Indian authorities have demolished a mosque in Saharanpur, Uttar Pradesh, following a court ruling. The case was filed by a member of a Hindu nationalist group.
Mosque authorities say the building dates back to 1911. Rights groups are questioning the legality of the decision.
यह बेहद शर्मनाक और पत्रकारिता की आज़ादी पर हमला है। इस पूरे मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच हो और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
क्या इस देश में अब एक मुसलमान को पत्रकारिता करने की भी इजाज़त नहीं है? क्या एक मुस्लिम महिला पत्रकार रिपोर्टिंग नहीं कर सकती, मुख्यमंत्री से सवाल नहीं पूछ सकती?
We stand with Shaheen Khan and @4pmnews_network
@BSDhingra1 Or Desh ko bhi Dubata h...
Quran Samajhne k liye sb se pehle to Arabi Grammar ka Janna Zaroori h us k Bina Aadmi Aese hi Bakwas karta h Jese ye kar rahi h...
Grammar ko Na Janne wale ka Quran ka Samajhna koi Value nahi Rakhta...
@BSDhingra1 1 Dam Bakwas Kar rahi h, Me ne Bhi Quran Padha h Me ne bhi us ka Translation padha h , hame to Aesa kahin ni mila... Or Jin Aayat ki ye baat kar rahi un ko Aage piche se Kaat kar bata rahi h,,, Aadha Adhura giyan bhut Ghatak hota h Banda khud Dubta h Dusre ko Dubata h...
"मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि मुसलमानों को आतंकवादी कहने और नफ़रत फैलाने वाले फ़िरक़ावाराना (सांप्रदायिक) लोग ही असल आतंकवादी हैं। आज़ादी के 80वें जश्न के मौक़े पर दारुल उलूम देवबंद के इस प्रोग्राम में मैं यह साफ़ कर देना चाहता हूँ कि ये फ़िरक़ावाराना ताक़तें हमारे मुल्क के सेक्युलर किरदार को बदलना चाहती हैं, जिसे हम हरगिज़ कामयाब नहीं होने देंगे।"
#MaulanaArshadMadani
#DarulUloomDeoband
#StandAgainstHate
#IndianMuslims
#SecularIndia
#CounterSecularism
ईद मुबारक! मेरी हार्दिक दुआ है कि यह ईद आपके और आपके परिवार के लिए ढेर सारी खुशियां, सुकून और तरक्की लेकर आए। खुदा आपकी इबादतों और नेक कामों को कुबूल फरमाए। आपकी हर जायज़ मुराद पूरी हो और आप हमेशा सलामत रहें। खुदा से प्रार्थना है कि वे हमारे देश में अमन और भाईचारा बनाए रखें और हम सबको सुख, समृद्धि और उन्नति के रास्ते पर ले जाएं। आमीन।
#Eid2026
#EidMubarak
बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदानी ने कहा, 'यह बेहद शर्मनाक है. जब मुसलमान ऐसे कृत्य करते हैं, तो हम शर्म से सिर झुका लेते हैं, और इसकी जितनी निंदा की जाए कम है. सबसे पहले, किसी भी सभ्य समाज में किसी दूसरे इंसान की हत्या करने का अधिकार नहीं होना चाहिए. किसी ने चाहे कितना भी गलत काम किया हो, सजा देने की प्रक्रिया है, उसका पालन किया जाना चाहिए. इसके अलावा, अगर अपराधी मुसलमान हैं और पीड़ित गैर-मुस्लिम है, तो अपराध और भी जघन्य हो जाता है. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं. किसी की हत्या करना, या किसी को अपमानित करना भी इस्लाम में जायज नहीं है. इस्लाम किसी भी कीमत पर इसकी इजाज़त नहीं देता.
अभी मैंने जावेद अख्तर और मौलाना मुफ्ती शमाइल के बीच सौरभ द्विवेदी द्वारा मॉडरेट की गई डिबेट देखी। यह बहुत अच्छी तरह से की गई थी। मुफ्ती शमाइल ने ईश्वर के अस्तित्व को समझाने के लिए बिल्कुल सही और ज्ञानवर्धक तरीका अपनाया। उनका जवाब सही और तर्कसंगत था। बहुत बढ़िया- सायमा (आरजे आर्टिस्ट)
Does God Exist Debate में मुफ्ती शमाइल नदवी ने Science के तर्कों को क्यों नकारा?
