उन्होंने हलफनामे में दिखाया था- ये जवाब पर्याप्त नहीं है।
सवाल संपत्ति छिपाने का है ही नहीं, बल्कि उस संपत्ति के बढ़ने में सरकारी पद और निर्णयों की भूमिका रही है- इसका है।
जमीन खरीदना अपराध नहीं है।
लेकिन सत्ता में रहते हुए ऐसे क्षेत्रों में जमीन खरीदना, जहाँ सरकारी नीतियाँ और परियोजनाएँ भविष्य में मूल्य बढ़ाने वाली हों, यह भ्रष्टाचार है।
भ्रष्टाचार हमेशा रिश्वत लेकर फाइल पास करने से ही नहीं होता।भ्रष्टाचार तब भी है जब सत्ता, जानकारी और प्रभाव कुछ लोगों को ऐसा लाभ दिला दें |
Indian Express की रिपोर्ट का Main point ये नहीं है कि "जमीन खरीदी गई" - जिन इलाकों में सरकार ने बाद में Infrastructure, सड़क��ं आदि विकसित कीं, उन्हीं क्षेत्रों में मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई। ये Conflict of Interest है।
यदि कोई मुख्यमंत्री, मंत्री, IAS, IPS या किसी प्राधिकरण का अध्यक्ष हो और उसके परिवार द्वारा उन्हीं क्षेत्रों में जमीन खरीदी जाए जहाँ ��ाद में सरकारी फैसलों से जमीनों का मूल्य कई गुना बढ़ने वाला हो, तो क्या ये जनता और देश, दोनों के साथ विश्वासघात नहीं है?
भारत इसलिए पीछे है क्योंकि यहाँ भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, सत्ता और व्यवस्था की मिलीभगत के खिलाफ लड़ने वाले बहुत कम हैं।
हम कब ऐसा भारत बना पाएँगे जहाँ मेहनत, ईमानदारी और योग्यता का मूल्य सत्ता, संपर्क और प्रभाव से अधिक हो?
गलत को गलत कहने की कीमत चाहे जो हो, चुप मत रहिए।
जब सब��ी आवाज़ उठेगी तो वह दूर तलक जाएगी और फिर व्यवस्था से लेकर सत्ता तक, सबको कठघरे में खड़ा होना पड़ेगा।
मोहन यादव के भाई हैं निलेश.एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज थे.पिछले साल इस्तीफा दिया.एडिशनल एडवोकेट जनरल बना दिए गए.कहते हैं एमपी का क़ानून मंत्रालय वही चलाते हैं.ये महज़ संयोग नहीं है कि इस विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी का पद महीनों से खाली है.रिपोर्ट के मुताबिक 108 एकड़ जमीन उनके नाम है
तुम लोग यहां स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में व्यस्त हो,
वहां मोहन यादव जी ने अपने रिश्तेदारों के नाम मध्यप्रदेश की आधी जमीन लिखवा दी।
>पत्नी के नाम - 11 एकड़
>बेटे के नाम - 17 एकड़
>बहु के नाम - 10 एकड़
>चचेरा भाई - 108 एकड़
खैर छोड़ो मैं तो जा रहा हूं रिक्शावाले कि खाल उतारने।
Ketan Agarwal's mother is a woman too.
Imagine how she feels after losing her son.
She said that Siya Goyal's family hid her drinking and partying nature.
No feminist will support her even though she's a woman.
Why do feminists never support women victims?
नाम : मीसा भारती
पद : बस बन गयीं सांसद
योग्यता : पापा की परी
काम :कुछ नहीं करना
असली काम : केवल सांसद की सैलरी की रबड़ी खाना
इनके MPLADS को 6 महीने पहले EXPOSE किया लेकिन 2.5 साल बाद भी मैडम ने कुछ नहीं किया।
भाई बहन ,भाभी ,भतीजा भतीजी ,ममिया ससुर फूफिया चाचा, बहनो��� ,साढ़ू सबके नाम ज़मीन ख़रीदेगा तेरा मोहन🤡
मुख्यमंत्री हो तो ऐसा हो वरना ज़िंदा तो….खैर हटाओ!!
ब्रो का नाम > वरुण चौधरी
ब्रो अपना > IAS है
ब्रो की पोस्टिंग > नगर आयुक्त हरिद्वार
ब्रो का कांड > 54 करोड़ की ज़मीन का सौदा 14 करोड़ में
ब्रो का मामला > हाईलाइट हो गया
ब्रो की हो गई > खटिया खड़ी
ब्रो की होगी अब >बर्खास्तगी
Visited a Skilling Centre in Pahadpur village. It is noteworthy how Rashtrapati Ji has focused on this sector and added momentum to her village’s development journey.
It is heartening to see our youth being equipped with skills that open new avenues of opportunity and self-reliance.
@rashtrapatibhvn