Karhal Chairman (2002-2007) Chairman(2023)
मज़दूर,किसान, छात्रों,व्यापारियों के हालात बदलने चाहिए।
भारत को भ्रष्ट,शोषक और सांप्रदायिक समाज बनने से रोकना है।
जो देश को अपनेपन के अनूठे तरीके दे गये न जात न पात न धर्म किसी को भी जनहित के बीच न आने दिया ऐसे श्रद्धेय नेताजी को बारम्बार सलाम
नेताजी हमारे अभिवावक हैं और रहेंगे उनके बताये रास्ते से ही जनकल्याण सम्भव है
#Netaji
विश्व विख्यात श्री सोनम वांगचुक जी से फोन पर बात करके उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना और उनसे अनशन तोड़ने की अपील की। उनके सत्याग्रह को हमारा खुला समर्थन है।
हमारा मानना है कि वो जनहित में इस आग्रह पर विचार करें। देश की संपूर्ण युवा शक्ति, उनके अभिभावकों, परिवार और परिजनों की आकांक्षा भी यही है क्योंकि उनके नैतिक बल की देश को बहुत आवश्यकता है अतः वो पूरी दुनिया से आ रहे निवेदनों को स्वीकार करते हुए अपना अनशन तोड़े दें, फिर कुछ दिनों का स्वास्थ्य लाभ लें और नई ऊर्जा का संचय करके पुनः नये आंदोलन में जुट जाएं। उनसे सविनय आग्रह है कि वो ‘नकारात्मक, भ्रष्ट, बेईमान, लोकतंत्र विरोधी सांप्रदायिक भाजपा’ के विरुध्द हो रहे आंदोलनों को पूरे देश में विस्तारित कर जन-एकजुटता की अखंड कड़ी बनें।
नीट की परीक्षा के घोटाले के बाद मंदिर में चोरी के महापाप का भंडाफोड़ भी एक गहरा दिव्य-संकेत है। डॉक्टर को धरती पर भगवान के रूप में ही देखा जाता है। हम सब तो मंदिर और मेडिकल दोनों के गहरे संबंध में विश्वास करते हैं। धर्म के मनोबल का और चिकित्सा का मनोवैज्ञानिक संबंध भी होता है।
जिस तरह संपूर्ण विश्व का मीडिया श्री सोनम वांगचुक जी के लिए चिंतित दिखाई दे रहा है, उसका एक दूसरा पक्ष ये भी है कि इससे भाजपा राज में दुनिया भर में हमारे देश की डेमोक्रेटिक इमेज बुरी तरह खंडित हो रही है।
हम श्री सोनम वांगचुक जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं।
@Wangchuk66
‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी खुलने के बाद भाजपा बदहवास हो गई है। वो जनता का ध्यान भटकाने के लिए बचकानी हरकतें कर रही है। इससे जनता में भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों के ख़िलाफ़ गुस्सा और बढ़ता जा रहा है। भाजपाइयों की नकारात्मक सोच का छोटापन दिन-पर-दिन बढ़ता जा रहा है। एक दल के रूप में भाजपा में अब कोई आत्मा नहीं बची है। शरीर पर ‘धर्म-धन चोरी’ के अनगिनत असाध्य ज़ख़्म उभर आए हैं। भाजपा राजनीतिक रूप से विक्षिप्तावस्था में चली गई है। सब अपने को बचाने में लगे हैं।
भाजपा ख़त्म!
