#कामिल मोमिन कौन है?
कहो:मेरी नमाज़,मेरी इबादत की सारी रस्में, मेरा जीना और मेरा मरना,सब कुछ अल्लाह, सारे जहानों के रब के लिये है।
[कुरआन 6:162]
हम कामिल मोमिन तब हो सकते है जब हर काम हम अल्लाह के लिए करने वाले हो। फिर उसमे इंसानी हर जज़्बा शामिल होगा। जैसे:दोस्ती,दुश्मनी,
सैयदना अबू-हुरैरा (रज़ि०) का बयान है कि रसूलुल्लाह ﷺ मस्जिद में बैठे थे, इतने में एक आदमी आया उसने नमाज़ पढ़ने के बाद आप ﷺ को सलाम किया। आप ﷺ ने सलाम का जवाब देकर फ़रमाया : जाओ नमाज़ पढ़ो तुमने नमाज़ नहीं पढ़ी। तो इस ने वापस हो कर पहले की तरह नमाज़ पढ़ी और लौटकर आप ﷺ को सलाम किया।आप ﷺ ने वालेकुमस्सलाम कहते हुए फ़रमाया: "जाओ नमाज़ पढ़ो,तुमने नमाज़ अदा नहीं की।" चुनांचे उसी तरह वो नमाज़ पढ़ता और लौटकर आप ﷺ को सलाम करता। और आप ﷺ यही फ़रमाते: "जाओ नमाज़ पढ़ो,तुमने अदा नहीं की। आख़िर उस शख़्स ने कहा:या रसूलुल्लाह ! क़सम है उस ज़ात की जिसने आप को बरहक़ बनाया है,मैं इस से ज़्यादा अच्छे तरीक़े के अलावा मज़ीद किसी चीज़ से अनजान हूँ। बराए-करम आप ही मुझे बता दीजिये? तो इरशाद हुआ:तुम जब नमाज़ के लिये खड़े हो तो पहले अल्लाहु-अकबर कहो और फिर जितना क़ुरआन करीम तुम आसानी के साथ पढ़ सकते हो वो पढ़ो उसके बाद रुकूअ करो और फिर आराम के साथ बिल्कुल सीधे खड़े हो जाओ और उस के बाद इत्मीनान से सजदा करो और फिर इत्मीनान के साथ क़अदा में बैठो और उसी तरह अपनी पूरी नमाज़ में किया करो❗️
📘(मुस्लिम:885)
#अदल_तौहीद
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
जो शख़्स इन में से लहसुन खाए या लहसुन प्याज़ और गन्दना खाए वो हमारी मस्जिदों में हमारे क़रीब न आए❗️
📘(तिर्मिज़ी:1806)
#अदल_तौहीद
सैयदना अबू-हुरैरा (रज़ि०) का बयान है कि रसूलुल्लाह ﷺ मस्जिद में बैठे थे, इतने में एक आदमी आया उसने नमाज़ पढ़ने के बाद आप ﷺ को सलाम किया। आप ﷺ ने सलाम का जवाब देकर फ़रमाया : जाओ नमाज़ पढ़ो तुमने नमाज़ नहीं पढ़ी। तो इस ने वापस हो कर पहले की तरह नमाज़ पढ़ी और लौटकर आप ﷺ को सलाम किया।आप ﷺ ने वालेकुमस्सलाम कहते हुए फ़रमाया: "जाओ नमाज़ पढ़ो,तुमने नमाज़ अदा नहीं की।" चुनांचे उसी तरह वो नमाज़ पढ़ता और लौटकर आप ﷺ को सलाम करता। और आप ﷺ यही फ़रमाते: "जाओ नमाज़ पढ़ो,तुमने अदा नहीं की। आख़िर उस शख़्स ने कहा:या रसूलुल्लाह ! क़सम है उस ज़ात की जिसने आप को बरहक़ बनाया है,मैं इस से ज़्यादा अच्छे तरीक़े के अलावा मज़ीद किसी चीज़ से अनजान हूँ। बराए-करम आप ही मुझे बता दीजिये? तो इरशाद हुआ:तुम जब नमाज़ के लिये खड़े हो तो पहले अल्लाहु-अकबर कहो और फिर जितना क़ुरआन करीम तुम आसानी के साथ पढ़ सकते हो वो पढ़ो उसके बाद रुकूअ करो और फिर आराम के साथ बिल्कुल सीधे खड़े हो जाओ और उस के बाद इत्मीनान से सजदा करो और फिर इत्मीनान के साथ क़अदा में बैठो और उसी तरह अपनी पूरी नमाज़ में किया करो❗️
📘(मुस्लिम:885)
