@oprajbhar इस बंद कमरे में चंद पंचायत सहायकों को बुलाकर बोले गए ...ये सारे शब्द याद रखे जाएंगे!
क्या किसी धरना-प्रदर्शन स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना गुनाह है?
जब धरना स्थल पर आपके अधिकारी और आपके PA तक पंचायत सहायकों से बात करने को तैयार नहीं होते, और अपनी पीड़ा लेकर बैठे कर्मचारियों के समर्थन में विपक्षी दल लोकतांत्रिक तरीके से सामने आते हैं, तो पंचायत सहायकों की जायज़ मांगों को राजनीति का नाम क्यों दिया जाता है?
पंचायत सहायक न्यूनतम वेतनमान की मांग कर रहा है, लेकिन मंत्री जी को उसमें ₹1 लाख सुनाई दे रहा है।
क्या उत्तर प्रदेश में न्यूनतम वेतनमान की मांग करना भी अब अपराध है?
जबकि माननीय मुख्यमंत्री जी @myogiadityanath स्वयं कर्मचारियों को न्यूनतम ₹16,000 से ₹20,000 तक वेतन देने की बात कहते रहे हैं, तो पंचायत सहायकों की न्यूनतम वेतनमान की मांग पर इतनी आपत्ति क्यों?
और हां, यदि एक-एक बिंदु पर चर्चा करने का साहस और विश्वास है, तो मीडिया के सामने आइए।
आप अपना पक्ष रखिए, हम अपना पक्ष रखेंगे। बात होगी, तथ्यों के साथ होगी।
चंद लोगों को बुलाकर दी गई धमकियां बेहद निंदनीय हैं। इन घटनाओं को भी याद रखा जाएगा।
याद रखिए ये वही 57000 युवा हैं जिन्होंने एक स्थान पर 9 रातें गुजारीं, शासन-प्रशासन की प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना किया और अपनी मांगों के लिए संघर्ष किया। इतना दर्द सहने के बाद ये युवा अब अपने अधिकारों की आवाज़ दबने नहीं देंगे।
एक तरफ मीडिया के सामने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए जाते हैं, और दूसरी तरफ बंद कमरे में पंचायत सहायकों को धमकाने की बातें सामने आती हैं। यह विरोधाभास भी जनता के सामने है।
57,000 पंचायतों से जुड़े पंचायत सहायक अपनी मांगों और सम्मान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
हम भूखे रह लेंगे, संघर्ष कर लेंगे, लेकिन अपनी आवाज़ और अपने अधिकारों की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।
वेतनमान लेके रहेंगे आपकी राजगद्दी परमानेंट नहीं है ये दिमाग से निकाल दीजिए सारे अपमानो का हिसाब होगा।
दोहरा चरित्र याद रहेगा
हम सब दोबारा आएंगे।
संघर्ष जारी रहेगा।
और आपकी विदाई करेंगे
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
समस्त पंचायत सहायक इस वीडियो के शब्दों को याद रखे यही इनकी सच्चाई है !
और मीडिया के सामने ये पंचायत सहायकों के चहेते बनने आ जाते और अधिकारियों निदेशक @DirectorUPPR और प्रमुख सचिव को दोष देते हैं।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
उत्तर प्रदेश में एक मंत्री जी हैं जिनको पंचायत विभाग मिला है पर इनको अपने विभाग से कोई मतलब ही नहीं है,
उनके विभाग के ही कर्मचारी पिछले लगभग दो हफ्तों से धरना दे रहे हैं पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं,
उनसे सिर्फ ₹6000 में बधुआ मजदूर की तरह पूरे महीने भर काम कराया जाता है,
आखिरकार ₹200 दिन में कौन काम करता है,
उनकी मांग है कि उनकी सैलरी बढ़ाई जानी चाहिए जो की जायज है।
लखनऊ : लखनऊ के इको गार्डन में धरने का मामला
➡आप सांसद संजय सिंह धरना स्थल पहुंचे
➡8 दिनों से धरने पर बैठे हैं पंचायत सहायक
➡धरने को समर्थन देने पहुंचे सांसद संजय सिंह
#Lucknow#SanjaySingh#PanchayatSahayak@SanjayAzadSln
UP के 57 हज़ार पंचायत सहायकों के संघर्ष को समर्थन देने अपना दल की नेता पल्ल्वी पटेल भी संघर्षरत पंचायत सहायकों के बीच पहुँचीं,
और सरकार से इनकी सैलरी 6 हज़ार से बढ़ाका
तीस हज़ार करने की मांग की,
"उत्तर प्रदेश के लगभग 58 हजार पंचायत सहायक अपना मानदेय बढ़ाकर उसे सम्मानजनक करने तथा संविदा व्यवस्था के बजाय स्थायीकरण आदि अपनी मांगों के समर्थन में, वे पिछले कुछ दिनों से राजधानी लखनऊ में इको गार्डन के पास आंदोलनरत हैं। सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार अवश्य करे तो ये बेहतर होगा।" बहन @Mayawati जी बीएसपी सुप्रीमो
आज लखनऊ में पंचायत सहायकों के धरने में संजय सिंह जी ने उनके मानदेय को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और कहा आगे बीजेपी के नेता के बच्चे 6000₹ में ग्राम पंचायत में कार्य करेंगे..
