देश का सबसे बड़ा मज़ाक देखिए -
एक तरफ़ लाखों B.Ed., D.El.Ed. और TET पास युवा भर्ती का इंतज़ार कर रहे हैं, दूसरी तरफ़ सरकारी स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं। कहीं बच्चे धरने पर हैं, तो कहीं चपरासी बच्चों को पढ़ाने पर मजबूर है।
अब यह साफ़ होता जा रहा है कि भाजपा सुनियोजित तरीके से सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को कमज़ोर करके बंद कराने की दिशा में बढ़ रही है, ताकि देश की वंचित और शोषित आबादी पढ़-लिख ही न पाए।
ट्रंप के दबाव में मोदी जी अमेरिका से भारी मात्रा में ethanol ख़रीद रहे हैं। ट्रंप की गुलामी ये कर रहे और गाड़ियां आम आदमी की ख़राब हो रही हैं।
आज हम 2 lakh से ज़्यादा petitions लेकर प्रधानमंत्री आवास जा रहे हैं उनसे निवेदन करने कि वो ऐसा न करें। हमारे साथ 100 ऐसे लोग हैं जिनकी गाड़ियां E20 ने खराब कर दीं। उम्मीद हैं प्रधानमंत्री जी जनता की आवाज़ ज़रूर सुनेंगे।
झारखंड के छात्रों ने पूरे आन्दोलन में इतना समझदारी का परिचय दिया है,
•न भद्दे कोई नारे
•न कोई गाली
•न क्रेडिट की भूख
•केवल मुद्दों पर बात
•मीडिया के सामने संवेदनशील शब्दों में बात रखना
•ऐसे आंदोलन से परिवर्तन की नदी बहती है
जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तब से शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं और विश्वविद्यालयी कैंपसों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। शिक्षा को स्वतंत्र और समावेशी बनाने के बजाय उसे एक ही रंग में रंगने की कोशिश ने संस्थानों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अनरजिस्टर्ड संघी समूहों और बाहरी हस्तक्षेप का प्रभाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। इससे शैक्षणिक माहौल, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों पर दबाव महसूस किया जा रहा है।
किसी एक व्यक्ति के पद छोड़ देने से व्यवस्था का चरित्र नहीं बदल जाता। अगर व्यवस्था की सोच और कार्यशैली वही रहे, तो बदलाव अधूरा ही रहता है। इसलिए यह केवल एक इस्तीफ़े की नहीं, बल्कि शिक्षा, समान अवसर और संस्थानों की स्वायत्तता की लड़ाई है।
यह संघर्ष लंबा है, लेकिन हमें विश्वास है कि हम सब मिलकर इसे पूरी मजबूती, धैर्य और लोकतांत्रिक तरीके से लड़ेंगे।
शायद नेहरू जी ने मिलाया होगा
अब कुछ नहीं होगा बात आगे बढ़ चुकी है
100% एथनॉल की फाइल पर साइन करते हुए खुशी किसको हो रही थी फिर ?
मुझे बहुत खुशी है कि मैंने फाइल साइन किया ऐसा कोन बोल रहा था?