सैयदना अबू-हुरैरा (रज़ि०) का बयान है कि रसूलुल्लाह ﷺ मस्जिद में बैठे थे, इतने में एक आदमी आया उसने नमाज़ पढ़ने के बाद आप ﷺ को सलाम किया। आप ﷺ ने सलाम का जवाब देकर फ़रमाया : जाओ नमाज़ पढ़ो तुमने नमाज़ नहीं पढ़ी। तो इस ने वापस हो कर पहले की तरह नमाज़ पढ़ी और लौटकर आप ﷺ को सलाम किया।आप ﷺ ने वालेकुमस्सलाम कहते हुए फ़रमाया: "जाओ नमाज़ पढ़ो,तुमने नमाज़ अदा नहीं की।" चुनांचे उसी तरह वो नमाज़ पढ़ता और लौटकर आप ﷺ को सलाम करता। और आप ﷺ यही फ़रमाते: "जाओ नमाज़ पढ़ो,तुमने अदा नहीं की। आख़िर उस शख़्स ने कहा:या रसूलुल्लाह ! क़सम है उस ज़ात की जिसने आप को बरहक़ बनाया है,मैं इस से ज़्यादा अच्छे तरीक़े के अलावा मज़ीद किसी चीज़ से अनजान हूँ। बराए-करम आप ही मुझे बता दीजिये? तो इरशाद हुआ:तुम जब नमाज़ के लिये खड़े हो तो पहले अल्लाहु-अकबर कहो और फिर जितना क़ुरआन करीम तुम आसानी के साथ पढ़ सकते हो वो पढ़ो उसके बाद रुकूअ करो और फिर आराम के साथ बिल्कुल सीधे खड़े हो जाओ और उस के बाद इत्मीनान से सजदा करो और फिर इत्मीनान के साथ क़अदा में बैठो और उसी तरह अपनी पूरी नमाज़ में किया करो❗️
📘(मुस्लिम:885)
#अदल_तौहीद
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
कि जिसे अल्लाह ने माल दिया और उसने उसकी ज़कात नहीं अदा की तो क़ियामत के दिन उसका माल बहुत ही ज़हरीले गंजे साँप की शक्ल इख़्तियार कर लेगा। उसकी आँखों के पास दो स्याह नुक़ते होंगे। जैसे साँप के होते हैं फिर वो साँप उसके दोनों जबड़ों से उसे पकड़ लेगा और कहेगा कि मैं तेरा माल और ख़ज़ाना हों। उसके बाद आप (सल्ल०) ने ये आयत पढ़ी ''और वो लोग ये गुमान न करें कि अल्लाह तआला ने उन्हें जो कुछ अपने फ़ज़ल से दिया है वो इस पर कंजूसी से काम लेते हैं कि उन का माल उन के लिये बेहतर है। बल्कि वो बुरा है जिस माल के मामले में उन्होंने कंजूसी किया है। क़ियामत में उसका तौक़ बना कर उन की गर्दन मैं डाला जाएगा❗️
📘(बुखारी:1403)
#अदल_तौहीद
मेरे आका, रहमतुल्लिल आलमीन हज़रत मुहम्मद ﷺ की शान में गुस्ताख़ी करने वाला कोई भी व्यक्ति कभी कामयाब नहीं हुआ। इतिहास गवाह है कि जो लोग नबी-ए-करीम ﷺ की तौहीन और दुश्मनी पर उतर आए, उनका अंजाम इज़्ज़त नहीं बल्कि रुसवाई, ज़िल्लत और बदनामी बना।
अबू लहब, जो नबी ﷺ का चाचा होने के बावजूद आपके सबसे बड़े दुश्मनों में था, उसने आपकी शान में गुस्ताख़ी की, आपका विरोध किया और लोगों को आपके खिलाफ भड़काया। उसका नाम आज भी इबरत की निशानी के तौर पर लिया जाता है। अल्लाह तआला ने उसकी नाकामी और बर्बादी को क़ुरआन में बयान किया:
"टूट गए अबू लहब के दोनों हाथ और वह खुद भी तबाह हो गया।"
(सूरह अल-मसद, 111:1)
इसलिए हर इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के रसूल ﷺ की अज़मत, अदब और सम्मान का ख़याल रखे। नबी-ए-करीम ﷺ की शान मुसलमानों के लिए उनकी जान, माल और दुनिया की हर चीज़ से बढ़कर है, और उनके बारे में अपमानजनक शब्द कहना न सिर्फ़ एक गंभीर गुनाह है बल्कि इंसान को दुनिया और आख़िरत की बर्बादी की ओर ले जा सकता है।
#ArrestNaziaElahi
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
अस्र के बाद कोई नमाज़ नहीं यहाँ तक कि सूरज डूब जाए और फ़ज्र के बाद कोई नमाज़ नहीं यहाँ तक कि सूरज निकल जाए❗️