#CC_to_CC
श्री सोनम वांगचुक जी से हमारा अति विनम्र आग्रह और सविनय अपील है कि वो अपना अनशन तोड़ दें। उनका जीवन समस्त विश्व के लिए अनमोल है क्योंकि उसमें मानवता और पर्यावरण के लिए उतनी ही प्रतिबद्धता है जितनी की लोकतंत्र के लिए।
जिस भाजपा सरकार को जगाने के लिए वो आमरण अनशन पर हैं वो तो एक सिद्धांतहीन, भ्रष्ट तंत्र है, उसकी असंवेदनशीलता और हृदयहीनता में किसी के भी त्याग का कोई महत्व नहीं है अत: भाजपाइयों से सदाचार और हृदय-परिवर्तन की कोई भी अपेक्षा निरर्थक है। भाजपाइयों के लिए किसी के जीवन का कोई भी मोल नहीं है। उनके लिए धन ही प्रधान है। वो भ्रष्टाचार से कमाए पैसों के घमंड में चूर हैं। उनमें बदलाव की आशा करना ही व्यर्थ है। जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता। ‘सत्याग्रह’ का महत्व वो क्या जानें जो ‘सत्ताग्रह’ के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं। उन्हें न युवाओं के भविष्य से कुछ लेना-देना है, न उनके माता-पिता और अन्य परिजनों के सपनों से, वो तो ख़ुदगर्ज़ लोग हैं।
लोकतंत्र का गला घोंटनेवाली महापापी-अधर्मी भाजपा और उसके भूमिगत अपंजीकृत संगी-साथियों के गिरोह को हराने और सदैव के लिए हटाने के लिए आपके मनोबल और नैतिकता की महाशक्ति हर सच्चे भारतीय की प्रेरणा बनती रहे और आप देशवासियों, युवाओं, लोकतंत्र और पर्यावरण के संघर्ष के लिए नकारात्मक ताक़तों के ख़िलाफ़ सदैव प्रकाश स्तंभ बने रहें, यही हम सबकी चाह है और प्रार्थना भी।
@Wangchuk66
‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ की क्रोनोलॉजी नहीं; भाजपाई ‘क्रिमिनोलॉजी’ का कुचक्र समझिए:
⁃अपने संगी-साथियों से माध्यम से पूरी दुनिया के आस्थावानों से गुपचुप संपर्क साधो
⁃उनकी आस्था का भावनात्मक दोहन करो और बड़ा-बड़ा चंदा दान बहुमूल्य रत्नों, धातुओं या नक़द उगाहो
⁃रसीद देने के नाम पर धातुओं की गुणवत्ता की जाँच कराने का बहाना बनाकर टाल दो
⁃देश के अंदर लोगों को बड़े-बड़े समूहों में प्रायोजित तरीक़े से मंदिर ले जाओ
⁃फिर वहाँ ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ के रूप में वसूली करो
⁃साथ ही विभिन्न धार्मिक अवसरों व तिथियों के नाम पर नक़ली रसीद छपवाकर-कटवाकर घपला करो
⁃फिर न्यास के नाम पर, अपने लोगों को सेट करके ‘भ्रष्टाचार का व्यास’ बढ़ाओ
⁃फिर अपने विश्वसनीय लोगों को बैठाकर साँठगाँठ करके गलत-गिनती करने का गोरखधंधा चलाओ
⁃फिर ‘धर्म-धन’ में सेंधमारी करो
⁃सीसीटीवी व अन्य सबूत गायब कर दो
⁃अपने लोगों को स्थानीय ज़मीन सस्ते में खरीदवाओ और फिर न्यास के पैसों से वही ज़मीन बीसों गुने दाम में ख़रीद कर आपस में अधर्मी मुनाफ़ा बाँट लो
⁃फिर उस पैसे से अनरजिस्टर्ड कार्यालय बनाओ
⁃और फिर उन कार्यालयों के ज़रिए से अपना जाल और फैलाओ
⁃चोरी के धन का बहुमूल्य धातुओं के रूप में ‘ठोसीकरण’ करके बोरियों में भरकर दूसरे राज्यों में भेजकर नक़ली प्रचारकों व वोटरों का गिरोह बनाकर चुनावी-घोटाला करवाओ
⁃जब ये राज़ खुल जाए तो ‘दो नंबर के काम के लिए नंबर दो को आगे करके’ हाथ उठाकर, माइक-कैमरा हटाकर फुर्र हो जाओ
⁃उधर चुपके से ख़ुफ़िया साथियों को फ़ोन मिलाकर पता करो कि कहीं लूट के घपले में ही, बँटवारे का घपला तो नहीं हो रहा है, पूरा पहुँच भी रहा है या नहीं
⁃जब पकड़े जाओ तो 4-5 दिन में माल को वापस दिखाकर झूठी सफ़ाई दो और ये फैलाओ की धर्म के लिए दिये गये पैसों का हिसाब नहीं माँगना चाहिए
⁃या फिर अपने लोगों की औपचारिक जाँच उन लोगों से करवाओ, जो ख़ुद ही हेराफेरी - चार सौ बीसी की जाँच झेल रहे हों
⁃‘फुनगी को फाँसी, शाख को माफ़ी’ का फ़ार्मूला अपनाकर बड़ी मछलियों को बचाओ
⁃फिर मामला रफ़ा-दफ़ा करने के लिए झूठे समाचारों व आरोपों से ध्यान भटकाओ
⁃जब क़ानूनी कार्रवाई का डर हो तो बेशर्मों की तरह बेमन से माफ़ी माँगते हुए, डर से झूठमूठ थरथराओ
⁃और फिर मौक़ा पाते ही, निर्लज्ज होकर ‘धर्म, संस्कृति, देश, व्यक्ति और भावनाओं को ठगने के कुचक्र’ को बार-बार दोहराने की शताब्दी मनाओ!