और उन्होंने कहा आगे आपके ऊपर मुकदमे होते हैं तो डरने की ज़रूरत नहीं है, आप अपने हक पर अड़े रहिये ..
आज तो dpro साहब लोग के ऊपर प्रेशर आने लगे उन्हें लखनऊ आकर अपने पंचायत सहायकों को वापस चलने के लिए बोलने लगे।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष #पंचायत_सहायको_की_मांगे_पूरी_करो #पंचायत_सहायक_का_मानदेय_बढ़ाओ
उत्तर प्रदेश की सरकार को क्या हफ्ते भर से धरने पर बैठे पंचायत सहायक साथियों का दर्द दिखाई नहीं दे रहा है।
कहां है पंचायती राज मंत्री, कहां है उत्तर प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारी और मंत्री।
इस तरह से छोटे अधिकारियों को भेज कर उत्तर प्रदेश सरकार क्या यह साबित करना चाहती है कि उन्हें पंचायत सहायक साथियों और उनकी मांगों से कोई मतलब नहीं है।
@myogiadityanath@panchayatirajup@UPGovt@yadavakhilesh
#PanchayatSahayakUP
#पंचायत_सहायक_यूपी
#WATCH लखनऊ (उत्तर प्रदेश): AAP सांसद संजय सिंह ने पंचायत सहायक कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन पर कहा,"आठ दिनों से पंचायत सहायक जो हैं जिनकी संख्या 58 हजार है वो पंचायत सहायक यहां पर आंदोलन पर बैठे हुए हैं। उनकी बात कोई सुनने वाला नहीं है। सरकार को इनकी मांग सुननी चाहिए और तीस हज़ार रुपये जो न्यूनतम मानदेय की ये लोग मांग कर रहे हैं उसको पूरा करना चाहिए। 6 हज़ार रुपये तो मतलब इनके साथ शोषण है मैं यही कह सकता हूं।"
2029 तक NDA-शासित 21 राज्यों में UCC लागू होने पर उन्होंने कहा," वो इसी सब में तो उलझा के रखा हुए हैं। रोजगार की स्कूल की अस्पताल की तरक्की की बात ही नहीं करते हैं।"
यूपी में 58,000 पंचायत सहायक पिछले कई वर्षों से मात्र 6,000 रुपये प्रति माह में काम कर रहे हैं। 6,000 रुपये में कोई नौजवान अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे कर सकता है? इनकी मांग है कि मानदेय 30,000 रुपये प्रति माह किया जाए। @myogiadityanath जी को इनकी मांगें तुरंत मान लेनी चाहिए। @AamAadmiParty सड़क से संसद तक पंचायत सहायकों की मांगों का समर्थन करती है।
उत्तर प्रदेश में लगातार धरनारद पंचायत सहायकों की मांग जायज है,
आप ऐसे बधुआ मजदूर की तरह उन्हें नहीं रख सकते हैं,
पंचायत सहायकों के सम्मान में उनकी सैलरी में तत्काल वृद्धि की जानी चाहिए,
सरकार को जल्द यह सुनिश्चित करना चाहिए।