मध्य प्रदेश के देवास जिले के सियापुरा गांव में मस्जिद और दरगाह पर तोड़फोड़ और आगजनी का मामला सामने आया है। आरोप है कि देर रात मस��जिद पर पत्थरबाजी कर गेट का कांच तोड़ा गया, जबकि दरगाह की चादर और धार्मिक झंडों क�� आग लगा दी गई। घटना का कुछ हिस्सा मस्जिद में लगे CCTV कैमरे में कैद हुआ है। सुबह जानकारी मिलने पर ग्रामीणों ने पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने मामले में अभिषेक और उसके पिता को गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस घटना की जांच कर रही है और गांव में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। देखिए पूरी रिपोर्ट।
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दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की SIR विरोधी रैली में विपक्षी दलों ने मोदी सरकार और चुनाव आयोग को घेरा। ऑब्जर्वर पोस्ट हिंदी की संवाददाता पाटेश्वरी सिंह ने कांग्रेस, लेफ्ट और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं से बातचीत की। SIR, राहुल गांधी की PM पद की दावेदारी और मोदी सरकार के कामकाज पर सुनिए विपक्ष की राय। देखिए ये एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट।
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दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की रैली के दौरान Observer Post Hindi की संवाददाता पाटेश्वरी सिंह का मोबाइल फोन चोरी हो गया। घटना के बाद हम इस मामले की शिकायत दिल्ली पुलिस से कर रहे हैं। Observer Post Hindi प��लिस प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने और चोरी हुए फोन की तलाश में आवश्यक कार्रवाई करने की अपील करता है। रैली जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम में पत्रकारों की सुरक्षा और उनके काम में इस्तेमाल होने वाले जरूरी उपकरणों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। हम दिल्ली पुलिस से अनुरोध करते हैं कि फोन बरामद करने में हरसंभव मदद की जाए।
क्या दैनिक भास्कर ने एक पूर्व मंत्री के ��ेटे, एक पूर्व विधायक और उत्तर प्रदेश में विपक्ष के एक कद्दावर नेता के लिए अपने कंटेंट राइटर्स को ऐसी ही भाषा इस्तेमाल करने को कहा है ? क्या दैनिक भास्कर यही भाषा बृजभूषण शरण सिंह, अजय मिश्र और आशीष मिश्र के लिए इस्तेमाल करेगा ?
बीते दिनों IANS में काम करने वाले दो साथियों के फोन आए. आज फिर से कॉल आने के बाद मुझे लगा कि लिखना चाहिए. दोनों ने रोजमर्रा की बातचीत से ज्यादा ���स बात पर जोर दिया कि वे किस ��रह संस्थान में मानसिक दबाव और शोषण का सामना कर रहे हैं. उनका कहना है कि रिपब्लिक से हाल ही में IANS आए उनके बॉस का व्यवहार बेहद खराब है और वह उन्हें लगातार टॉर्चर कर रहा है.
वे बताते हैं कि इस मानसिक दबाव और ट्रॉमा के चलते कई कर्मचारियों को अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. एक कर्मचारी के अस्पताल में भर्ती होने और मेडिकल लीव पर होने की जानकारी ऑफिस में सबको थी. बावजूद इसके अगर कोई खबर छूट गई तो उसे ग्रुप में सुनाया गया कि तुम्हें बीट से हटाया जाता है. तुम्हारा रहना न रहना बराबर है. कंपनी को तुम्हारी जरूरत नहीं है. उसने बताया कि उसकी बीमारी की वजह भी उसके बॉस द्वारा लगातार की जा रही मानसिक प्रताड़ना ही है.
बताते हैं कि IANS में लगातार ANI से तुलना की जाती है. जबकि IANS में स्टाफ ANI की तुलना में काफी कम है, लेकिन उनसे उसी स्तर के काम की उम्मीद की जाती है. 9 घंटे की शिफ्ट के बजाय रोज 12 से 16 घंटे तक काम कराया जाता है. 12-13 घंटे काम करना तो सामान्य बना दिया गया है. शिफ्ट खत्म होने के बाद भी रिपोर्टरों को रोका जाता है. छुट्टी लेने के लिए भी कई बार गिड़गिड़ाना पड़ता है.
उनकी शिकायत सिर्फ अतिरिक्त काम को लेकर नहीं, बल्कि व्यवहार को लेकर भी है. ग्रुप में देशभर के ब्यूरो के पत्रकारों के सामने इस तरह डांटा-फटकारा जाता है कि उन्हें रोज अपमान का घूंट पीकर रहना पड़ता है.
रोज सुनते हैं कि तुम निकम्मे हो, नई नौकरी ढूंढ लो. यह मानसिक दबाव रोज का है और लगातार बढ़ रहा है. फोन रखते समय उसने कहा कि कभी-कभी मन करता है कि आत्महत्या कर लूं. लेकिन फिर परिवार का ख्याल आ जाता है.
