हर रोज़ जब सूरज उगता है,
मैं नयी उम्मीदों के साथ उठता हूँ।
अपनों का ध्यान रखने वालों के लिए नहीं,
खुद को बेचैन रखने वालों के लिए ज़िंदा हूँ।https://t.co/V2sbzw2TMR
Proud Moments for India 🇮🇳 as we are hosting the ‘World Para Athletics Championships 2025’ in New Delhi 🫡
🌟 Wishing all the incredible athletes , participating from 104 countries; competing in the World Para Athletics Championships 2025 the very best 🌟
May you break limits, chase personal bests,
and shine on the global stage 💪
Your dedication, hard work, and spirit inspire us all.
India is cheering for you 🇮🇳✨
#TeamIndia #ParaAthletics
#ChasingExcellence
#WorldParaAthleticsChampionships
ए सादगी
तू वही भाषा है
जिसमें ईश्वर मनुष्यों से बात करता है।
न अलंकार, न आडंबर—
बस एक निर्मल धड़कन।
तेरे होने से ही
भक्ति प्रार्थना में बदलती है,
और इंसान
अपने भीतर का आकाश देख पाता है।
सादगी—
तू मन्दिर की घंटी नहीं,
बल्कि वो शांति है
जो आरती के बाद
हर आत्मा में उतरती है।
सादगी—
तू ख़ामोशी में छुपा
वो गीत है,
जिसे सिर्फ़ दिल सुन पाता है।
तू वह दर्पण है
जो हमें हमारे भीतर की
निर्मलता से मिलवाता है।
सादगी—
तू वो क़ीमत है
जिसका कोई बाज़ार नहीं,
पर जिसके बिना
ज़िंदगी का कोई मूल्य नहीं।
तेरे बिना
ख़ूबसूरती अधूरी है,
और तेरे साथ
हर साधारण चीज़
इबादत बन जाती है।
ईश्वर ने भी
खुद को जटिल नहीं बनाया,
बस प्रेम और करुणा का
सरल रूप रख दिया।
तू वही स्मरण है—
कि परमात्मा तक पहुँचने का रास्ता
सदैव सादा होता है।
सादगी
तू वही मौन है
जिसमें सबसे गहन सत्य छुपा है,
जहाँ शब्द थक जाते हैं,
वहाँ तेरी सरलता बोल उठती है।
तू वह दीपक है
जिसकी लौ कभी चकाचौंध नहीं करती,
पर हर अँधेरे को
धीरे-धीरे मिटा देती है।
सादगी—
तू संबंधों की सबसे सच्ची भाषा है,
जहाँ दिखावा नहीं,
बस आत्मा की पारदर्शिता होती है।
तेरा होना
जैसे नदी की सहज धारा—
ना कोई हंगामा,
ना कोई गर्व,
सिर्फ़ जीवन को
शांति से सींचना।
सादगी—
तू वह दुआ है
जो होठों से नहीं,
दिल की गहराइयों से निकलती है।
तेरे साथ
हर नज़र दया बन जाती है,
हर स्पर्श ममता बन जाता है,
और हर सांस
कृतज्ञता का गीत गाती है।
सच तो यही है—
ईश्वर तक पहुँचने का
सबसे छोटा, सबसे सीधा मार्ग
तू ही है,
क्योंकि तेरा सार
प्रेम और करुणा के अतिरिक्त
कुछ भी नहीं।
#जीत ✍️
@SURINDERJEET63@ACP_SURINDER_K
माता-पिता बोझ नहीं, हमारी धरोहर हैं। जानिए उनके अधिकारों की कानूनी ढाल।
भारत में #बुजुर्गों का सम्मान हमारी संस्कृति की नींव है, लेकिन बदलते समय में कई माता-पिता खुद को अकेला और असहाय महसूस कर रहे हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की 8.6% आबादी 60 वर्ष से ऊपर थी, और यह 2050 तक 21% हो जाने का अनुमान है। ऐसे में उनकी #सुरक्षा और #सम्मान सुनिश्चित करना और भी ज़रूरी हो जाता है।
कई वरिष्ठ नागरिक 'लोक लाज' के कारण चुप रह जाते हैं। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने एक #शक्तिशाली_कानून बनाया है - 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007'।
इस कानून के तहत अपने और अपने बड़ों के अधिकार जानें:
बच्चों पर अपने माता-पिता के भोजन, आवास और चिकित्सा का ध्यान रखने की #कानूनी_बाध्यता है।
वरिष्ठ नागरिक अपनी दी हुई संपत्ति वापस ले सकते हैं, यदि उनकी देखभाल का वादा पूरा नहीं किया जाता है।
माता-पिता शांति भंग करने वाले बच्चों को अपने ही घर से कानूनी रूप से निकाल सकते हैं।
बिना किसी फीस के, 'मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल' में शिकायत दर्ज कराने की एक सरल प्रक्रिया है, जिसमें 90 दिनों के भीतर फैसला आता है।
यह कानून सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि एक #सामाजिक_सुरक्षा कवच है। इस जानकारी को हर परिवार तक पहुंचाएं।
#SeniorCitizenRights
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अतिपिछड़ा न्याय संकल्प पत्र
1. ‘अतिपिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम' पारित किया जाएगा
2. अतिपिछड़ा वर्ग के लिए पंचायत तथा नगर निकाय में वर्तमान 20% आरक्षण को बढ़ाकर 30% किया जाएगा
3. आबादी के अनुपात में आरक्षण की 50% की सीमा को बढ़ाने हेतु, विधान मंडल पारित कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची मे शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा
4. नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया में “Not Found Suitable” (NFS) जैसी अवधारणा को अवैध घोषित किया जाएगा
5. अतिपिछड़ा वर्ग की सूची में अल्प या अति समावेशन (under- or over-inclusion) से संबंधित सभी मामलों को एक कमेटी बनाकर निष्पादित किया जाएगा
6. अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जन-जाति तथा पिछड़ा वर्ग के सभी आवासीय भूमिहीनों को शहरी क्षेत्रों में 3 डेसिमल तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 5 डेसिमल आवासीय भूमि उपलब्ध करायी जाएगी
7. UPA सरकार द्वारा पारित 'शिक्षा अधिकार अधिनियम' (2010) के तहत निजी विद्यालयों में नामांकन हेतु आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा अतिपिछड़ा, पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति और जन-जाति के बच्चों हेतु निर्धारित किया जाएगा
8. 25 करोड़ रुपयों तक के सरकारी ठेकों / आपूर्ति कार्यों में अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा
9. संविधान की धारा 15(5) के अंतर्गत राज्य के सभी निजी शिक्षण संस्थानों के नामांकन हेतु आरक्षण लागू किया जाएगा
10. आरक्षण की देखरेख के लिए उच्च अधिकार प्राप्त आरक्षण नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा और जातियों की आरक्षण सूची में कोई भी परिवर्तन केवल विधान मंडल की अनुमति से ही संभव होगा