BPSSC के अध्यक्ष या परीक्षा नियंत्रक ना तो कभी मीडिया के सामने आकर कोई स्पष्टीकरण देते हैं। बेहद संदिग्ध आयोग है ये। दिन-रात मेहनत करने वाले छात्रों के सपनों का सरेआम कत्ल हो रहा है और शासन चुप है। अविलंब परीक्षा रद्द हो।
#daroga
आज 1799 दारोगा अभ्यर्थियों के लंबे संघर्ष को एक महत्वपूर्ण पड़ाव मिला है। व्यापक अनियमितताओं और उठे गंभीर सवालों को देखते हुए मेंस परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया है। यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं था, बल्कि हजारों मेहनती छात्रों के भविष्य, उनकी उम्मीदों और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया में विश्वास का सवाल था।
लेकिन न्याय केवल परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जो भी लोग इस पूरे खेल में शामिल थे, चाहे सेटर हों, दलाल हों या किसी भी स्तर पर संलिप्त व्यक्ति, उन सभी पर कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को कानून के तहत ऐसी सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी मेहनत और सपनों का सौदा करने की हिम्मत न कर सके।
आज की यह जीत उन सभी छात्रों की आवाज, संघर्ष और धैर्य की जीत है, जिन्होंने लगातार निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग उठाई। अब अगला कदम यह होना चाहिए कि पूरी सच्चाई सामने आए, दोषियों की पहचान हो और आगे की परीक्षा प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित की जाए, ताकि हर मेहनती अभ्यर्थी का भरोसा फिर से कायम हो सके।
#JusticeForStudents #FairExam #BiharDaroga1799
कुछ फिजिकल अकैडमी और कुछ टीचर आज मेंस पास अभ्यर्थियों को भड़काकर गर्दनीबाग ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह है कि छात्रों की लड़ाई को असली मुद्दे से भटकाने से आखिर किसका फायदा होगा?
मैं बिहार दरोगा के सभी अभ्यर्थियों से अपील करता हूँ संयम रखें, किसी के बहकावे में न आएं और अपने बुद्धि-विवेक से फैसला लें। पास या फेल होना किसी शिक्षक, अकैडमी या आंदोलनकारी के हाथ में नहीं है। असली सवाल है कि परीक्षा प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी है।
इस भ्रष्ट व्यवस्था ने एक होनहार साथी की जान तक ले ली, लेकिन अफसोस कि इस गंभीर मुद्दे पर भी बात करने को बहुत कम लोग तैयार हैं। सिस्टम से परेशान हर अभ्यर्थी हमारा साथी है। किसी और साथी को ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। हमें एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ लड़ना है जो छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है।
10,500 से ज्यादा अभ्यर्थियों का रिजल्ट आया है, लेकिन अंतिम चयन सिर्फ 1,799 का होना है। किसका चयन होगा, यह किसी को नहीं पता। ऐसे में हर अभ्यर्थी के लिए परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
अगर धरना देना है तो आयोग की निष्पक्षता, पारदर्शिता और परीक्षा प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के खिलाफ दीजिए, न कि फेल या पास अभ्यर्थियों के खिलाफ।
मेंस पास अभ्यर्थी भी हमारे भाई हैं और अनियमितता की निष्पक्ष जांच की मांग करने वाले अभ्यर्थी भी। लड़ाई छात्र बनाम छात्र नहीं, बल्कि पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था के लिए होनी चाहिए।
किसी के बहकावे में आकर अपने ही साथी के खिलाफ खड़े होने से पहले सोचिए आज हम बंटे तो कल किसी भी परीक्षा में पारदर्शिता की मांग कमजोर पड़ जाएगी।
छात्र एकता बनाए रखें। संयम रखें। मुद्दे से न भटकें।
लड़ाई अपने भाई से नहीं, सिस्टम की खामियों के खिलाफ है।
🚨 बिहार दरोगा-हवलदार भर्ती परीक्षा में बड़ा धांधली कांड!