रिपब्लिक से IANS आया यह बॉस यहां भी वही कल्चर चाहता है. चीखना-चिल्लाने वाला. कहता है कि तुमसे कोई नेता बात नहीं करता, तुम्हें कोई बाइट नहीं देता. तुम कंपनी ��र बोझ हो.
ANI किसी रैंडम व्यक्ति की भी बाइट कर ले, जिससे खबर के लिहाज से बहुत कुछ खास न निकलता हो तब भी IANS के ग्रुप में सवाल किया जाता है कि ANI के पास है, तुम्हारे पास क्यों नहीं है? यानी खबर के महत्व या उस बाइट पर आने वाले व्यूज से ज्यादा सवाल सिर्फ इतना होता है कि ANI ने किया तो तुमने क्यों नहीं?
इनका कहना है कि सुबह जल्दी उठने से लेकर देर रात तक फोन बजता रहता है. 24 घंटे उपलब्ध रहने का दबाव है. रिपोर्टरों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों और डेस्क के बीच आए दिन बहस की स्थिति बनती है.
जॉइनिंग से पहले पत्रकारों को बेहतर कार्य परिस्थितियों, दो साप्ताहिक अवकाश और कई दूसरी सुविधाओं का भरोसा दिया जाता है. लेकिन नौकरी शुरू होने के बाद तस्वीर बिल्कुल अलग होती है. यहां तक कि जो एक साप्ताहिक अवकाश मिलता भी है वह भी कई बार नहीं मिल पाता.
IANS में काम कर रहे उन पत्रकारों के लिए दुआ कीजिए. दुआ कीजिए कि जो लोग हर दिन इतने दबाव और मुश्किल हालात के बीच पत्रकारिता कर रहे हैं, उन्हें जल्द ऐसी जगह मिले, जहां उन्हें अपने काम के लिए सम्मान मिले, मानसिक सुकून मिले और बेहतर कार्य-परिस्थितियां.
उन्हें ऐसी नौकरी मिले, जहां सुबह से देर रात तक फोन की घंटी के साथ डर नहीं बल्कि अपने काम को लेकर सुकून हो. जहां पत्रकार को उसकी मेहनत के लिए सम्मान मिले, अपमान नहीं.
दोस्तों, मैं तुम्हारे लिए बस इतना ही कर सकता हूं. इसके ��लावा शायद मेरे पास देने के लिए कुछ नहीं. हां, किसी शाम या वीकेंड पर साथ बैठकर चाय जरूर पी जा सकती है. तुम्हें थोड़ा हौसला दे सकता हूं, तुम्हारा दर्द सुन सकता हूं, उसे बांट भी सकता हूं.
शुक्रिया.
ध्यान रहे कि मुद्दा ये नहीं है कि कोई ज़्यां द्रेज़ को नहीं पहचानता.
हो सकता है कि कोई दत्तात्रेय होसबोले या भैयाजी जोशी को ना पहचाने.
आज जेपी होते तो शायद ये युवा उन्हें भी न पहचानते.
लेकिन मुद्दा ये है कि आपको पता न होने पर भी आपके अंदर ऐरोगेंस है. आपके अंदर फिर भी ख़ुद को सही दिखाने का घटिया साहस है.
वहां पर ख़ुद को करेक्ट करिए.
अपने अज्ञान को बेशर्म बनकर डिफेंड मत करिए.
दिल्ली के साकेत पुलिस थाने में बीते गुरुवार को दो महिला पत्रकारों शाहीन ख़ान और नफ़ीसा ख़ान को दिल्ली पुलिस ने ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से पहले तो हिरासत में लिया और फिर थाने में लाकर बेरहमी से पिटाई की
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया
ना ही महिला पत्रकारों ने अपनी पिटाई की जो FIR दर्ज करवाने के लिए शिकायत दी उसपर कोई कार्रवाई हुई
दिल्ली के आम लोग सोच लें कि जब पत्रकार के साथ ये हो सकता है तो बाकी का तो क्या ही कहें
और मेरे पत्रकार भाइयों और बहनों...एक होकर इस मामले में अपनी बहन बेटियों का साथ दो...क्योंकि इनकी जगह कल आप भी हो सकते हैं
"नहीं, sir plz सर, रजत के बिना मैं अधूरा हूँ। रजत आइये "
इरफ़ान के ये शब्द कृतज्ञता, संवेदनशीलता और रिश्तों की गरिमा का प्रमाण था। इरफ़ान के ये शब्द रजत के माध्यम से पत्रकारिता के हर उस ��ाध्यम का ऋणी भी महसूस कराते हैँ जो इरफ़ान जैसे संघर्षशील चेहरे को पहचानकर , उसे सुनकर और फिर देश के सामने रखते हैँ l
आवाज़ चाहे कितनी भी दमदार क्यों न हो, उसे दूर तक पहुँचाने के लिए एक सच्चे माध्यम की आवश्यकता होती है। इरफान की आवाज़ और रजत की पत्रकारिता दोनों ने मिलकर एक ऐसी कहानी लिखी, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है ।
नोट :- यह दृश्य तब का है जब राहुल गांधी इरफान से मिलने उनके घर प���ुँचे, तब एक दिल छू लेने वाला दृश्य देखने को मिला। जिस पत्रकार रजत पांडे ने अपनी रिपोर्टिंग के माध्यम से इरफान की आवाज़ को पूरे देश तक पहुँचाया, उन्हें ही प्रोटोकॉल के चलते इरफ़ान के घर के भीतर जाने से रोका जा रहा था।
जिसने अकेले ह��� रोक दिया एक हाथ से जुल्म का सफ़र
नादान हैं जो सोचते हैं होगा ‘उस’ पर धमकियों का असर
रिया के साथ पूरा देश है।
शुक्रिया रिया!
