प्रदेश के मुख्यमंत्री बताते हैं की शहर में 24घंटे लाइट दी जा रहीं वही अयोध्या में ये हाल हैं की रोज़ रात में कई घंटे लाइट नहीं रहती
रात में ना जई की कॉल उठती हैं ना हाइडल के शिकायत नंबर पर एवं एसडीओ का सी०यू०जी नंबर पर मिलाया गया ऑफ हैं ये हाल हैं “अयोध्या” का
@UPPCLLKO@MVVNLHQ
मुख्यमंत्री के अयोध्या आगमन पर स्वर्णिम विकास की परत क्षण भर की वर्षा में ही धुल गई।
राम पथ सहित मोहल्लों की गलियाँ जलमग्न हो उठीं, और करोड़ों की विकास योजनाएँ पानी में बहती दिखाई दीं।
यह थोड़ी सी वर्षा नहीं थी, यह वर्षों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाला पानी था।
आज लखनऊ में ‘इटावा कथावाचन पीडीए अपमान कांड’ के पीड़ितों का सम्मान किया गया और उनकी आर्थिक हानि के लिए सहायता राशि दी गयी व जिस दृष्टिहीन कलाकार की ढोलक छीनी गयी, उसे नई ढोल भी दी गयी।
- भागवत कथा तो सबके लिए है, जब सब सुन सकते हैं तो सब बोल क्यों नहीं सकते?
- भागवत तो भगवान कृष्ण से जुड़ी है, अगर सच्चे कृष्ण भक्तों को ही भागवत कथा कहने से रोका जाएगा तो कोई ये अपमान क्यों सहेगा?
- कुछ लोग कथावाचन में अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं
- कथावाचन को जिन्होंने भावना की जगह व्यवसाय बना लिया है, ‘इटावा कथावाचन पीडीए अपमान कांड’ उन्हीं कुछ प्रभुत्ववादियों और वर्चस्ववादियों की वजह से घटित हुआ है
- अगर PDA समाज से इन लोगों को इतना ही परहेज है तो घोषित कर दें कि परंपरागत रूप से कथा कहनेवाले वर्चस्ववादी, PDA समाज द्वारा दिया गया चढ़ावा-चंदा, दान-दक्षिणा कभी स्वीकार नहीं करेंगे
- प्रभुत्ववादी और वर्चस्ववादी समय-समय पर कभी घर को गंगा जल से तो कभी मंदिर को धुलवाकर PDA समाज का मानसिक उत्पीड़न व अपमान करते हैं, अब सिर तक मुंडवा रहे हैं
- भाजपा राज में PDA समाज को हेय दृष्टि से देखा जाता है
- सच तो ये है कि जैसे-जैसे PDA समाज में चेतना और जागरूकता बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे PDA समाज पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए वर्चस्ववादियों के PDA समाज पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं
- PDA समाज पर लगातार बढ़ते हमलों का असली कारण ये है कि वर्चस्ववादियों को लगता है कि उनके पीछे आज भाजपा की वो सरकार खड़ी है, जो सदियों से शक्तिशाली रहे लोगों की सरकार है, और वो उन्हें बचा लेगी लेकिन अब PDA समाज की एकता और एकजुटता इसका जवाब डटकर देगी
- अगर भाजपा को लगता है कि भागवत या कोई कथा कहने पर एक वर्ग विशेष का ही अधिकार है तो फिर वो इसके लिए भी क़ानून बना कर दिखाए
- जिस दिन PDA समाज ने अपनी कथा अलग से कहनी शुरू कर दी, उस दिन इन परंपरागत शक्तियों का साम्राज्य ढह जाएगा
- भाजपा जाए तो चैन आए!
#जो_पीड़ित_वो_पीडीए
आदरणीय समस्त शिक्षक समुदाय
एक शिक्षक का बेटा होने के नाते हर शिक्षक से मेरा पारिवारिक संबंध है और उनका दर्द मेरा दर्द है।
- स्कूल मर्जर के कारण शिक्षकों की संख्या और भी घट जाएगी। गाँवों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं होने से व असुरक्षा की वजह से मर्जर के बाद बच्चियाँ दूर के स्कूलों में नहीं भेजी जाएंगी, इससे स्त्री शिक्षा कम होगी, लोग अपने बच्चों को स्कूल से निकाल लेंगे लेकिन ये सब बातें परिवारवाले ही समझ सकते हैं।
- शिक्षक संघ की माँगों के समर्थन में हम हमेशा रहे हैं और रहेंगे।
- बेसिक शिक्षक भर्ती प्रयागराज आंदोलनकारियों को हमारा समर्थन जारी रहेगा।
- 69000 सहायक शिक्षक भर्ती आंदोलनकारियों के हक़ की लड़ाई हम लड़ते रहेंगे।
- शिक्षा मित्र आंदोलनकारियों को हमारा साथ हमेशा मिलता रहा है और मिलता रहेगा।
शिक्षकों और बच्चों के अभिभावकों को जितनी जल्दी ये बात समझ आ जाएगी कि भाजपा सरकार शिक्षक और शिक्षा के ख़िलाफ़ है और भाजपा की वजह से परिवारवालों के बच्चों का भविष्य अंधकारमय है, उतनी ही जल्दी परिवर्तन के लिए ज़मीन बननी तैयार हो जाएगी। भाजपा रूढ़िवादी है और ये जानती है कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति सवाल उठाता है, वो विभाजनकारी राजनीति का विरोध करता है इसीलिए स्कूल जितने कम होंगे, उतना ही भाजपा का विरोध कम होगा। शिक्षित नौकरी मांगेगा। सरकारी नौकरी होगी तो आरक्षण भी देना पड़ेगा। इसीलिए आरक्षण विरोधी भाजपा के एजेंडे में नौकरी है ही नहीं ।
