What the hell is this @X@XCorpIndia
How is this video of LoP @RahulGandhi trigger a graphic content warning
Have you lost it??????
Shameless - it is our democratic right to denounce violence against students - and you have the audacity to label it with a warning?
प्रधानमंत्री जी,
श्री राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की - वहां हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है।
ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।
तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक कीजिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाइए।
आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर है।
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
This Boomer think he is looking cool by taking jibe at the age of Rahul Gandhi
But in reality he is looking cringe by reading such outdated jokes, that too not his own but written by some scriptwriter 😭
और राहुल राहुल गांधी से प्रधानमंत्री का obsession फिर दिखा...वो बात युवा और स्टार्ट उप की कर रहे थे....वहाँ भी 56 साल के युवा का ताना मारा. ग़ज़ब जुनून है नेता विपक्ष को लेकर मोदी जी में!
Rahul Gandhi lives rent-free in Modi’s mind. Even at the start of the Monsoon Session, he is thinking about him.
Modi knows that the real threat to him is Rahul Gandhi and no one else.
सोनम वांगचुक ने संसद मार्च को लेकर स्टैंड बदल दिया है।सिर्फ सरकारी प्रतिनिधि से मुलाकात और संसद में चर्चा की सूरत में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग छोड़ दी है। उन्होंने अनशन तोड़ने का ऐलान कर दिया है।अभिजीत को साफ करना चाहिए वो मांग पर कायम हैं या नहीं।डील कहां से हो रही है
Opposition leaders have been raising the issue and would be raising it in Parliament even without Wangchuk’s conditions. What happened to all the accountability that was being sought from the govt? It’s been deflected on the opposition again?
Wasn’t the only demand that Pradhan resign? Now meeting ministers will suffice? And, NEET will come up for discussions in the House. What a change of goal posts from Wangchuk. Never trusted this agitation from day one
खेला हो गया
अमित शाह ने स्क्रिप्ट का आखरी पन्ना पलट दिया है. अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पीछे छूट गई.
जैसा पहले से तय था, वैसा ही शाह के आदमी ने अब कहा- कोई भी पॉलिटिकल लीडर मिल ले और सदन में मुद्दा उठाने की बात कह दे.
हासिल क्या हुआ 👇
1. नैरेटिव बन जाएगा कि सरकार गंभीर है. मोदी बहुत अच्छे हैं. जनता की सुनी जाती है
2. विपक्ष नकारा है, उससे कुछ हो नहीं रहा था, इसलिए लोग आगे आए
3. सरकार ने अपने हिसाब का विपक्ष बना दिया, जिसे अपने हिसाब की चीजें कराई जाएं
4. NEET पेपर लीक की वजह से 25 बच्चों की मौत हुई, बड़े ही आसानी से उसे भुला दिया गया
5. आने वाले वक्त में भी एक ग्रुप तैयार हो गया, जो विपक्ष के किए को ZERO कर सके
याद रहे - वो अमित शाह ही थे जिन्होंने सोनम को जेल से बाहर निकाला, NSA हटाकर.
सोनम हमेशा से मोदी के फैन रहे हैं. BJP सरकार के फैन रह हैं.
अब सोचने वाली बात है - जो लोग इनको सपोर्ट कर रहे हैं, जेनविन लोग, बिना पैसे वाले, उनपर क्या बीत रही होगी.
बाकी इस खेल के खूब पैसा बहाया गया, कई सेलिब्रिटी को लाखों दिए गए. जो आज तक नहीं बोले, वो भी बिना डर के इस बार बोलने लगे. आपको ये अजीब नहीं लगता?
कतई देश में लोकतंत्र कायम करवा दिया मोदी और शाह ने.. है ना.
Few weeks back, Karnataka Minister @PriyankKharge Ji had asked the RSS to disclose its funding.
During an internal meeting, RSS chief Mohan Bhagwat said that we are body of individuals and individuals donate us.
Now see this report, GoI owned ONGC donated ₹668 crores to 20 organisations linked with RSS. This is their source, this is how they have built a massive office in Delhi.
रेलों का उद्घाटन रेल मंत्री नहीं करता,
सड़कों का उद्घाटन परिवहन मंत्री नहीं करता,
एयरपोर्ट का उद्घाटन उड्डयन मंत्री नहीं करता
परीक्षा पे चर्चा शिक्षा मंत्री नहीं करता,
मेडल विजेताओं से चर्चा खेल मंत्री नहीं करता,
विदेशी दौरे विदेश मंत्री नहीं करता
पर्यावरण मंत्री पेड़ नहीं लगाता
लेकिन जब भी कोई घटना हो जाती है, आप लोग मंत्रियों से जवाब माँगने लग जाते हो, इस्तीफे की बात करते हो।
उसका नाम ही भूल जाते हो, जो एक अकेला सबके मंत्रालय चला रहा है।
क्या ये अच्छी बात है?
सोनम वांगचुक का ये कथन संदेह को बढ़ाने वाला है।
वे कह रहे हैं कि राज्यपाल ने उन्हें विवश किया कि वे अभिजीत दीपके से मिलें।
राज्यपाल ने उन्हें क्यों विवश किया? उनके क्या स्वार्थ थे? क्या उन्हें ऊपर से निर्देश दिए गए थे कि वे सोनम वांगचुक का इस्तेमाल करें।
सोनम वांगचुक क्यों विवश हुए, उनकी किस मजबूरी का फ़ायदा सरकार ने उठाया?
अभिजीत दीपके से पूछा जाना चाहिए कि सोनम ने उनसे क्या बातचीत की थी? क्या सोनम ने राज्यपाल वाली बात बताई थी?
राज्यपाल वी के सक्सेना अपनी काली करतूतों के लिए कुख्यात हैं। वे आंदोलनों को पंक्चर करने में उस्ताद हैं।
लेकिन असली मुद्दा ये है कि अभिजीत दीपके ये सिद्ध करेंगे या नहीं कि केंद्र की कठपुतली नहीं हैं।
ये तो सब जानते हैं कि सोनम हिंदुत्व और उसके ऐजेंडे को कुछ समय तक बाकायदा समय मिलता रहा है। लेकिन अब मामला विपक्ष के हाथों में जा रहा है जिसका मतलब है विपक्ष का कमजोर है।
कमेंट्स में कुछ सजग लोग ये चिंता भी जाहिर कर रहे हैं कि ABP न्यूज के 125 सैक्टर स्थित दफ्तर की सुरक्षा बढ़ानी चाहिए। सैक्टर 16 A फिल्मसिटी में स्थित India Today के दफ्तर व अन्य चैनलों को भी सुरक्षित किया जाए, शरारती तत्वों पर कार्रवाई होनी चाहिए।