कुछ मान्यताओं के अनुसार, नाभि में तेल लगाने से आँखों की जलन और सूखापन दूर हो सकता है, और बालों का स्वास्थ्य भी बेहतर हो सकता है।
कौन सा तेल सबसे अच्छा है? यह आपकी समस्या पर निर्भर करता है:
*रूखी त्वचा और फटे होंठों के लिए:*
नारियल का तेल, बादाम का तेल या देसी घी।
माना जाता है कि नाभि का संबंध पेट से जुड़ी नसों से होता है। इसलिए, यहाँ तेल लगाने से पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।कई महिलाएं पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन से राहत पाने के लिए नाभि में तेल लगाती हैं।
नाभि में तेल लगाना एक बहुत ही पुराना और पारंपरिक तरीका है, खासकर आयुर्वेद में इसे बहुत महत्व दिया गया है।
नाभि को हमारे शरीर का केंद्र बिंदु माना जाता है, और ऐसा माना जाता है कि यहाँ तेल लगाने से शरीर के कई हिस्सों को फायदा होता है।नाभि में तेल लगाने से त्वचा को नमी मिलती है,
सुबह-शाम हल्का गुनगुना पानी लाभकारी है – शरीर को शुद्ध करता है।
तनाव, गुस्से या भावावेश में पानी न पिएँ – यह पाचन व मानसिक संतुलन को बिगाड़ता है।
*Dr. (Vaidhya) Deepak Kumar*
*Adarsh Ayurvedic Pharmacy*
*Kankhal Hardwar*
*Website:* - https://t.co/jFoGZrqyXm
*9897902760*
भोजन के साथ सीमित मात्रा में पिएँ –अधिक पानी पाचन अग्नि को कमजोर करता है।
भोजन के तुरंत बाद पानी न पिएँ –थोड़ी देर बाद ही लें।
स्वच्छ व सुरक्षित बर्तन में संग्रह करें –तांबे/मिट्टी/काँच के बर्तन उत्तम हैं।
मौसम के अनुसार पानी की मात्रा बदलें–गर्मियों में अधिक, सर्दियों में कम।
प्यास लगे तभी पानी पिएँ – जबरदस्ती अधिक पानी न पिएँ।
शांत मुद्रा में बैठकर पिएँ – खड़े होकर या चलते-फिरते पानी न पिएँ।
धीरे-धीरे घूंट-घूंट करके पिएँ – तेज़ी से एक साथ न गटकें।
गुनगुना या सामान्य तापमान का पानी पिएँ – बहुत ठंडा पानी हानिकारक है।
महर्षि चरक स्वास्थ्य को परिभाषित करते हुए कहते हैं कि व्यक्ति के
दोष (वात, पित्त, कफ) संतुलित हों
अग्नि (पाचन शक्ति) संतुलित हो
धातु (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र) सम् स्थिति में हों
मल (मूत्र, स्वेद, मल) की क्रिया संतुलित हो उसका आत्मा, इन्द्रियाँ और मन प्रसन्न हों,
*“स्वस्थ” होने का आयुर्वेदिक परिभाषा*
*“समदोषः समाग्निश्च समधातु मलक्रियः।*
*प्रसन्नात्मेन्द्रियमनः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥”*
यह आयुर्वेद का मूल वाक्य है, जो महर्षि चरक द्वारा रचित ‘चरक संहिता’ के सूत्रस्थान 9/4 से उद्धृत है।
अगर किसी पुरुष को अपने निजी अंग में कमजोरी महसूस हो रही है तो आयुर्वेद में ऐसे कई उपाय हैं, जो बिना किसी हानि के शरीर को अंदर से मज़बूत बना सकते हैं। आप नवशक्ति वटी, ओजशक्ति वटी एवं वाइल्ड यूनिकॉम वटी का नियमित रूप से सेवन करेंगे तो आपको इस प्रकार की बीमारी से निजात मिल जाएगी
अगर किसी पुरुष को अपने निजी अंग में कमजोरी महसूस हो रही है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। रोज़ाना घी, दूध, मुनक्का, बादाम, और तुलसी जैसी चीज़ों का सेवन करें। साथ ही सुबह की धूप, योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में ज़रूर शामिल करें।
