नदी के किनारे रोती बिलखती महिलाएं और लगी भारी भीड़ की तस्वीरें यूपी के लखीमपुर खीरी की हैं, जहां नदी पर पुल न होने के चलते नदी पार कर रहे किसान को मगरमच्छ खींच ले गया, पास में मौजूद बेटे के रोने चिल्लाने की आवाज सुनकर लोग दौड़े लेकिन तब तक मगरमच्छ किसान को दूर गहरे पानी में लेकर चला गया।
मामला निघासन के मांझा गांव का है, परिजनों के मुताबिक गांव निवासी रमेश सिंह नाम के 54 वर्षीय किसान अपने मवेशी की तलाश के लिए नदी पार कर रहे थे। तभी उन पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया और उन्हें उनके बेटे के सामने खींच ले गया, गोताखोरों की मदद से किसान की तलाश की जा रही है पर अभी तक किसान का पता नही चल सका।
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मशहूर कंपनी @letsblinkit का घटियापन देखो
अभी लड़का मुझे ऑर्डर डिलीवर करने आया मैंने उस से वैसे ही पूछा की कितने कमा लेते हो उसने बताया भाई सुबह 7 बजे से अब तक केवल 292 रुपए मिले है लेकिन उस ने एक हैरान करने वाली बात बताई
कल एक कस्टमर ने लगभग 2 घंटे ऑर्डर डिलीवरी के लिए वेट करवाया और फिर ऑर्डर कैंसिल कर दिया . ना ब्लिंकिट ने कुछ दिया ना कस्टमर ने
राइडर की क्या गलती है ये blinkit बताए और पालिसी भी पब्लिक करे ऑर्डर कैंसिल और एक्स्ट्रा टाइम पर आप राइडर को क्या देते हो ?
ये राइडरस के साथ धोखा है ब्लिंकिट
बिहार सरकार अब सरकारी योजनाओं की तारीफ़ करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को लाखों व्यूज़ आने पर पैसे देंगे. एक लाख व्यूज़ पर 10 हजार रुपये और 10 लाख व्यूज़ पर एक लाख रुपये.
लेकिन सवाल ये है कि जो सरकारी योजनाओं की पोल खोलेगा, उसे क्या मिलेगा ?
सरकारी धमकी ? पुलिसिया FIR ? या फिर समर्थकों की गालियां ?
On the death anniversary of former Congress President Badruddin Tyabji, we remember his remarkable contribution to India’s freedom movement, social reform, and the pursuit of justice, equality, and national unity.
सत्येंद्र जैन गिरफ्तार, तो राघव चड्ढा पर सवाल क्यों नहीं?
दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद अब सवाल राघव चड्ढा को लेकर भी उठ रहे हैं।
राघव चड्ढा इसी दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में सवाल यह है कि अगर जल बोर्ड में भ्रष्टाचार हुआ था और सत्येंद्र जैन को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है, तो उस दौरान बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे राघव चड्ढा की भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही?
और अब चड्ढा का BJP में शामिल होना भी इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक सवाल खड़े करता है।
क्या BJP में शामिल होना उनके लिए किसी कानूनी कार्रवाई से बचने का रास्ता था?
यह सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब जांच एजेंसियों को तथ्यों और सबूतों के आधार पर देना चाहिए।
CAG की रिपोर्ट बताती है कि देश के रेलवे स्टेशनों की हालत बहुत खराब है।
• स्टेशनों पर पीने का साफ पानी तक नहीं है। कई जगहों पर पानी में E. coli बैक्टीरिया पाए गए, जिससे फूड पॉइजनिंग, डायरिया और किडनी भी फेल हो सकती है
• 89% से ज्यादा स्टेशनों पर यात्रियों के लिए वेटिंग रूम, शौचालय, पंखे, प्लेटफॉर्म शेड, घड़ी जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं
• सालाना 710 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई करने वाले स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाएं बद से बदतर हैं
• देश के कई सारे स्टेशनों पर दिव्यांग यात्रियों के लिए भी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं
- ये दिखाता है कि टिकट के नाम पर ताबड़तोड़ वसूली करने वाली मोदी सरकार को यात्रियों की तनिक भी चिंता नहीं है।
नरेंद्र मोदी और उनके 'रील मंत्री' अश्विनी वैष्णव दावे तो बड़े-बड़े करते हैं, लेकिन असलियत ये है कि इन दोनों ने भारतीय रेल का कबाड़ा कर दिया है।