27 मई की दरोगा और 29 जुलाई की हवलदार भर्ती परीक्षा में एक ही अंतरजिला गैंग द्वारा सेंधमारी के आरोप सामने आए हैं।
एक तरफ मान रहे हैं कि परीक्षा में अनियमितता हुई है और इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए, दूसरी तरफ कहते हैं कि परीक्षा कैंसिल हुई तो आंदोलन करेंगे। कुछ दिन पहले जो लोग हमारे साथ खड़े थे, उनका अचानक जाँच और कैंसिलेशन के मुद्दे पर रुख बदलना कई सवाल खड़े करता है।
मेहनती छात्रों ने मेंस पास किया है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन आप सभी को समझना होगा कि बिना पारदर्शिता के आपका चयन भी सुरक्षित नहीं है। आज अगर धांधली और सेटिंग के खिलाफ आवाज नहीं उठी, तो कल ईमानदारी से मेहनत करने वाला कोई भी छात्र सिस्टम पर भरोसा कैसे करेगा?
कल से कुछ शिक्षक भी कह रहे हैं कि परीक्षा कैंसिल हुई तो सड़क पर उतरेंगे। उनसे मेरा सीधा सवाल है,अगर हिम्मत है तो सेटिंग और पैसे के दम पर रिजल्ट लेने वालों के खिलाफ भी बोलिए। मेहनती छात्रों को दरोगा बनाने की लड़ाई लड़िए, न कि संदिग्ध परीक्षा बचाने की।
छात्रों को भड़काना बंद कीजिए। यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। यह लड़ाई परीक्षा में हुई कथित धांधली, सेटिंग और अपारदर्शी व्यवस्था के खिलाफ है। इसमें मेंस पास छात्रों समेत हर ईमानदार अभ्यर्थी को साथ आना चाहिए।
और @EOU_BIHAR से भी सवाल है जब छात्रों की ओर से पर्याप्त साक्ष्य और शिकायतें सामने रखी जा चुकी हैं, तो बार-बार छात्रों से ही सबूत माँगने के बजाय उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष और गहन जाँच क्यों नहीं की जा रही? जाँच में देरी और निष्क्रियता से संदेह और गहरा होता है।
हमें किसी का नुकसान नहीं चाहिए, हमें सिर्फ निष्पक्ष जाँच, पारदर्शिता और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय चाहिए। आज सिस्टम नहीं सुधरा तो कल किसी भी मेहनती छात्र का भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा।
#परीक्षा_में_पारदर्शिता
एक भाई मुझे ज्ञान दे रहे हैं कि प्रोटेस्ट मत करो, नेतागिरी कर रहे हो। भाई, आप कौन हैं और आपकी सोच क्या है, मुझे नहीं पता; लेकिन इतना जरूर समझ लीजिए अपने हक और अधिकार के लिए आवाज़ उठाना नेतागिरी नहीं, अपने भविष्य के लिए संघर्ष है।
बिहार दरोगा परीक्षा में धांधली के पर्याप्त सबूत सामने आने के बावजूद अगर आयोग लीपापोती करेगा, तो सवाल उठेंगे ही। मेहनत करने वाले हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। दरोगा परीक्षा रद्द करनी होगी और निष्पक्ष जांच के बाद पारदर्शी तरीके से परीक्षा करानी होगी।
आज मेंस पास और फेल दोनों वर्ग के छात्र परेशान हैं। गलती अगर आयोग की है, तो उसकी सजा मेहनत करने वाले बच्चों को क्यों मिले?