📘(इब्नेमाज़ा:1249)
#अदल_तौहीद
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
किसी दुःख के आने पर कोई शख़्स हरगिज़ मौत की दुआ न करे, बल्कि चाहिये कि इस तरह कहे ( [اللهم أحيني ما كانت الحياة خيرا لي ، وتوفني إذا كانت الوفاة خيرا لي] ) ऐ अल्लाह! मुझे ज़िन्दा रख जब तक कि ज़िन्दगी मेरे लिये ख़ैर का बाइस हो और जब मौत मेरे लिये बेहतर हो तो मुझे वफ़ात दे दे❗️
📘(अबूदाऊद:3108)
#अदल_तौहीद
अल्लाह तआला का इर्शाद है उस दिन यानी क़ियामत के दिन कोई दोस्त किसी दोस्त को नहीं पूछेगा बावजूद इसके कि एक दूसरे को दिखा दिए जाएंगे, यानी एक दूसरे को देख रहे होंगे। उस रोज़ मुज़रिम इस बात की तमन्ना करेगा कि अज़ाब से छूटने के लिए अपने बेटों को, बीवी को, भाई को और ख़ानदान को जिन में वह रहता था और तमाम अले ज़मीन को अपने फ़िद्या में दे दे और यह फ़िद्या देकर अपने आपको छुड़ा ले। यह हरगिज़ नहीं होगा❗️
📘(मआरिज :10-15)
#अदल_तौहीद
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
जब तुम जनाज़ा (आता ) देखो तो खड़े हो जाओ यहाँ तक कि जनाज़ा तुम से आगे गुज़र जाए या (ज़मीन पर) रख दिया जाए❗️
📘(नसाई:1917)
#अदल_तौहीद
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
किसी दुःख के आने पर कोई शख़्स हरगिज़ मौत की दुआ न करे, बल्कि चाहिये कि इस तरह कहे ( [اللهم أحيني ما كانت الحياة خيرا لي ، وتوفني إذا كانت الوفاة خيرا لي] ) ऐ अल्लाह! मुझे ज़िन्दा रख जब तक कि ज़िन्दगी मेरे लिये ख़ैर का बाइस हो और जब मौत मेरे लिये बेहतर हो तो मुझे वफ़ात दे दे❗️
📘(अबूदाऊद:3108)
#अदल_तौहीद
#क़ाबिल_और_हाबिल_का_वाक्य!
क़ाबिल और हाबिल का किस्सा अल्लाह तआला ने कुरान शरीफ में इस तरह बयान किया है:
क़ुरान पाक में बयान:
और (ऐ मुहम्मद!) उनको आदम अलैहिस्सलाम के दो बेटों (हाबिल और क़ाबिल) के हालात, जो (बिल्कुल) सच्चे (हैं), पढ़कर सुना दो कि जब उन दोनों ने (ख़ुदा की जनाब में) कुछ नज़राने पेश किए, तो एक का नज़राना तो क़ुबूल हो गया और दूसरे का नहीं हुआ। (तब क़ाबिल हाबिल से) कहने लगा कि "मैं तुझे क़त्ल कर दूँगा।" उसने कहा कि "ख़ुदा तो परहेज़गारों ही के (नज़राने) क़ुबूल फ़रमाया करता है।" और "अगर तू मुझे क़त्ल करने के लिए मुझ पर हाथ चलाएगा, तो मैं तुझको क़त्ल करने के लिए तुझ पर हाथ नहीं चलाऊँगा। मुझे तो ख़ुदाए रब्बुल आलमीन से डर लगता है।" "मैं चाहता हूँ कि तू अपने गुनाह में भी माख़ूज़ हो और मेरे गुनाह में भी, फिर (दोज़ख़ वालों के) गिरोह में हो और ज़ालिमों की यही सज़ा है।"
मगर उसके नफ़्स ने उसको भाई के क़त्ल ही की तरग़ीब दी, तो उसने उसे क़त्ल कर दिया और नुक़सान उठाने वालों में हो गया। अब ख़ुदा ने एक कौवे को भेजा, जो ज़मीन खोदने लगा, ताकि उसे दिखाए कि अपने भाई की लाश को कैसे छिपाए। (क़ाबिल) कहने लगा, "हाय! मुझसे इतना भी न हो सका कि इस कौवे के बराबर होता कि अपने भाई की लाश छिपा देता।" फिर वह पछताया। (सूरह मायदा: 27-31)
इमामों के बयानात की रोशनी में (तफ़सीली :
