@UPPCLLKO
सर, मेरा कनेक्शन डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) का है। पूरा बिल जमा करने के बाद भी स्मार्ट मीटर से घर की सप्लाई चालू नहीं हुई है। मीटर पर डिस्प्ले आ रहा है। कृपया तुरंत संज्ञान लें।Account ID: [8976766463]मोबाइल नंबर: [8800704002]
🚨MUST RETWEET DON’T IGNORE ❎
हम All - India Campaign शुरू करने जा रहे हैं पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर, नफ़रत फैलाने वाले इस 2 टके नफ़रति नारंगी कीड़े के खिलाफ़ कार्रवाई के लिए।
अगर आप नफरत के खिलाफ़ और इंसाफ़ के साथ खड़े हैं, तो Retweet कीजिए।
बहुत जल्द आपको इसकी पूरी डिटेल साझा की जाएगी।
#the_dark_masked
Mumbai, Maharashtra | #StandAgainstHate
Amid a rising wave of controversial statements against Muslims by BJP leaders, the AIMIM Mumbai unit, led by Haji Farooq Shabdi, held a strong protest today in the city.
🚨 Urgent Appeal 👋
फेसबुक पर के.के. दीक्षित नामक व्यक्ति द्वारा खुलेआम मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है और ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर अपमानजनक भाषा (Hate Speech) का प्रयोग किया जा रहा है। यह BNS की धारा 196 और 299 (धार्मिक भावनाएं भड़काना) का उल्लंघन है। हम @shahjahanpurpol और @Uppolice से तुरंत FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग करते
जज साहब मन भारी क्यों कर रहे हैं? जज साहब को तो यह चिंता होनी चाहिए थी! कि कैसे निर्दोष नागरिकों की ज़िंदगी जेल की काल कोठरी में बंद करके बर्बाद कर दी गई। मोहम्मद इलियास 29 साल जेल में रहे हैं। 29 साल! और इतने लंबे समय में उन पर जुर्म साबित नहीं हो सका तो जज साहब ने उन्हें भारी मन से बरी कर दिया। मन भारी करने की क्या ज़रूरत थी जज साहब! अगर सज़ा भी सुना देते तब भी कौन रोक लेता?
क्या आपको नहीं लगता कि जिस ब्लास्ट में इलियास को गिरफ्तार किया गया उसमें एक नहीं कई गुनाह हुए। पहला अपराध ब्लास्ट में 18 लोगों की जान गई। दूसरा अपराध ब्लास्ट के आरोप में कई बेगुनाहों ने सज़ा काटी जिसमें कुछ 2013 में बरी हुए और इलियास 2025 में बरी हुए। अब सवाल यह कि ब्लास्ट किसने किया? असली गुनहगार कौन हैं? बेगुनाहों को फंसाने वाले अफसरों पर कार्रावाई क्यों नहीं? बेगुनाह को 29 सालों का मुआवज़ा क्यों नहीं?
क्या यह सच नहीं है किसी भी बम ब्लास्ट के बाद पहला शक मुसलमान पर जाता है? क्या यह सच नहीं है कि ऐसे सैंकड़ों मुसलमान हैं जिन्हें खूंखार आतंकी बताकर जेल में बंद किया और वो दशकों बाद बरी हुए? क्या यह अधिकारियों की पूर्वाग्रह से ग्रस्त सोच के कारण नहीं हुआ? इलियास जैसों के लिए सेंटेंस रिव्यू कमेटी भी नहीं है। जिस देश में उम्र कैद की सज़ा की अवधि 14 साल हो और 14 साल जेल में काटने के बाद केस को सेंटेंस रिव्यू कमेटी के पास भेज दिया जाता हो, कैदी के बर्ताव को देखते हुए कमेटी उसकी सजा को कम करने का अधिकार हो, उस देश में ऐसे कितने ही ‘इलियास’ हैं जो बेगुनाह होते हुए भी इस अवधि से दोगुने समय तक जेल में रहे हैं। क्या इस पर किसी का मन भारी नहीं हुआ? बेगुनाह साबित होने तक गुनहगार मानने की धारणा ने कितने ही लोगों की ज़िंदगी तबाह की हैं। मालूम नहीं इस पर किसका मन भारी हुआ!
इलियास खुश होंगे कि उनके माथे पर लगा आतंकवाद का कलंक मिट गया। वो खुश होंगे कि उन्हें ‘न्याय’ मिल गया। न्यायपालिका खुश होगी कि उसने ‘दूसरे’ समुदाय के युवक के साथ भी न्याय किया है। अधिकारी खुश हैं कि जिसे आतंकी बताया था वो 29 साल तक जेल में रहा। नागरिक खुश हैं कि देश में न्याय ज़िंदा है। न्यायपालिका न्याय देरी ही सही लेकिन निष्पक्ष न्याय कर रही है। लेकिन कोई यह चिंता नहीं कर रहा कि न्याय में देरी न्याय नहीं है। इलियास की तरह कौन सवाल करेगा कि उसके जेल में बिताए तीन दशकों का बदल क्या है?
लोकेशन : संजौली,शिमला, हिमाचल प्रदेश
दिनांक : 14 नवंबर
नमाज नहीं होगी यहां ....मुल्ले मौलवी नहीं चलेंगे ।
जुम्मे की नमाज पढ़ने गए मुस्लिमों को स्थानीय महिलाओं और देवभूमि संघर्ष समिति ने नमाज पढ़ने जाने से रोका और मस्जिद को अवैध बताया। वहीं पुलिस ने जुमे की नमाज पढ़ने से रोकने पर केस दर्ज किया है।
हमारे देश के नेता मंत्री विपक्ष एक नंबर के घटिया नीच बेशर्म लोग है ये देश को संभालने के लायक ही नहीं है , इन्हें तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए
@pushkardhami
यह गलत फहमी हटानी आवश्यक है पहले दिन भारत में इस्लाम आया, तबसे आजतक यहां हैं
भारत में इस्लाम नहीं रहेगा खत्म हो जाएगा ऐसा सोचने वाला हिंदू सोच का नहीं है,
भागवत ने तो भक्तों की बोलती बंद कर दिया है यह बयान देकर इस्लाम के बारे में,
भक्तों को उन्हीं के लोग ही बजा देते हैं 😂🔥😂
जेल लौटते वक़्त शिफ़ा उर रहमान के द्वारा कहे गए ये अल्फाज़ अगर ओखला कि अवाम ने नहीं सुनी तो आगे मुसलमानों के लिए आवाज़ उठाने कोई और शायद ही आगे आएगा…
#okhla
"जब मेरा बेटा जेल जाता है, तो मेरा दम घुटने लगता है। मैं आधी रात तक जागकर रोती रहती हूँ और परेशानियों में समय गुजारती हूँ। ऐसा लगता है जैसे मेरा बेटा है भी या नहीं।"
- शिफ़ा उर रहमान कि माँ