स्वतंत्र भारद्वाज ने गलत किया तो 70 दिन बाद भी SC/ST लगा दिया जाएगा और वो जेल जाएगा लेकिन उसको पीटनेवाले वीडियो में दिख रहे हैं पर उनपर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
अजीत भारती को गाली देनेवाले का बाल भी बांका नहीं होगा लेकिन अजीत के जवाब पर SC/ST एक्ट भी लगेगा और उसको एंटीसिपेटरी बेल भी नहीं मिलेगी।
ये सिर्फ दो उदाहरण नहीं हैं.. यही आज की डेट में हमारे समाज की सच्चाई है।
सवाल बस इतना है कि जब किसी के गलत पर होनेवाला कानूनी एक्शन उसकी जाति देखकर होता है तो वो प्रक्रिया बटेंगे तो कटेंगे की कैटेगरी में आती है या नहीं?
जब देश की व्यवस्था ही हमें एक नहीं मान रही तो काहे का एक हैं तो सेफ हैं फिर? आज कोई और है.. कल को हममें से कोई होगा। बस अपनी बारी का इंतजार कीजिए।
"पंडित जी लोग दलितों को खाट पर नहीं बैठने देते थे, उनके साथ अत्याचार करते थे"-पता नहीं, कहाँ-कहाँ से ऐसी झूठी कहानियाँ बनाई गईं।
एक दलित वाल्मीकि रामायण लिखता है, जिसमें एक क्षत्रिय राजा की कहानी है, जो आदिवासियों को साथ लेकर एक ब्राह्मण राजा का वध करता है और इस कहानी को ब्राह्मण घर-घर जाकर सुनाते हैं, क्षत्राणी मीराबाई के के गुरु जूता गाँठने वाले रविदास हैं, क्षत्रिय राम दलितों के जूठे बेर खा रहे हैं।
ऐसा समाज रहा है हमारा, लेकिन उसके बाद एक नई "कौम" ने जन्म लिया"-"अंबेडकरवादी", और इन्होंने पूरे समाज की ऐसी-तैसी कर दी।
जिस दिन गरीब दलित ये समझ जाएगा कि उसका दुश्मन ब्राह्मण नहीं, बल्कि अमीर दलित है जो उसके हिस्से का आरक्षण खा रहा है। उस दिन अंबेडकरवादियों की दुकान बंद और गरीब दलित का उद्धार हो जाएगा।
#PralayShootBegins
गजब का संविधान है भारत का -
IAS अपने बच्चे का FEES नहीं भरेगा क्योंकि वो SC/ST है ,
चपरासी अपने बच्चे का FEES तीन गुना भरेगा क्योंकि वह सवर्ण है ,
अब तो आरक्षण को हटा के ही सांस लिया जाएगा !!
आरक्षण किसे मिलना चाहिए?
राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति राज्यपाल के परिवार को या गरीब किसान-मजदूर के बच्चों को?
सांसद विधायक मंत्री मुख्यमंत्री के परिवार को या गरीब किसान-मजदूर के बच्चों को?
थानेदार तहसीलदार कलेक्टर कप्तान कमिश्नर सचिव जज के परिवार को या गरीब किसान-मजदूर के बच्चों को
इतना तेल समुद्र में बह रहा है, आग लगी हुई है और पूरे पश्चिमी एशिया में बारूद की गंध फैली हुई है, लेकिन क्या मजाल कि किसी तथाकथित पर्यावरण प्रेमी को समुद्री जैव विविधता, ग्लेशियरों के पिघलने या अन्य पर्यावरणीय खतरों की कोई चिंता दिखाई दे दे।
भारत में जैसे ही बच्चे दीपावली पर सूतली बम छोड़ते हैं, ऐसा माहौल बनाया जाता है मानो सारे ग्लेशियर उसी से पिघल जाते हैं।
मणिपुर की भारतीय फुटबॉलर स्वीटी देवी न्गांगोम ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों से अपील कर रही हैं कि वे उनका विश्व कप क्वालीफाइंग मैच देखें।
फुटबॉल की यह दयनीय स्थिति देखकर बुरा लगता है।
काश क्रिकेट जितना बाकी खेलों को भी भारत में पसंद किया जाता।
@Sheetal2242 ख़ान, अपना इतिहास सही करो
बाबर ढाबर के कारण ही सती प्रथा प्रारम्भ हुई
जो बलात्कार मुगलों ने शुरू किया वहीं का आज भी उसकी औलाद कर रही है
अजमेर, केरल, लंदन और रोज़ ये हो रहा है
अपना मुल्लापन बाहर निकालकर पढ़ाया-लिखाया करो
क्या यह वही “महात्मा” हैं?
अक्टूबर 1946, नोआखाली दंगों में गांधी ने हिंदू स्त्रियों से कहा:
“दाँत में जीभ दबाकर या साँस रोककर मर जाओ।”
अगले दिन फरमान बदलकर बोले:
“बेहतर है ज़हर खाकर मर जाओ।”
वो पूरी दुनिया में हथियार,गोला-बारूद, बम,लड़ाकू विमान, मिसाइल बेचकर भी युद्ध की फंडिंग नहीं कर रहे हैं,
लेकिन हम रूस से तेल खरीदकर युद्ध की फंडिंग कर रहे हैं।
@Gaurav080995@kaankit@TheEmissaryCo महोदय,
अभी कुछ माह पूर्व इसी कार्यक्रम के निर्माता ने एक कथन में कहा था कि उस समय की तात्कालिक सरकार बहुत से दृश्यों को हटवाया, (प्रायः सभी मुख्य भाग निकले गये)उसके पश्चात भी बहुत प्रयासों के पश्चात की अनुमति मिली
किसी का विरोध नहीं, क्योंकि राजनेता "राजनेता" ही होते है