ये है इंडियन रेलवे का IRCTC App जहां तत्काल का टाइम जैसे ही शुरू होता है हाई लोड दिखाकर रोक दिया जाता है,
जब टिकट बुक अरना ही नहीं है तो फिर यात्रियों को परेशान क्यों किया जा रहा है
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“स्वर्ग के सम्राट को जाकर ख़बर कर दो,
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भगवान शिव की गले में लिपटे नाग के दस रहस्य...
1. भगवान शिव की ग्रीवा में लिपटे नाग का नाम वासुकि है।
2. वासुकी नाग के पिता ऋषि कश्यप और माता कद्रू थीं।
3. वासुकी नाग के बड़े भाई का नाभ शेष (अनंत) और अन्य भाइयों का नाम तक्षक, पिंगला और कर्कोटक आदि था।
4. शेष नाग विष्णु के सेवक तो वासुकी शिव के सेवक बनें। वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे। वासुकी की भक्ति से प्रसन्न होकर ही भगवान शिव ने उन्हें अपने गणों में सम्मिलित कर लिया था।
5. मान्यता है कि वासुकी का कैलाश पर्वत के पास ही राज्य था। यह भी कहा जाता है कि वासुकी को नागलोक का राजा माना गया है।
6. भगवान शिव के साथ ही वासुकी नाग की पूजा होती है। इसीलिए नागपंचमी पर शेषनाग के बाद वासुकी नाग की पूजा करना भी आवश्यक है।
7. समुद्र मंथन के समय वासुकी नाग को ही रस्सी के रूप में मेरू पर्वत के चारों और लपेटकर मंथन किया गया था, जिसके कारण उनका संपूर्ण शरीर लहूलुहान हो गया था।
8. माना जाता है कि वासुकी के कारण ही नाग जाति के लोगों ने ही सर्वप्रथम शिवलिंग की पूजा का प्रचलन शुरू किया था।
9. वासुकी ने ही कुंती पुत्र भीम को दस हजार हाथियों के बल प्राप्ति का वरदान दिया था। जब भीम को दुर्योधन ने धोखे से विष पिलाकर गंगा नदी में फेंक दिया था तब भीम नागलोक पहुंच गए थे। वहां पर भीम के नानाजी ने वासुकी को बताया कि यह कौन है तब वासुनिक नाग ने भीम का विष उतारा और उसे दस हाजार हथियों का बल प्रदान किया।
10. वासुकी के सिर पर ही नागमणि होती थी। जब भगवान श्री कृष्ण को कंस की जेल से चुपचाप वसुदेव उन्हें गोकुल ले जा रहे थे तब रास्ते में जोरदार बारिश हो रही थी। इसी बारिश और यमुना के उफान से वासुकी नाग ने ही श्री कृष्ण की रक्षा की थी। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि शेषनाग ने ऐसा किया था..
जय शिव शम्भू, हर हर महादेव, जय महाकाल, जय गोविंदा ✨🙏🕉️🔱
मुझे किसी से जल्दी लगाव नहीं होता परन्तु हो जाने के बाद मैं एक कमजोर व्यक्ति बन जाता हूँ। इमोशनली कमजोर हूँ और अलगाव की पीड़ा मुझसे बर्दास्त नहीं होती। किसी से रोज़ बात करने की आदत; ये महज आदत नहीं जिंदगी की एक हिस्सा बन जाती है। किसी का अचानक जाना मुझे जिंदा दफन कर देता है..!!!
उत्तर भारत में शादियों में फ़िज़ूल खर्ची धीरे धीरे चरम पर पहुँच रही है…पहले मंडप में शादी, वरमाला सब हो जाता..फिर अलग से स्टेज का खर्च बढ़ा..अब हल्दी और मेहंदी में भी स्टेज…खर्च बढ़ गया है…इसमें कमी ले आने की बहुत ज़रूरत है..नहीं तो बेटी के पिता का बोझ बढ़ता जाएगा
मेरे घर की छत के ऊपर एक छोटी छत है, वहाँ का रास्ता एक कच्ची सीढ़ी से हो कर जाता है, जिसे बचपन में हम चढ़ तो आसानी से जाते थे, पर उतरने में डर लगता था. यह इश्क़ भी शायद वैसा ही है.