सफदरजंग अस्पताल में भूख हडताल के 23वे दिन जब 21 जुलाई को सोनम वांगचुक जी मेदांता अस्पताल जाने के लिए अस्पताल परिसर से निकलने की कोशिश कर रहे थे तो सफदरजंग अस्पताल प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें मेदांता, गुरुग्राम शिफ्ट करने की इजाज़त दे दी थी
This is democracy. He has resigned. We have two more demands. We won't go like this.
Dharmendra Pradhan has resigned. But the families of the children who committed suicide should receive compensation of one crore rupees. They should get it.
One crore rupees compensation to all those families.
And second, these police goons who acted on the 20th.
Action must be taken against the police officers for that.
Remember, do not mess with cockroach
Abhijeet Dipke
Founder, CJP
वो चिल्ला कर झूठ को सच बताएँगे,आप शांति से सच पहुँचा देना।
हिंसा का वीडियो सबसे पहले हमने दिखाया,हमारा ही वीडियो सब लगा रहे हैं,मगर वो सिर्फ हिंसा दिखा रहे हैं,शांतिपूर्ण प्रदर्शन को तो वो सुबह से नहीं दिखा रहे।
हमारी क्षमता कम हो सकती है,मगर आपकी नहीं। पहुंचा दीजिए इस सच को घर-घर तक
बाकी मिलता हूँ थोड़ी देर में विस्तृत रिपोर्ट के साथ YouTube पर
प्रदर्शन स्थल(जंतर मंतर) पर देर रात एक ज़ोमैटो डिलीवरी एजेंट खाना लेकर पहुंचा.
ऑर्डर देने वाले व्यक्ति ने निर्देश दिया था कि यह खाना वहां मौजूद किसी भी भूखे व्यक्ति को दे दिया जाए.
20 जुलाई, 2026 | रात 1:30 बजे | जंतर-मंतर, नई दिल्ली
#indianexpresshindi#cockroachjantaparty
Shame on Delhi Police!
A truck loaded with stones and a wrecked van have already been placed at Jantar Mantar.
Soon, the Godi media will run stories claiming that the protesters vandalised the van to defame this peaceful protest.
Seeing the enormous crowds of people at Jantar Mantar now, some people wonder: How have people who were quiet & docile till now suddenly woken up? The reason is: While many were alarmed by the downward slide of virtually everything in the country, they felt helpless. Cockroach Janta party’s agitation & Sonam Wangchuk’s fast has made them feel that they can do something. So they are now at Jantar Mantar.
Tomorrow’s march to Parliament will be historic
केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ बुंदेलखंड के लोग जल सत्याग्रह और चिता आंदोलन कर रहे हैं। इनकी लड़ाई जल, जंगल, ज़मीन और अपने अधिकारों को बचाने की है।
मगर देश का गोदी मीडिया आपको ये ख़बर नही दिखा रहा है।
इस का पालन सभी को करना है,
पंचशील/ पाँच प्रतिज्ञा
1. मार्च में सिर्फ़ एक झंडा — तिरंगा। किसी पार्टी, किसी संगठन का और कोई झंडा नहीं होगा ।
2. हाथ में या तो संविधान या फिर गांधी, आंबेडकर या भगत सिंह की तस्वीर रहेगी।
3. जुबान पर कोई नेगेटिव नारा नहीं — बस “जय हिन्द”, “भारत माता की जय”, “इंकलाब जिंदाबाद” और “जय भीम” जैसे नारों की गूंज होगी।
4. आचार व्यवहार में अनुशासन — मंच या वालंटियर जो भी निर्देश देंगे उसका पालन करेंगे और करवायेंगे
5. और मन में एक संकल्प — किसी तरह को कोई हिंसा बिल्कुल भी नहीं। हमला चाहे जैसा भी हो, हाथ हमारा नहीं उठेगा।
: @_YogendraYadav