लेकिन अब सच्चे देश प्रेमी भाजपा और उसके संगी-साथियों की इस क्रिमिनोलॉजी को देश के हर गाँव, पंचायत, गली, मोहल्ले, बस्ती, नगर के चौक-चौराहों पर पढ़कर सुनाएंगे, भाजपाई गिरोह का भंडाफोड़ करेंगे और उनका सामाजिक-राजनीतिक बहिष्कार भी।
#CC_to_CC
लो अब वृक्षारोपण का ही एनकाउंटर कर दिया!
शुक्र तो ये मनाइये कि 1 पेड़ तो लगा, भले वो मंच पर लगा दिया है बाक़ी 34,99,99,999 तो काग़ज़ी फ़ाइल में लगेंगे।
ये वृक्षारोपण नहीं, भ्रष्टारोपण है जिसके बहाने चुनावी-फ़ंड की समानांतर व्यवस्था की जा रही है। इसके पीछे भी डबल इंजन की टकराहट ही मुख्य कारण है।
‘भाषण न सुनने के मूड’ वाले सार्वजनिक बयान के बाद जो 1-2% छवि बची भी थी, उस पर भी ऐसे दिखावटी कृत्यों से इन्होंने ख़ुद ही बुलडोज़र चला दिया है।
‘एथनॉल’ मुनाफ़ाख़ोरी का नया नाम है। ये ‘सरकारी मिलावट’ का एक ऐसा त्रि-मिश्रण है जिसमें सरकार, एथनॉल बनानेवालों और तेल कंपनियों की साझेदारी है।
एथनॉल के समर्थन में तर्क ये दिया जाता है कि इससे प्रदूषण कम होगा, आयात बिल घटेगा क्योंकि कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी लेकिन सरकार ये नहीं बता रही है कि इससे गाड़ियों की माइलेज गिरती है और गाड़ियाँ जल्दी ख़राब हो रही हैं, स्टार्टिंग की समस्या बढ़ गई है, कुल मिलाकर कम एवरेज की वजह से तेल ज़्यादा डलवाना पड़ रहा है, गाड़ियाँ बीच सड़क में धोखा दे रही हैं, जिससे मेंटेनेंस कॉस्ट बढ़ गई है, गाड़ी की रीसेल वैल्यू घट गयी है और ओवर ऑल लाइफ़ भी।
एथनॉल की वजह से ज़ंग और जंक दोनों की समस्या बढ़ रही है। पुरानी गाड़ियाँ एथनॉल के हिसाब से नहीं बनी हैं, इसीलिए बीमा कंपनियों के अपने एतराज़ हैं और कार-बाइक ख़राब होने पर उन्हें क्लेम न देने का एक और बहाना मिल जाता है।
आज के महंगाई के समय में जब माँ-बाप युवाओं को किसी तरह से लाखों रुपये में एक बाइक दिलाते हैं या युवा कार लोन लेकर अपनी गाड़ी का सपना पूरा करते हैं तो उनकी चिंता महंगा तेल भी होता है और एथनॉल की वजह से गाड़ी ख़राब होने और फिर ठीक कराने का लगातार बढ़ता ख़र्चा भी। सच तो ये है कि जब खानेपीने वाली चीजों से फ्यूल बनेगा तो खाद्य महंगाई बढ़ेगी साथ ही इसका नुक़सान पर्यावरण को भी होगा क्योंकि एथनॉल के लिए पानी की भी बहुत खपत होती है।