#Shukriya_Riya
#RiyaAhir
#MumbaiPtotest
#NEET
Attention Jamia NagarJust half an hour ago, while I was at Jamia Metro Station (Gate Number 2), two police officers without name badges were stopping young boys and writing their names on a "detained persons" form. By the time I arrived, they had already filled out a 1/4
persons list?" They simply replied, "You need to leave from here."The initial conversation is not captured in the video, but this is highly wrongful behavior. The protest site is far away from Jamia, and everything is completely peaceful in Jamia Nagar. 3/4
जंतर मंतर के आज के माहौल को इस वीडियो से मत समझना, ये तो सिर्फ़ टिप ऑफ आइसबर्ग है। आज यहां सांसद मार्च से पहले वाली रात से भी ज्यादा भीड़ हो गई है।
केरल हाउस से लेकर सीपी के इनर सर्किल तक, दूसरी तरफ ज��पथ रोड से पार्लियामेंट स्ट्रीट तक जगह जगह लोग हैं। इस बार खाना पानी इतना है कि प्रदर्शनकारी समझ मुझे 10 मिनट के अंदर चार लोगों ने घर का खाने से लेकर पिज्जा तक ऑफर कर दिया। लोग आने और जाने के लिए लाइनों में काफी देर तक इंतजार कर रहे हैं। गर्मी से बचने के लिए एक दूसरे को हवा करते लोग, खाना खिलाते लोग। ये आंदोलन अब और बड़ा हो रहा है।
- ये पत्रकार का न्यूट्रल नजरिया है।
#JantarMantar
Not asking you to do much, just giving you some free entertainment. Check out the comments on Dharmendra Pradhan's social media post. Spend 5 minutes there, you'll love it.
LoP Shri @RahulGandhi and @INCIndia continue to shamelessly exploit students as political tools to manufacture disruption during the Monsoon Session of Parliament.
Shri @RahulGandhi and @INCIndia chose to stage a dharna outside the Hon'ble Prime Minister's residence , causing inconvenience to the public and disregarding established security protocols.
Even after Government conveyed its readiness for a comprehensive discussion, the Congress chose political spectacle over democratic debate. Their objective was never solutions for students, it was disruption for political headlines
For Rahul Gandhi, this is not about students. This is about manufacturing confrontation after every genuine avenue for discussion has been opened.
Our Government remains 100% committed to discussing NEET and addressing every genuine concern of our youth on the floor of the House. The students of India deserve far better than being treated as props in a political campaign. They deserve certainty over chaos, solutions over slogans and responsibility over disruption.
We owe our students more than outrage. We owe them answers, reforms and accountability. That is exactly what our government remains committed to delivering.
@RailwaySeva@drmbsbner The way you people are working it's called 'topi transfer'. Treating passengers like 'keeda makoda'. No responsibility and zero accountability.
Hie @RailwaySeva
Train No. 14006, Lichchhvi Express, has been stopped at an unknown location for the last 1.5 hours without any update. This is very frustrating for passengers traveling on the train.
Kindly look into the matter and provide an update at the earliest.
@drmbsbner@RailwaySeva@srdombsbner Train No. 14006 Lichchhavi Express crossed Gyanpur Road at 4:37 AM and was expected to reach Varanasi by 6:00 AM. However, the train has been halted at Kachwa Road for the last 1.5 hours without any update.
This unexpected delay is causing great inconvenience to passengers.
This is Hossam’s team, and we are sharing his final message :
“If you’re reading this, it means I have been killed—most likely targeted—by the Israeli occupation forces. When this all began, I was only 21 years old—a college student with dreams like anyone else. For past 18 months, I have dedicated every moment of my life to my people. I documented the horrors in northern Gaza minute by minute, determined to show the world the truth they tried to bury. I slept on pavements, in schools, in tents—anywhere I could. Each day was a battle for survival. I endured hunger for months, yet I never left my people’s side.
By God, I fulfilled my duty as a journalist. I risked everything to report the truth, and now, I am finally at rest—something I haven’t known in the past 18 months . I did all this because I believe in the Palestinian cause. I believe this land is ours, and it has been the highest honor of my life to die defending it and serving its people.
I ask you now: do not stop speaking about Gaza. Do not let the world look away. Keep fighting, keep telling our stories—until Palestine is free.”
— For the last time, Hossam Shabat, from northern Gaza.