मुस्कान
चकले पर रोटी बेलती
स्त्री की चूड़ियों की खनक
होती है सारे वाद्ययंत्रों से मधुर
तवे पर फूलती रोटियाँ
लाती हैं मुस्कान
बच्चों के चेहरे पर
जो दुनिया भर के खिलौने भी
नहीं ला पाते..
-आरती कुमारी
@dr_artikumari
इस दौर की कहानी सुनाती हैं बेटियाँ
इतिहास इक नया जो बनाती हैं बेटियाँ
हम कब किसी से कम हैं न लाचार बेजुबां
जब भी पड़ा है वक़्त बताती हैं बेटियाँ
@dr_artikumari
तू आतंक!
तू मनुष्यता के तन-मन पर विषमय डंक
तू मनुष्यता के ज्योतिर्मय पथ का पंक
तू मनुष्यता के शशिमुख का कलुष कलंक
तू मनुष्यता के विरुद्ध अपकर्म अशंक
तू अनक्ष, तू अनय अनंकुश, तू आतंक!
तुझ पर कैसी कविता! तुझ पर थू आतंक!
-राकेश रंजन
कैलीग्राफ़ी-आस्था
#PahalgamTerroristAttack
जानती हैं कैसे हल निकलेंगे इन बाधाओं के
धैर्य के जादू से फूँकें प्रेम मंतर लड़कियाँ
("बिहार की महिला गजलकार")
*
जो तू ज़िन्दगी मे न मिल सका मुझे इसका कोई गिला नहीं है
गिला नसीब में फिर कभी भी वफ़ा का फूल खिला नहीं
("2020 की नुमाइंदा राज़लें")
#आरती_कुमारी
सुपरिचित द्विभाषी कवि
आज
कई दिनों बाद
स्मृति के जादूगर ने
पलट डाले
जिंदगी की किताब के
कई पृष्ठ
वक्त की स्याही से लिखे
उन पन्नों पर दिखे
अठखेलियाँ करते शब्द
अनुशासित भाव
कुछ स्पंदित क्षण
सूखे गुलाब के निशान
और
आँखों की नमी से धुले
तुम्हारे ख़त!
~आरती
@dr_artikumari#विश्व_कविता_दिवस
(पेंटिंग-आस्था)
सुबहो आती है, रात जाती है यूँ ही
वक़्त चलता ही रहता है रुकता नहीं
एक पल में ये आगे निकल जाता है
आदमी ठीक से देख पाता नहीं
और परदे पे मंज़र बदल जाता है
एक बार चले जाते हैं जो
दिन-रात, सुबहो-शाम
वो फिर नहीं आते…
-आनंद बख्शी
पोस्टर - @aasthadeepali