सरकार बताए कि चंद मुनाफ़ाख़ोरों के लिए वो जनता का शोषण क्यों कर रही है।
#E20 #Ethanol #Bike #PetrolPrice #Mileage #Insurance
एक्सप्रेसवे इसलिए बनते हैं कि लोग तेज़ी से बेफ़िक्र होकर चलें, इसलिए नहीं कि लोग रस्ते भर ऊपरवाले का नाम जपें।
भाजपा सरकार में इधर 4700 करोड़ से बना लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन से पहले धँसा, उधर भाजपा की ही सरकार में महाराष्ट्र में 6700 करोड़ में बना ‘मिसिंग लिंक’ का हाल-बेहाल हुआ जिससे वो भाजपा सरकार और भ्रष्टाचारियों के ‘कनेक्टिंग लिंक’ के रूप में पूरे विश्व में बदनाम हो गया। भाजपा शासित राज्यों में ‘महा-भ्रष्टाचार की प्रतियोगिता’ चल रही है क्या? ये दोनों लखनऊवालों ने डिज़ाइन किए हैं क्या?
जितना समय दो शहरों के बीच लगेगा उससे ज़्यादा तो एक्सप्रेसवे से शहर में प्रवेश करने में लगेगा। जनता पूछ रही है कि ये जनता की सुविधा के लिए डिज़ाइन किया गया है या भाजपाई ठेकेदारों को मुनाफ़ा कमवाने के लिए?
अगर भ्रष्टाचार की वजह से यही हाल रहा तो 40 मिनट के सफ़र पर निकलने से पहले यात्री 40 बार सोचेगा। गति यदि सुरक्षित नहीं है तो उसका कोई अर्थ नहीं है।
बहुत बुरी लग गई, जब बात ख़ुद पर आई
पर जब औरों पर कही, तो न हुई कार्रवाई
काश उनके साथ भी ऐसा ही होता जो विपक्ष पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं और सरासर झूठे आरोप लगाते हैं।
पक्षपात अन्याय का ही एक रूप है।
जब वो ख़ुद ही बेलगाम है जिसके हाथ में लगाम है
तो फिर उनका क्या, जो उनके दरबार में दरबान है!
‘मेरठ की बेटी’ के साथ हुए महा-अत्याचार व हत्या के बाद जिस तरह नामज़द आरोपियों पर कमज़ोर धाराओं में मुक़दमा दर्ज़ किया गया है और आंदोलनकारियों पर गंभीर धाराओं में मुक़दमा लगाया गया है, वो नाइंसाफ़ी की पराकाष्ठा है। इससे भी अधिक गंभीर बात ये है कि जिस पुलिस से न्याय की उम्मीद होती है, उनके ही उच्चाधिकारी अन्याय और अपने अहंकार के अनवरत झापड़ आम जनता के गाल पर मार रहे हैं, पूरी दुनिया में फैल चुका जिसका वीडियो उत्तर प्रदेश की पुलिस की छवि को खंडित कर रहा है। इससे वो पुलिसकर्मी भी शर्मिंदा हैं जो अपनी कर्तव्यपरायणता और आम जनता के प्रति संवेदनशील हैं और सदैव मानवीय दृष्टिकोण से अपना काम करते हैं।
पीडीए अब सहेगा नहीं, कहेगा!