मैं मेंस पास छात्रों से भी अपील करता हूँ कि इस लड़ाई में हिस्सा लीजिए और परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाइए। क्योंकि अगर आज व्यवस्था पर सवाल नहीं उठे और कल आपकी मेहनत से मिली सफलता पर भी सवाल खड़ा हो गया, तो सबसे ज्यादा नुकसान आपका ही होगा। आपकी मेहनत तभी सार्थक होगी, जब चयन की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
हमारी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। हमारी मांग सिर्फ इतनी है,परीक्षा में पूरी पारदर्शिता हो, धांधली की निष्पक्ष जांच हो और मेहनती व योग्य छात्रों के साथ न्याय हो।
हम चुप नहीं बैठेंगे। अपने हक के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाते रहेंगे।
बिहार दरोगा रद्द करो। छात्रों के भविष्य के साथ न्याय करो।
@Vivaan_85 अपनी लड़ाई खुद लड़ो न, आज भी दरोगा का आवाज़ सिर्फ दरोगा अभ्यर्थी ही उठा रहे हैं, नहीं तो कुछ लोग TRE 4 के नाम पर ही पूरा आंदोलन चला लिया और हुआ भी कुछ नहीं।
अगर लगता है किसी एग्जाम में धांधली हुई है सबूत पोस्ट करो एक ग्रुप बनाओ और सब मिलकर उसकी लड़ाई लड़ो।
कुछ मित्र मुझे सपोर्ट करने के बजाय गाली और धमकी दे रहे हैं। सवाल करते हैं कि सिर्फ़ 1799 दरोगा मेंस पर ही क्यों लिखते हो? प्री, रेडियो ऑपरेटर, मद्य निषेध, 70वीं BPSC, ड्राइवर और बाकी परीक्षाओं पर क्यों नहीं?
भाई, मैंने सारे एग्जाम नहीं दिए हैं। जिस परीक्षा में मेरे पास धांधली से जुड़े सबूत हैं, उसी के खिलाफ आवाज उठा रहा हूँ। अगर आपके पास भी किसी दूसरे एग्जाम में गड़बड़ी के पुख्ता सबूत हैं तो सामने आइए, मैं उस लड़ाई में भी आपके साथ खड़ा रहूँगा।
लेकिन एक बात समझिए,अपनी लड़ाई कोई दूसरा नहीं लड़ सकता। जब सबूत देने या अपनी बात रखने के लिए आपको बुलाया जाता है और उस समय आप खुद पीछे हट जाते हैं, फिर उम्मीद करते हैं कि कोई और आपके लिए सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लड़ता रहे तो यह सही नहीं है।
मैं 1799 दरोगा मेंस के मुद्दे पर 29 मई से लगातार लिख रहा हूँ, क्योंकि मेरे पास इसके संबंध में सबूत हैं। अगर आपके पास भी सबूत हैं तो आइए, गर्दनीबाग में मिलकर अपनी आवाज उठाइए। मैं सोशल मीडिया पर ही नहीं, जरूरत पड़ने पर ग्राउंड पर भी अपनी लड़ाई लड़ता हूँ, क्योंकि मेरे हक की लड़ाई आखिरकार मुझे ही लड़नी है।
और जो साथी कहते हैं कि हमने 3 महीने फिजिकल की तैयारी की है, हमारी मेहनत बेकार हो जाएगी,आपकी मेहनत तभी सुरक्षित रहेगी जब चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। अगर आप काबिल हैं, तभी आपने प्री और मेंस पास किया है। इसलिए खुद पर भरोसा रखिए और किसी भी अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाइए।
मांग किसी का चयन रुकवाना नहीं है, मांग सिर्फ इतनी है कि चयन प्रक्रिया साफ-सुथरी, निष्पक्ष और पारदर्शी हो। आज अगर चुप रहे तो कल किसी और के साथ भी यही हो सकता है।
पढ़ाई भी जरूरी है और अपने हक-अधिकार के लिए लड़ना भी।
आवाज उठाइए, सबूत के साथ आइए और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लड़ाई लड़िए।
1799 दरोगा मेंस कैंसल करना पड़ेगा क्योंकि इसमें व्यापक धांधली हुई है!