शिलाजीत हिमालय से प्राप्त खनिज योग है जो शरीर को मज़बूती और सहनशक्ति प्रदान करता है। शुद्ध शिलाजीत नियमित रूप से लेने से पुरुषों की गुप्त कमजोरी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
ये दोनों जड़ी-बूटियाँ पुरुषों की आंतरिक शक्ति को संतुलित करती हैं और शरीर को नई स्फूर्ति देती हैं।
अश्वगंधा एक प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधि है जो शरीर की अंदरूनी ताकत को बढ़ाती है। यह मानसिक तनाव को कम करती है, नींद को सुधारती है और संपूर्ण शरीर में नई ऊर्जा भरती है।
कौंच बीज पुरुषों की शक्ति बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। यह शरीर में जोश बनाए रखने में सहायक होता है।
*त्रिकटु + शहद + नींबू*
वजन घटाने और डिटॉक्स के लिए
त्रिकटु + नींबू रस + शहद गुनगुने पानी में
सुबह खाली पेट पिएं।
मात्रा: 1/4 से 1/2 चम्मच, दिन में 1–2 बार
समय: सुबह खाली पेट या भोजन से पहले
पित्त प्रकृति वाले लोग, गर्भवती महिलाएं को बिना वैद्य की सलाह के न लें।
*त्रिकटु + तुलसी*
खांसी-जुकाम और अस्थमा के लिए
तुलसी की पत्तियां उबालकर काढ़ा बनाएं, उसमें त्रिकटु + शहद मिलाएं।
सुबह-शाम लें।
*त्रिकटु + हल्दी*
जोड़ों के दर्द और सूजन के लिए
1/4 चम्मच त्रिकटु + 1/2 चम्मच हल्दी दूध/पानी में
रात को लें।
*त्रिकटु + गिलोय*
इम्यूनिटी और बुखार के लिए
1/4 चम्मच त्रिकटु + 1 चम्मच गिलोय रस + शहद
सुबह खाली पेट लें।
*त्रिकटु + अश्वगंधा*
कमजोरी और तनाव दूर करने के लिए
1/4 चम्मच त्रिकटु + 1/2 चम्मच अश्वगंधा गर्म दूध में
रात को सोने से पहले पिएं।
त्रिकटु का मतलब ही है – तीन तीखे मसाले।
सोंठ (सूखी अदरक)
काली मिर्च
पिप्पली (लंबी मिर्च)
*त्रिकटु + त्रिफला*
कब्ज, पाचन और डिटॉक्स के लिए
1/4 चम्मच त्रिकटु + 1/2 चम्मच त्रिफला गुनगुने पानी में
रात को सोने से पहले लें।
*लगातार सिर दर्द या माइग्रेन (Chronic Inflammation & Poor Sleep)*
लगातार सिर दर्द रहना या माइग्रेन का बार-बार आना शरीर में systemic inflammation, poor sleep cycle, और तनाव का नतीजा हो सकता है। ये शरीर का साफ इशारा है कि उसे आराम, सही पोषण और स्ट्रेस मैनेजमेंट की ज़रूरत है।
*बाल झड़ना या सफेद होना (Nutritional Deficiencies & Oxidative Stress)*
बाल झड़ना और सफेद होना केवल उम्र की निशानी नहीं है। ये शरीर में zinc, biotin, iron, और antioxidants की कमी और free radicals की अधिकता का नतीजा हो सकता है। मतलब, शरीर अंदर से कमजोर हो चुका है।
*भूख न लगना या बहुत ज्यादा लगना (Hormonal Imbalance)*
Leptin और Ghrelin ये दो हार्मोन आपके भूख के सिग्नल कंट्रोल करते हैं। नींद की कमी, प्रोसेस्ड फूड और तनाव से इन हार्मोनों का संतुलन बिगड़ जाता है। नतीजा-कभी भूख बिल्कुल नहीं लगती और कभी ओवरईटिंग होती है।
* रोज़ मूड चिड़चिड़ा रहना (Serotonin Imbalance)*
हर छोटी बात पर गुस्सा आना या मन उदास रहना सिर्फ मानसिक तनाव नहीं है, ये serotonin नामक हैप्पी हार्मोन की कमी भी हो सकती है। serotonin का 90% हिस्सा आपकी आंतों में बनता है, इसका अर्थ ये है कि मानसिक सेहत सीधे पाचन से जुड़ी है।