@premkumarcbn01 वो आशाराम वाली बात यह थी कि कोई उनका भक्त आया था पूछने की मै इनको मानता था पर यह अब जेल चले गए लोग परेशान करते हैं तो क्या करूं वो उस बात का उत्तर दिया था जिसे aashram के चेलो ने अपने फायदे के लिए काट के इस्तेमाल कर लिया
स्वतंत्र भारद्वाज और गालीबाज़ ब्राह्मणों को देख कर लगता है ब्राह्मणों की ऐसी पीढ़ी तैयार करने वाले ही ब्राह्मणों के सबसे बड़े शत्रु हैं। ये सिर्फ 12 साल में हुआ परिवर्तन नहीं है, दशकों में पीढ़ियों के ब्रेनवाश का परिणाम है। खास बात ये है कि अधिकतर ब्राह्मण उसी तंत्र के समर्थ�� हैं जिसने उन्हें बर्बाद किया है। सत्ता के करीबी कुछ ब्राह्मणों को पद मिल जाने से या किसी संघी को वाइस चांसलर बना देने से ब्राह्मण समाज का कोई भला नहीं होता, आम ब्राह्मण को क्या पकड़ाया जा रहा इससे पता चलता है कि कैसे छले गए हैं पंडित जी। शिक्षा/रोजगार से दूर करके झंडा पकड़ाने वालों ने मूर्ख बनाया है ब्राह्मणों को।
आखिर पढ़ने लिखने वाले समाज के लड़के गुंडे कैसे बनने लगे, जुलूस में उन्मादी नारे कैसे लगाने लगे, इनको किसने विश्वास दिला दिया कि लोगों का सिर फोड़ने से वो राष्ट्र और सनातन धर्म की सेवा कर रहे हैं? इनके भीतर दूसरे धर्म के लिए इतनी नफरत कैसे भर गई? अपने से बड़े के ऊपर हाथ कैसे उठा लेते हैं ये और फिर इस नैतिक पतन पर गर्व भी करते हैं!
80 के दशक तक ब्राह्मण परिवारों में अपशब्द का प्रयोग तक करने की मनाही थी, चीं���ी तक मारना मना था, बड़ों को सम्मान देना अनिवार्य था चाहे किसी भी जाति/धर्म के हों,अध्ययन करना दायित्व था, जिसका पढ़ने लिखने में मन नहीं लगता था उसकी भर्त्सना होती थी परिवार में। अनैतिक कार्यों से दूर रहने का निर्देश था, पाप कर्मों से ब्राह्मणत्व का ह्रास होता है ऐसा बताया जाता था। हिंसक आचरण ब्राह्मण के लिए निषेध था। चार दशकों में ऐसा क्या हुआ कि ब्राह्मण लड़के सार्वजनिक मंच पर गाली देने लगे, बड़ों का सिर फोड़ने लगे, अपनी ही जाति के व्यक्ति को बदनाम करने लगे अगर वो उनके मनमाफिक नहीं बोल रहा!
ब्राह्मणों का बौद्धिक पतन तो दिल्ली सल्तनत काल और मुगल काल में भी नहीं हुआ, अंग्रेज भी नहीं कर पाए, स्वतंत्रता के बाद तो स्वर्णकाल ही था फिर ऐसे कब बन गए ब्राह्मण? स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करके देश को स्वतंत्र कराने वाले ब्राह्मण अब स्वतंत्र भारद्वाज कैसे देने लगे समाज को?
जवाब खोजिए। ज��सा बॉब डिलन का गाना है : उत्तर हवा में तैर रहा है। The answer my friend is blowing in the wind.
