D.El.Ed/BTC और B.Ed की पढ़ाई पर लाखों खर्च करो, और बदले में ज्ञान पाओ
“नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, रिक्शा चलाओ!”
‘येलो अंकल’ तो इस हुनर में पहले से ही माहिर हैं, अब अपने जोड़ीदार के साथ मिलकर रिक्शा चलाएँगे।
यूपी की जनता भी इस बार मन बना चुकी है—2027 में दोनों को सत्ता से छुट्टी देकर कहेगी,
“अब लड़का-बच्चा के साथ रहा देई!”
एयरपोर्ट के बाहर ऐसे हाथ हिला रहे हैं जैसे कोई जंग जीतकर आए हों! जनता बेवकूफ नहीं है श्रीमान ये हीरो वाली अदाएं बंद कीजिए। लोकतंत्र का सम्मान नहीं कर पाए, तो इतिहास आपको हीरो नहीं, लोकतंत्र का विलेन ही याद रखेगा। #GyaneshKumar#Democracy
सवाल करो “राजनीति करत हउ?”
जवाब माँगो “कउन पार्टी के हउ?”
और थोड़ा पूछ लो तो “सपा में चल गइलऽ का?”
सत्ता को ये रवैया बदलना होगा।
जनता के सवालों पर ठप्पा नहीं, जवाब चाहिए।
क्योंकि लोकतंत्र में जनता को चुप कराने की कोशिश लंबी नहीं चलती
रवैया नहीं बदला, तो जनता बदल देती है।
अरे बाप रे! ई त ‘स्मार्ट सिटी’ ना, सीधे ‘वॉटर पार्क प्रोजेक्ट’ निकलल! 🏊♂️
विकास के ढिंढोरा पीटने वाले लोग जरा गोरखपुर जंक्शन का हाल भी देख लें!
थोड़ा सा पानी गिरा नहीं कि पूरा इलाका जलमग्न!
अब यात्री ट्रेन पकड़ने जाएँ तो तैरकर जाएँ या नाव बुक करें? 🚣♂️
जनता टैक्स सड़क और जलनिकासी के लिए देती है, बोटिंग क्लब के लिए नहीं! 😂
#जलमग्न_गोरखपुर_उप्र
लोग मालदीव जाने का सपना देखते हैं, और हमारे सांसद जी ने पूरा गोरखपुर ही मालदीव बना दिया!
अब गाड़ियों की जगह नांव का टिकट कटेगा। विकास की गंगा नहीं, जलभराव का समंदर बह रहा है! 😉
इमरान मसूद जी, दूसरों को ‘नाचने-गाने वालों’ का ताना देने से पहले अपनी सियासी कदमताल भी याद कर लीजिए।
नाच तो आपने भी लगभग हर पार्टी के मंच पर लिया है कभी सपा, कभी बसपा और अब कांग्रेस।
दूसरों को नाचने-गाने वाला कहने से पहले कभी खुद को भी आईने में देख लिया कीजिए। https://t.co/dxIJHaNNLM
CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगा है, 48 घंटे का वक्त दिया है।
लेकिन सवाल है इस्तीफा हो जाएगा तो क्या चुनावी व्यवस्था ठीक हो जाएगी?
ज्ञानेश कुमार T.N. Seshan से बहुत कुछ सीख सकते थे।
Seshan ने दिखाया था कि चुनाव आयोग की ताकत सिर्फ पद में नहीं, बल्कि निष्पक्षता, स्वतंत्रता और अपने फैसलों पर मजबूती से कायम रहने में होती है।
सवाल सिर्फ कुर्सी का नहीं है, सवाल उस भरोसे का है जिस पर चुनाव टिका है।
यूपी की सियासत का पूरा मिज़ाज बदल चुका है।
कुर्मी, मौर्य-कुशवाहा, पासी, पाल समेत कई पिछड़े-दलित समूहों में बदलते रुझान, और मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के साथ।
पुराना सामाजिक गणित हिल चुका है।
अब यूपी में सियासत का नया समीकरण आकार ले रहा है।
PDA का सामाजिक आधार 2027 के लिए लामबंद हो रहा है और अखिलेश यादव की ओर उम्मीद से देख रहा है।
यह सिर्फ समर्थन नहीं, अपनी हिस्सेदारी, सम्मान और प्रतिनिधित्व की मजबूत आकांक्षा है।
अखिलेश यादव के नेतृत्व में यह एकजुटता अब जमीन पर अपनी ताकत दिखा रही है।
2027 में PDA की यह एकजुटता समाजवादी राजनीति की बड़ी ताकत बनकर उभरेगी।
अगर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, तो शुरुआत सवालों से नहीं जवाबदेही से होनी चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग अपनी जगह है, लेकिन बड़ा सवाल इससे आगे का है
क्या सिर्फ चेहरा बदलने से संस्था पर उठे सवाल खत्म हो जाएंगे?
चुनाव आयोग कोई सामान्य सरकारी दफ्तर नहीं है।
यह वह संस्था है जिसके फैसलों पर देश के लोकतांत्रिक भरोसे की नींव टिकी है।
इसलिए सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं, जवाबदेही की पूरी व्यवस्था का है।