayatri Mantra played at an IIT convocation? It wasn’t a religious event. Our educational spaces should be free from religious slogans and chants of all religions
अरे भाई यह तो सब जानते हैं कि मिथिला अभी कोई राज्य नहीं है।अभी तो अलग मिथिला राज्य की मांग ही चल रही है।दूसरी बात तिरहुत मिथिला का ही प्राचीन ऐतिहासिक नाम है, जबकि तिरहुता मिथिला की पारंपरिक लिपि है। इसलिए तिरहुत और मिथिला को दो अलग-अलग क्षेत्र बताना गलत है।
Students protesting in Jharkhand give hope for a better India. ❤️ 🇮🇳
It also shows that real students are far better than the “students” we were shown during the CJP protests.
In fact, the CJP protests now look like an attempt to defame India’s Gen Z, many of whom later claimed they were provoked into using abusive language and slurs.
The Opposition and CJP aren’t supporting the Jharkhand students because there is no hidden political agenda.
Proud of the Jharkhand protesters. 🙌🏻