लेक़िन जिस तरह मेंस पास अभ्यर्थियों की ओर से फेल अभ्यर्थियों के लिए अपशब्द और तंज सुनने को मिल रहे हैं, वह बेहद दुःखद है। भाई, आपकी मेहनत का सम्मान है, लेकिन मेंस पास होना इस बात का प्रमाण नहीं कि आप ही पढ़ने वाले हैं और जो फेल हुआ वह अनपढ़, गंवार या बेवकूफ है। हर अभ्यर्थी ने मेहनत की है और हर किसी को निष्पक्ष परीक्षा का अधिकार है।
आज अगर आप सिर्फ इसलिए धांधली के सवाल पर चुप हैं क्योंकि आपका रिजल्ट आपके पक्ष में आया है, तो कल यही व्यवस्था आपके खिलाफ भी खड़ी हो सकती है। अन्याय किसी एक का नहीं होता,आज किसी और के साथ है, कल आपके साथ भी हो सकता है।
हमारी मांग किसी पास या फेल अभ्यर्थी के खिलाफ नहीं है। हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो। अगर जांच में धांधली सिद्ध होती है तो परीक्षा रद्द कराकर दोबारा निष्पक्ष परीक्षा कराई जाए। लगातार सामने आ रहे नए-नए सबूतों और आरोपों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
आपने मेहनत की है तो अपनी मेहनत पर भरोसा रखिए। आपको भी फेयर परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयन चाहिए। लेकिन अगर परीक्षा की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े हों, तो किसी भी मेरिट का क्या मतलब रह जाएगा?
आज भावनाओं में आकर किसी के उकसावे में मत आइए। किसी फेल अभ्यर्थी को गाली देने से न आपकी रैंक बढ़ेगी, न आपका भविष्य सुरक्षित होगा। बल्कि जरूरत है कि सभी अभ्यर्थी मिलकर एक ही बात कहें—
हमें किसी के हक पर डाका नहीं चाहिए, हमें निष्पक्ष परीक्षा चाहिए।
हमें किसी को हराना नहीं है, हमें पारदर्शी व्यवस्था चाहिए।
जिसकी मेहनत है, उसका चयन हो,लेकिन चयन निष्पक्ष परीक्षा के बाद हो।
याद रखिए, फेयर एग्जाम होगा तभी फेयर सिलेक्शन पर भरोसा होगा। वरना आज की जीत कल पछतावे में बदल सकती है।
अब घर में बैठकर इंतज़ार करने का वक्त नहीं है, अपने हक के लिए शांतिपूर्ण तरीके से सड़क पर उतरने का वक्त है।
आज सभी छात्र साथी गर्दनीबाग पहुँचें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करें। दारोगा भर्ती परीक्षा में हुई व्यापक धांधली के आरोपों और सामने आए सबूतों की निष्पक्ष जांच हो तथा परीक्षा रद्द की जाए। युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हमारी मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं-
📌 दारोगा भर्ती परीक्षा की निष्पक्ष जांच और परीक्षा रद्द हो।
📌 प्रश्नपत्र, OMR और Answer Key सार्वजनिक की जाए।
📌 BSSC में संविदा व्यवस्था समाप्त की जाए।
📌 CGL-4 और इंटर लेवल परीक्षा की तिथि तत्काल घोषित की जाए।
📌 भर्ती परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
याद रखिए आंदोलन हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हमारी ताकत हमारी शांति, एकता और अनुशासन है। किसी सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं, किसी से दुर्व्यवहार नहीं,बस अपनी जायज़ मांगों के लिए मजबूती से आवाज़ उठानी है।
घर से निकलें, कमरे से निकलें, लाइब्रेरी से निकलें और गर्दनीबाग पहुँचें।
अपने लिए, अपने भविष्य के लिए, बिहार के हर मेहनतकश छात्र के लिए।
✊ शांतिपूर्ण आंदोलन में एकजुट हों।
आवाज़ बुलंद करें,हक लेकर रहेंगे।