1.अब जबकि संसद का मानसून सत्र कल दिनांक 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, एक बार फिर यह देश व आमजन की चिन्ता है कि क्या इस बार भी फिर से संसद का सत्र हंगामा व स्थगन आदि की भेंट चढ़ जायेगा, या फिर ज़बरदस्त महंगाई, ग़रीबी, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा, महत्वपूर्ण परीक्षाओं के भी पेपरलीक आदि से जुड़े देश के ज्वलन्त मुद्दों से उत्पन्न उत्तेजित, आक्रोशित व आन्दोलित माहौल को शान्त करने व इनके संतोषजनक समाधान हेतु गंभीरता दिखाई जायेगी।
2.वैसे ख़ासकर अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा की चोरी, हेराफेरी व ग़बन आदि को लेकर व्यापक जन आक्रोश ने भी यूपी व देश को काफी झकझोर कर रख दिया है और लोग, धर्म का चुनावी स्वार्थ हेतु राजनीतिकरण करने वालों को इसके लिये कठघरे में खड़ा करके, उनसे दिल दुखाने की जवाबदेही माँग रहे हैं, जिसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक में है और संसद में भी यह मुद्दा ज़रूर गर्म होगा, जिसपर भी लोगों की पैनी नज़र है।
3.इतना ही नहीं बल्कि बंगाल में विधानसभा आमचुनाव के बाद के हालात्, राजस्थान में सरकार की लापरवाही के कारण गर्भवति महिलाओं की मौत सहित विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, काफी आपाधापी में की जाने वाली चुनावी रेवड़ियों में भारी गड़बड़ी, सरकारी योजनाओं आदि में चर्चित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ का प्रचलन, वर्षों से बसे-बसाये लोगों को उजाड़कर उनके कालोनियों का ध्वस्तीकरण आदि जैसे सरकारी रवैयों से चरमराई संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था के साथ ही,
https://t.co/zbwuw6xrFA की अर्थव्यवस्था व यहाँ के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती हुई अमेरिका-इज़राइल का ईरान के विरुद्ध लगातार युद्ध व रुपया का अवमूल्यण आदि देश व जनहित के ऐसे ख़ास मुद्दे हैं जिनपर राजनीतिक द्वेष, स्वार्थ व आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता/वैमनस्य को त्यागकर सत्ता और विपक्ष दोनों को एकजुट होकर अच्छा उपाय ढूंढ कर सराहनीय कार्य करना होगा, वरना लगभग 140 करोड़ की जनसंख्या वाले अपने देश में बहुजनों का जीवन यहाँ और भी अधिक बुरे दिन वाला बनकर उनका भविष्य अधर में लटकायेगा, जिसकी आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
5.अतः देश को त्रस्त करने वाली इन भारी चुनौतियों व उसके प्रति चेतावनियों को ध्यान में रखकर संसद के मानसून सत्र को, बिना किसी उत्तेजना, रोष व विद्वेष के, सुचारू, शान्तिपूर्ण एवं स्वस्थ्य लोकतांत्रिक परम्परा के मुताबिक चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिये, जो वक्त की अहम् ज़रूरत के हिसाब से सभी की ज़िम्मेदारी भी बनती है।
6.साथ ही, इस सम्बंध में सभी संस्थाओं को ऐसा प्रयास ज़रूर करना चाहिये कि देश के कठिन सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हालात से त्रस्त भारतीयों के जीवन का बोझ व नित्य दिन की उनकी परेशानी/दिक्कतें और अधिक नहीं बढ़ने पायें।
7.इसी क्रम में संसद को भी इन ज्वलन्त राष्ट्रीय मुद्दों पर पूरी तरह से गंभीर व संवेदनशील होना ज़रूरी है और इसकी शुरूआत अगर संसद के वर्तमान मानसून सत्र से ही हो तो यह अवश्य ही बेहतर होगा। जनहितैषी गुड गवरनेन्स हेतु संसद का प्रभावी होना ज़रूरी। जय भीम, जय भारत।