भाजपा शिक्षकों को विरोध का एक ऐसा आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य न करे जिससे हर क्षेत्र में ठहराव आ जाए। भाजपा शिक्षकों की समस्याओं के प्रति हमेशा बेरुख़ी का नज़रिया अपनाती है। भाजपा की सरकार एक हृदयहीन सरकार है। जिसमें संवेदना न हो वो सरकार नहीं चाहिए।
सबको याद है कि हमने ‘ऑनलाइन हाज़िरी’ के आंदोलन के समय कहा था कि शिक्षकों का सम्मान और उन पर विश्वास करने से ही अच्छी पीढ़ी जन्म लेती है।
गुरुओं के साथ जो अभद्र भाषा बोलते हैं, उनका अपमान करते हैं वो अशिक्षित के समान ही हैं। अहंकार लोगों को अनपढ़ बना देता है क्योंकि अहंकारी न तो किसी की तकलीफ़ दुख को पढ़ता है, न सुनता है। शिक्षकों पर अविश्वास जताकर और उनका तिरस्कार करके भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि वो न तो शिक्षा का सम्मान करती है, न शिक्षकों का।भाजपा ने अध्यापकों का भरोसा खो दिया है।
हम सदैव शिक्षक और शिक्षा के साथ हैं।
आपका अखिलेश
आदरणीय समस्त शिक्षक समुदाय
एक शिक्षक का बेटा होने के नाते हर शिक्षक से मेरा पारिवारिक संबंध है और उनका दर्द मेरा दर्द है।
- स्कूल मर्जर के कारण शिक्षकों की संख्या और भी घट जाएगी। गाँवों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं होने से व असुरक्षा की वजह से मर्जर के बाद बच्चियाँ दूर के स्कूलों में नहीं भेजी जाएंगी, इससे स्त्री शिक्षा कम होगी, लोग अपने बच्चों को स्कूल से निकाल लेंगे लेकिन ये सब बातें परिवारवाले ही समझ सकते हैं।
- शिक्षक संघ की माँगों के समर्थन में हम हमेशा रहे हैं और रहेंगे।
- बेसिक शिक्षक भर्ती प्रयागराज आंदोलनकारियों को हमारा समर्थन जारी रहेगा।
- 69000 सहायक शिक्षक भर्ती आंदोलनकारियों के हक़ की लड़ाई हम लड़ते रहेंगे।
- शिक्षा मित्र आंदोलनकारियों को हमारा साथ हमेशा मिलता रहा है और मिलता रहेगा।
शिक्षकों और बच्चों के अभिभावकों को जितनी जल्दी ये बात समझ आ जाएगी कि भाजपा सरकार शिक्षक और शिक्षा के ख़िलाफ़ है और भाजपा की वजह से परिवारवालों के बच्चों का भविष्य अंधकारमय है, उतनी ही जल्दी परिवर्तन के लिए ज़मीन बननी तैयार हो जाएगी। भाजपा रूढ़िवादी है और ये जानती है कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति सवाल उठाता है, वो विभाजनकारी राजनीति का विरोध करता है इसीलिए स्कूल जितने कम होंगे, उतना ही भाजपा का विरोध कम होगा। शिक्षित नौकरी मांगेगा। सरकारी नौकरी होगी तो आरक्षण भी देना पड़ेगा। इसीलिए आरक्षण विरोधी भाजपा के एजेंडे में नौकरी है ही नहीं ।
भाजपा शिक्षकों को विरोध का एक ऐसा आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य न करे जिससे हर क्षेत्र में ठहराव आ जाए। भाजपा शिक्षकों की समस्याओं के प्रति हमेशा बेरुख़ी का नज़रिया अपनाती है। भाजपा की सरकार एक हृदयहीन सरकार है। जिसमें संवेदना न हो वो सरकार नहीं चाहिए।
सबको याद है कि हमने ‘ऑनलाइन हाज़िरी’ के आंदोलन के समय कहा था कि शिक्षकों का सम्मान और उन पर विश्वास करने से ही अच्छी पीढ़ी जन्म लेती है।
गुरुओं के साथ जो अभद्र भाषा बोलते हैं, उनका अपमान करते हैं वो अशिक्षित के समान ही हैं। अहंकार लोगों को अनपढ़ बना देता है क्योंकि अहंकारी न तो किसी की तकलीफ़ दुख को पढ़ता है, न सुनता है। शिक्षकों पर अविश्वास जताकर और उनका तिरस्कार करके भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि वो न तो शिक्षा का सम्मान करती है, न शिक्षकों का।भाजपा ने अध्यापकों का भरोसा खो दिया है।
हम सदैव शिक्षक और शिक्षा के साथ हैं।
आपका अखिलेश
किसान पूछ रहे हैं जब माननीय मुख्यमंत्री जी ने कृषि का ‘हवा-हवाई सर्वेक्षण’ किया था तो हवाई पट्टी से उड़ने के बाद, मजबूरी में सड़क पर मक्का सुखाने से बनी ये ‘मक्का पट्टी’ दिखाई दी थी क्या?
भाजपा किसानों की समस्या क्यों नहीं समझती है। समतल के अभाव में सड़कों पर मक्का सुखाने का विकल्प हर तरह से असुरक्षित है। किसानों की मजबूरी को समझकर सरकार विशेष प्रबंध करे। यातायात और परिवहन के लिए आवागमन का मार्ग सुरक्षित होना चाहिए। ये किसानों के जीवन के लिए भी ख़तरनाक है।