सच तो ये है कि जिस राज्य का मुख्य ही महिलाओं के साथ, विशेष रूप से एक युवा मृतक की शोक-संतप्त माँ से सरेआम अभद्रता का वाचन करे, उसकी पुलिस से कोई भी उम्मीद करना बेमानी है। मस्तिष्क का आदेश ही, उँगलियाँ मानती हैं।
अब जनता भाजपाइयों का भाषण सुनने के मूड में नहीं है।
#CC_to_CC
कृपया अपने बयान की विश्वसनीयता सिद्ध करने के लिए, आप अपने द्वारा खाली कराई गई ‘तथाकथित 64000 एकड़’ ज़मीन के क्षेत्रफल और भू-लेखा विवरण की ज़िलेवार सूची भी ज़ारी करें।
अयोध्या के मंदिर में हुई चोरी के बाद, आपने झूठ-मूठ की SIT बनाकर और उससे मनमानी रिपोर्ट लिखवाकर जो लीपा-पोती की है उससे आपके कथन-वचन से समाज का विश्वास पूरी तरह उठ गया है। आपके द्वारा बताए गये, कुंभ मेले के मृतकों के आँकड़े जिस प्रकार झूठे साबित हुए थे, वो आज भी जनता के मानस में अंकित हैं।
जन-प्रश्न : जब बोले गये और लिखे गये आँकड़े में ही अंतर होगा, तो जनता भरोसा किस पर करे?
आगरा के फतेहपुर सीकरी स्थित विश्व प्रसिद्ध शेख सलीम चिश्ती दरगाह के सज्जादानशीं जनाब अयाज़ुद्दीन फरीदी चिश्ती उर्फ़ रईस मियां साहब का इंतकाल, अत्यंत दुखद!
दिवंगत आत्मा को शांति दें भगवान।
शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो।
भावभीनी श्रद्धांजलि!
विश्वभर के आहत हुए सनातनियों एवं सच्चे मीडिया के संज्ञानार्थ :
- ये कैसी पाबंदी है कि आरोपियों का स्वागत पुलिस दरवाज़ा खोलके कर रही है।
- ड्राइवर फँसता तो मालिक भी फँसता।
- जिसका नाम अंतरिम रिपोर्ट में नहीं है, उसका अंतिम में कैसे होगा।
- जिसके ऊपर फोड़ा ‘ठीकरा’, वो तो रिपोर्ट के हिसाब से काफ़ी ‘ठीक रहा’
- अगर CDR निकाली जाए तो पता चलेगा सबसे ज़्यादा फोन भाजपा के लोगों के ही आए हैं जो भाजपा छोड़कर इधर आना चाहते हैं।
- जनता ने भाजपाइयों की नाकाबंदी कर दी है।
- जो लोग दूर से बैठकर आरोप लगा रहे हैं, लगता है उनकी भी इस महाकांड में हिस्सेदारी है। उनकी आमदनी की नहर बंद हो गई है, इसीलिए छटपटा रहे हैं
- सिर्फ़ खाँचा नहीं, पूरा ढांचा बदलना चाहिए।
- पूरा ट्रस्ट भंग होना चाहिए।
- सज़ा सिर्फ़ घोड़े या लगाम को नहीं, कोचवान को भी मिलनी चाहिए।
- जिम्मेदारी सिर्फ़ उसकी नहीं जिसको दी गई, बल्कि जिसने जिम्मेदारी दी उसकी भी तय होनी चाहिए।
- केवल इस्तीफ़े की लीपा-पोती से काम नहीं चलेगा। जो लोग हटे हैं, उनके हस्ताक्षर से हुए सभी भू-सौदों और अन्य कार्यों के लिए न्यायिक जांच बैठाई जाए।
- इस्तीफ़ा बच निकलने का रास्ता नहीं बनना चाहिए।
- दोषियों की भविष्य की गतिविधियों और आवागमन पर निगाह रखी जाए।
- इनके विदेश गमन पर पाबंदी लगाई जाए।
- यह 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास का विषय है।
- आपस में 'निष्कलंक' होने की क्लीन चिट देने का खेल बंद हो।
- भ्रष्ट लोगों का काला सच सामने आ चुका है।
- भाजपा में भगदड़ मच गई है।
जो भाजपा का साथी, वो रामघाती।
शेष अगले अंक में…
बदायूं के सहसवान से कई बार के विधायक, पूर्व मंत्री श्री ओमकार सिंह यादव जी का निधन, अत्यंत दुःखद !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे, शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं।
भावभीनी श्रद्धांजलि !