अल-सुद्दी, इब्न अब्बास, और कई सहाबा-ए-किराम बयान करते हैं कि जब आदम अलैहिस्सलाम की औलाद में نسل بڑھنے کا سلسلہ शुरू हुआ, तो उन्होंने यह नियम रखा कि उनका हर बेटा अपने बाद पैदा होने वाले भाई की बहन से निकाह करे। यह नियम अल्लाह के हुक्म पर था।
निकाह का मसला:
क़ाबिल, जो हाबिल से बड़ा था, को हुक्म दिया गया कि वह अपने बाद पैदा होने वाले भाई हाबिल की बहन से निकाह करे, और हाबिल, क़ाबिल की बहन (जो बहुत खूबसूरत थी) को अपनी बीबी बनाए।
लेकिन क़ाबिल जीत पर अड़ गया और उसने अपनी खूबसूरत बहन की शादी हाबिल से करने से साफ़ इनकार कर दिया।
क़ाबिल ने हाबिल से यहाँ तक कहा कि अगर वह उसकी बहन से शादी पर ज़ोर देगा, तो वह उसे क़त्ल कर देगा।
क़ुर्बानी का हुक्म:
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने दोनों को हुक्म दिया कि वे खुदाए क़ुद्दूस के हुज़ूर क़ुर्बानी (नज़राना) पेश करें, और जिसकी क़ुर्बानी क़ुबूल हो जाएगी, उसी की बात मानी जाएगी।
आदम अलैहिस्सलाम हज के लिए चले गए और अपने बेटों से एक-दूसरे की संपत्ति की खयाल करने को कहा। हाबिल तैयार हो गया, जबकि क़ाबिल ने इससे भी इनकार कर दिया।
क़ाबिल के पास खेती की ज़मीन थी, जबकि हाबिल के पास ज़्यादा भेड़-बकरियाँ थीं।
क़ुर्बानी की क़ुबूलियत:
जब दोनों भाइयों ने अपनी-अपनी क़ुर्बानी एक जगह रखी, तो आसमान से बिजली की तरह एक शोल आया और हाबिल की क़ुर्बानी को उठा ले गया (अर्थात क़ुबूल हो गई)।
क़ाबिल की क़ुर्बानी वहीं मौजूद रही यानी नाक़ाबिल-ए-क़ुबूल ठहरी)।
यह देखकर क़ाबिल भड़क गया। हाबिल ने उसे समझाया कि अल्लाह की बारगाह में नज़राने की क़ुबूलियत की शर्त सिर्फ़ पेश करने वाले की परहेज़गारी सच्चाई) होती है।
पहला क़त्ल:
हाबिल की यह बात सुनकर क़ाबिल और ग़ुस्से में आ गया, और उसने अपने भाई हाबिल को क़त्ल कर दिया।
कौवे का सबक़:
इसके बाद, जैसा कि क़ुरान में फ़रमाया गया है, अल्लाह के हुक्म से एक कौवा वहाँ आया और ज़मीन खोदने लगा, जिससे क़ाबिल को यह इशारा मिला कि वह हाबिल की लाश को ज़मीन में कैसे छिपाए।
क़ाबिल ने पछताते हुए कहा कि वह इतना भी अक़्लमंद न हो सका कि इस कौवे की तरह अपने भाई की लाश को छिपा पाता।
फिर उसने ज़मीन खोदकर हाबिल की लाश को दफ़न कर दिया।
इतिहासकारों का इस बात पर इत्तिफ़ाक़ है कि यह ज़मीन पर इंसानी नस्ल का पहला क़त्ल था।
स्रोत: अलबिदाया वन्नहाया, जिल्द अव्वल, 140
यह वाक्य हमें अल्लाह के डर (تقوى) और सच्चाई की अहमियत सिखाता है, और यह बताता है कि लालच और حسد इंसान को तबाही की तरफ ले जाते हैं।
#अदल_तौहीद
रसूलुल्लाह ﷺ जब नमाज़ के लिये खड़े होते तो खड़े होते हुए तकबीर कहते, फिर रुकूअ करते हुए तकबीर कहते, फिर जब रुकूअ से कमर उठाते तो "समिअल्लाहु-लिमन हमिदा" कहते, फिर क़ियाम की हालत में "रब्बना-व-लकल-हम्द" कहते, फिर जब सजदा करने के लिये झुकते तो तकबीर कहते, फिर जब अपना सिर उठाते तो तकबीर कहते, फिर (दूसरा) सजदा करते वक़्त तकबीर कहते, फिर जब (सजदे से) अपना सिर उठाते तो तकबीर कहते। आप पूरी नमाज़ में इसी तरह करते यहाँ तक कि उसको मुकम्मल कर लेते और जब दो रकअतों से बैठने के बाद उठते तो (उस वक़्त भी) तकबीर कहते❗️