Full Video- https://t.co/7HC9pQ6hsX
@saurabhtop@Javedakhtarjadu@muftishamail
[Does God Exist?, Javed Akhtar, Mufti Shamail Nadwi]
सौरभ द्विवेदी का नाम लेकर मुफ्ती शमाइल नदवी ने जावेद अख्तर को Does God Exist Debate में क्या कहा?
Full Video- https://t.co/zA836iY9fo
@saurabhtop@Javedakhtarjadu@muftishamail
[Does God Exist?, Javed Akhtar, Mufti Shamail Nadwi]
युवा आलिम-ए-दीन और हमारे सम्मानित भाई मुफ़्ती शमाइल नदवी को दिल की गहराइयों से मुबारकबाद।
ख़ुदा के वजूद के मौज़ू पर जावेद अख़्तर के साथ हुई बहस में उन्होंने न सिर्फ़ उम्मत-ए-मुस्लिमा बल्कि उन तमाम लोगों का सिर फ़ख़्र से ऊँचा कर दिया, जो ख़ुदा के वजूद पर ईमान रखते हैं।
आज मैं खुद वहाँ मौजूद था और मैंने देखा कि मुफ़्ती शमाइल नदवी पूरी तैयारी के साथ आए थे। वे पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ हर सवाल का बेहतरीन जवाब दे रहे थे। उन्होंने जावेद अख़्तर की हर बात का सीधा और ठोस जवाब दिया। यहाँ तक कि जावेद अख़्तर के लिए उनकी बातों का खंडन करना और जवाब देना कठिन हो गया।
दूसरी ओर जावेद अख़्तर मूल विषय से बचते हुए नज़र आए। वे बार-बार बहस की दिशा बदलने की कोशिश कर रहे थे और ख़ुदा के बारे में वही सामान्य आपत्तियाँ दोहरा रहे थे, जो आमतौर पर नास्तिक विचारधारा से जुड़ी होती हैं। लेकिन मुफ़्ती शमाइल नदवी ने इन सभी आपत्तियों का भी पूरे आत्मविश्वास और मज़बूत तर्कों के साथ जवाब दिया।
मैंने यह भी महसूस किया कि जावेद अख़्तर के समर्थन में आए कई लोग भी मुफ़्ती शमाइल नदवी के जवाबों से मुत्मइन दिखाई दिए और कई मौकों पर तालियाँ बजाकर अपनी सहमति व्यक्त की।
एक बार फिर मुफ़्ती शमाइल नदवी को मुबारकबाद। उम्मीद है कि वे इसी तरह उम्मत-ए-मुस्लिमा की प्रभावी प्रतिनिधि आवाज़ बने रहेंगे।
सौरभ द्विवेदी को भी बधाई, जिन्होंने ईमानदारी और संतुलन के साथ बहस की निष्पक्ष और सुंदर संचालन (नियंत्रण) की ज़िम्मेदारी निभाई और किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया।
शम्स तबरेज़ क़ासमी
एडिटर, मिल्लत टाइम्स
@muftishamail
#DoesGodExists
इस्लाम अमन, शांति, प्यार और मोहब्बत का धर्म है, और वही इसकी शिक्षा भी देता है। सांप्रदायिक ताक़तें इस्लाम से डरती हैं और इसकी उज्ज्वल शिक्षाओं से भयभीत होकर इसके ख़िलाफ़ तरह–तरह का प्रोपेगंडा करती हैं, और इस्लाम धर्म को बदनाम करके मिटाने का सपना देखती हैं। लेकिन इस्लाम वह सावॅभौमिक सत्य है जो क़यामत की सुबह तक ज़िंदा रहेगा, और दुनिया की कोई ताक़त इसे मिटा नहीं सकती। हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम इस्लाम की उच्च शिक्षाओं पर पूरे दिल व जान से अमल करें और जहाँ भी रहें, प्यार, मोहब्बत, सद्भावना और अच्छे आचरण के साथ ज़िंदगी बिताएँ।
#ArshadMadani
#Islam