आदरणीय बंधुओ आज कल एक प्रचलन चल रहा कि अधिकतर लड़कियों परिवार को बिना बताऐ
भाग कर शादी करती है फिर कुछ महीने मे रोती हुई वीडियो पोस्ट करती है हमे धोखा दिया है ऐसे लड़कियो के परिवार को चाहिये उनको सीधे बाहर का रास्ता दिखना चाहिये
वाराणसी : जिला जज की कुर्सी पर बैठी महिला
➡जिला न्यायालय में कोर्ट रूम तक पहुंची
➡लोगों ने अधिकारियों को दी जानकारी
➡जिसके बाद महिला को हटाया गया
➡घटना को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
➡मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
#Varanasi#DistrictCourt#ViralVideo
इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला (HABC 214/2026) पढ़ा है, जो मुझे लगा कि हम सबके काम का है। पुलिस और प्रशासन जिस तरह 'शांति भंग' (जैसे Cr.P.C. की धारा 151, 107/116 या नए कानून BNSS की धारा 126/135) के नाम पर आम लोगों को परेशान करती है और अवैध रूप से जेल भेज देती है, उस पर कोर्ट ने करारा तमाचा मारा है।
अब शांति व्यवस्था के नाम पर कोई भी मजिस्ट्रेट 20,000 रुपये से ज्यादा का बांड नहीं मांग सकता।
इसके लिए किसी गारंटर (Surety) या नकद पैसे की जरूरत नहीं है, बस हमारे दस्तखत वाला पर्सनल बांड (Signature bond) ही काफी होगा।
जिस दिन हम बांड साइन कर देंगे, उसी दिन हमें तुरंत रिहा करना होगा।
अगर कोई व्यक्ति बांड भरने से मना करता है, तो उसे जेल भेजने से पहले मजिस्ट्रेट को उस इनकार की 'ऑडियो-विजुअल' (वीडियो) रिकॉर्डिंग करनी होगी।
और अगर इसके बाद भी बिना किसी वाजिब कारण के 24 घंटे से ज्यादा किसी को हिरासत में रखा गया, तो सरकार को उस व्यक्ति को 25,000 रुपये रोज के हिसाब से हर्जाना देना पड़ेगा। यह पैसा सीधे गलती करने वाले अधिकारी की जेब (सैलरी) से कटेगा।
यह फैसला एक बड़ा हथियार है। अब कोई भी पुलिसवाला या मजिस्ट्रेट अपनी मर्जी से किसी को भी बिना वजह 'शांति भंग' का बहाना बनाकर जेल में नहीं डाल सकता।
अपने पहले पति को खोने के बाद, उसने जीवन में आगे बढ़ने का फैसला किया। हालाँकि, उसकी ढाई साल की बेटी को सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। आपके विचार से क्या सही है? क्या बच्चे को माँ के साथ रहना चाहिए?
सहारनपुर के न्नौता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की डॉक्टर रूमा ने नवजात शिशु को CPR देकर, बेजान से जानदार कर दिया। शिशु की मां आयशा अपने बेजान बच्चे को जिंदा देख खुशी के मारे रोने लगी।
अगर गाड़ी लेने का मन बना रहे हैं तो महिंद्रा की स्कॉर्पियो N लेने से बचना.
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यूट्यूब पर "Scorpio N fire" सर्च करेंगे तो ऐसी अनेकों वीडियोज मिलेंगी जिनमें स्कॉर्पियो N सड़क पर धूँ-धूँ जल रही होगी। ऐसा ही एक तजुर्बा अपना बताता हूँ।
मेरे एक दोस्त हैं ऋषि श्रीवास्तव, जो अकाउंटेंट का काम करता है। उन्होंने दो साल पहले स्कॉर्पियो N ख़रीदी। लेकिन जैसे ही इस गाड़ी को चलाने लगे, शुरू से ही इसकी AC, क्लच प्लेट, और बैटरी में दिक़्क़त आने लगीं. हालाँकि ये वारंटी में थे तो कंपनी ने सही कर दिये. इस बीच ऋषि भाई ने सर्विस सेंटर से शिकायत की कि स्पीकर के वायरिंग में हमेशा नॉइज़ (साउंड) आती है. कई बार इस समस्या को सर्विस सेंटर ने सही भी किया लेकिन वायरिंग से नॉइज़ आना परमानेंटली बंद नहीं हुआ.
इसी बीच 15 अप्रैल 2026 की शाम ऋषि भाई अपनी ऑफिस से घर जा रहे थे. लेकिन सेक्टर 71, नोएडा के पास, उनके बोनट (जहां बैटरी होती है) से अचानक धुआँ निकलने लगा. ऋषि जब तक गाड़ी से बाहर आया, तब तक स्कॉर्पियो गाड़ी ने आग पकड़ ली. बीच शहर में सामान्य स्पीड पर चल रही गाड़ी में आग लग गई. इसके बाद फायर ब्रिगेड आई और जैसे तैसे आग बुझाई। हालाँकि इस घटना में ऋषि को किसी तरह का नुक़सान नहीं पहुँचा।
ऋषि ने @anandmahindra जी की @MahindraRise कंपनी को ईमेल किए। जिस पर महिंद्रा कंपनी (@18002096006) की तरफ़ से 23 अप्रैल को ईमेल आया कि हमें टाइम दीजिए हम इंस्पेक्शन करते हैं। लेकिन तब से अब तक कॉस्ट्यूमर को कोई कम्युनिकेशन नहीं है, ना मैसेज, ना कॉल, ना ईमेल, ना मीटिंग। एक आदमी ज़िंदगी भर की कमाई लगाकर गाड़ी ख़रीदता है, और उसकी सारी कमाई सड़क पर जल जाती है। गाड़ी में फँसकर या जलकर मौत भी हो सकती थी। इसके बाद भी कंपनी की तरफ़ से पीड़ित को कोई मदद नहीं है। जबकि ऐसे मामलों में कॉस्ट्यूमर से माफ़ी माँगनी चाहिए और मदद करनी चाहिए।
मैं @anandmahindra जी की बड़ी कद्र करता हूँ। और बचपन से उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी को भी पसंद करता हूँ। उनसे रिक्वेस्ट है कि अपनी गाड़ी की टेक्निकल कमी पर काम करने के लिए जाँच बिठाएँ, ताकि आए दिन स्कॉर्पियो सड़क पर जलती ना दिखें। और स्कॉर्पियो एन, नेक्स्ट ओला E- स्कूटर बन जाए।
कृपया ध्यान दें। @MahindraScorpio, @anishshah21@rajesh664@MoKa_poor , @lakhan_999 , @MahindraScorpio , @MahindraRise , @18002096006, @nitin_gadkari ji.
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कसहाई रोड, आरा मशीन के पास, कर्वी, चित्रकूट में कल दोपहर से खंभे से लाइट खराब है। लाइनमैन दीनदयाल कई बार आया, लेकिन सही करने के लिए 1500 रुपए घूस मांग रहा है। कई बार संबंधित अधिकारियों को फोन किया। सब टाल-मटोल कर रहे हैं। रातभर बिना लाइट के पूरा परिवार परेशान रहा। @dvvnlhq