📘(मुस्लिम:868)
#अदल_तौहीद
सऊदी अरब की 15 वर्षीय लड़की थबिया अल-शहरानी को अपने इलाके से अलग-अलग तरह के पत्थर इकट्ठा करने का शौक था। वर्ष 2014 में उसने 705 पत्थर जमा किए, जिनकी जांच के दौरान पुरातत्व विशेषज्ञों ने पाया कि उनमें से 19 पत्थर अरब प्रायद्वीप की प्राचीन सभ्यताओं से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष हैं। थबिया ने ये सभी पत्थर अधिकारियों को सौंप दिए, जिसके बाद सऊदी हेरिटेज कमीशन ने उन्हें राष्ट्रीय धरोहर की सूची में शामिल कर राष्ट्रीय संग्रहालय में संरक्षित किया और थबिया को सम्मानित भी किया गया।
इसी क्रम में सऊदी हेरिटेज कमीशन ने हाल ही में मदीना मुनव्वरा के अल-महद ज़िले में पुरातात्विक सर्वेक्षण का दूसरा चरण पूरा किया। इस सर्वेक्षण में कुल 1774 ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए, जिनमें 461 इस्लामी शिलालेख, 34 समूदी शिलालेख, 1259 रॉक आर्ट पैनल, 11 पत्थर की संरचनाएं, 3 ऐतिहासिक महल, 2 प्राचीन काफिला मार्ग और 4 पुराने कुएं शामिल हैं।
इन खोजों में सबसे महत्वपूर्ण एक चट्टान पर उकेरा गया लगभग 1400 वर्ष पुराना शिलालेख माना जा रहा है, जिसमें इस्लाम के दूसरे खलीफा हज़रत उमर इब्न अल-खत्ताब (रज़ि.) का उल्लेख मिलता है। शिलालेख में लिखा है, “अल्लाह दुनिया और आख़िरत में उमर इब्न अल-खत्ताब का संरक्षक है। ला इलाहा इल्लल्लाह।” यह लेखन शुरुआती इस्लामी दौर की प्राचीन हिजाज़ी लिपि में दर्ज है, जिसे अरबी भाषा के सबसे पुराने लिखित रूपों में गिना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह खोज केवल एक ऐतिहासिक नाम मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस दौर की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को भी दर्शाती है। इसी क्षेत्र में इस्लाम-पूर्व काल के समूदी शिलालेख भी मिले हैं, इसलिए इतिहासकार इसे इस्लाम-पूर्व अरब और प्रारंभिक इस्लामी युग के बीच एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कड़ी मान रहे हैं। सऊदी हेरिटेज कमीशन ने इन खोजों को इस्लामी इतिहास की एक खुली खिड़की बताते हुए इन्हें क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को समझने में बेहद महत्वपूर्ण करार दिया है।
#अदल_तौहीद
रसूल-अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
सबसे बेहतर दिन जिस में सूरज निकला जुमा का दिन है। उसी दिन आदम को पैदा किया गया उसी दिन उन्हें जन्नत में दाख़िल किया गया उसी दिन उन्हें जन्नत से निकाला गया और क़ियामत भी उसी दिन क़ायम होगी❗️
📘(तिर्मिज़ी:488)
#अदल_तौहीद
रसूलअल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
जो भी शख़्स जुमे के दिन इस तरह पाकीज़गी करे जिस तरह उसे हुक्म दिया गया है फिर अपने घर से निकले यहाँ तक कि जुमे में हाज़िर हो और ख़ामोश रहे यहाँ तक कि नमाज़ पूरी करे तो ये पिछले जुमे से अब तक होने वाले गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाएगा❗️
📘(नसाई:1404)