नीति आयोग ने सिफारिश की थी कि E 10 और E 20 पेट्रोल से चूंकि वाहन के माइलेज में कमी होगी अतः पेट्रोल पर टैक्स कम करके पेट्रोल को सस्ता किया जाए जिससे आम उपभोक्ता को लाभ हो।
लेकिन ���ोदी सरकार ने पेट्रोल पर टैक्स बिलकुल नहीं घटाया और पूरी सब्सिडी इथेनॉल निर्माता कंपनियों को दे दी।
आप जितने परत उघाड़ेंगे, इस सरकार की इथेनॉल नीति की बेशर्मी उतनी ही ज्यादा दिखती जाएगी।
समाजवादी पार्टी (सपा) के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा अभी हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गयी अभद्र, अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी व बयानबाज़ी आदि को लेकर हर तरफ उपजा भारी आक्रोश व उसकी तीव्र निन्दा स्वाभाविक ही है तथा इस विवाद के फलस्वरूप पुलिस द्वारा मुक़दमा दर्ज किये जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किन्तु संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले को लेकर ख़ामोशी से भी मामला और अधिक गंभीर होकर काफी तूल पकड़ता जा रहा है। स्थिति भी तनावपूर्ण होती जा रही है।
वैसे भी सपा प्रवक्ता के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के आदर-सम्मान व स्वाभिमान को जो ठेस पहुँची है तो उसको गंभीरता से लेते हुये सपा मुखिया को इसका तत्काल संज्ञान लेकर ब्राह्��ण समाज से छमा याचना व पश्चाताप कर लेना चाहिये तो यह संभवतः उचित होगा।
इसके अलावा, इस ताज़ा प्रकरण से लोगों की नज़र में यह भी साबित है कि सपा का ख़ासकर दलितों, अति-पिछड़ों व मुस्लिम समाज आदि की तरह ब्राह्मण समाज-विरोधी भी इनका जातिवादी चाल व चरित्र बदला नहीं है बल्कि और ज़्यादा गहरा ही हुआ है तथा इसके साथ ही, ब्राह्मण समाज के प्रति वर्तमान सरकार के रवैयों को ��ेकर भी जो ज़बरदस्त नाराज़गी इस समाज में देखने को मिल रही है वह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है,
जबकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. द्वारा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी व सरकार में भी भरपूर आदर-सम्मान देने के साथ-साथ हर स्तर पर उन्हें उचित भागीदारी भी दी गयी है अर्थात् बी.एस.पी. में यूज़ एण्ड थ्रो नहीं है बल्कि सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है।
I donated around 60 litres of breast milk to the government hospital in Hyderabad and Chennai during my first year of post partum!!
Why does it matter? Just 100ml of donor milk can feed a tiny 1kg baby for several days. This donation could potentially support dozens of infants in the NICU. Donating is safe, screened, and desperately needed. Many NICU babies don't have immediate access to their mother's own milk due to medical complications. Donor milk acts as a vital bridge, providing immunity and nutrition during those critical first days.
It serves as a bridge for mothers whose milk may be delayed due to stress, illness,malnutrition or premature birth.
Donor human milk is proven to significantly reduce the incidence of Necrotizing Enterocolitis (a life-threatening gut condition) in premature infants!!!
Check your local govt hospital to see how you can help! #MilkBank #SavingLives #MaternalHealth
अंग्रेजों ���े समय पिंडारी नाम का एक गैंग था। पिंडारी ठग थे लेकिन वो सिर्फ ठगते ही नहीं थे गला भी घोंट देते थे इसलिए उनका नाम फांसीगर पड़ा।
लॉर्ड हेस्टिंग्स ने जब पिंडारियों की लूट का अंत किया तो उनको देश के अलग अलग इलाकों में बसाया गया। एक शाखा गुजरात में भी बसाई गई। पिंडारियों की बाद की पीढ़ी ने क्या किया, ठगी बंद की या नहीं, आज के पिंडारी कैसे पहचानें ये वामपंथी इतिहासकारों ने नहीं लिखा।😎
ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगलवार ‘बड़ा मंगल’ की सभी भक्तों एवं देशवासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।
हनुमान जी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।
क्रोध करके लेटा तो जा सकता है, लेकिन सोया नहीं जा सकता। गुस्से में बिछौने पर पड़कर छटपटाते रहने से ज्यादा बड़ी कोई सजा नहीं होती।
~~पथ के दावेदार(उपन्यास)