एक बात पूछनी थी...
बंद रेलवे फाटक पार करना गलत है, इसमें कोई दो राय नहीं।
लेकिन क्या किसी वर्दीधारी को मौके प�� थप्पड़ मारने का अधिकार होना चाहिए?
आप क्या सोचते हैं?
यह वीडियो उत्तराखंड के ऋषिकेश का है। एक घर में न���ाज़ अदा हो रही थी, हिंदूवादी संगठनों के फ्रिंज एलिमेंट्स वहां पहुंचकर नमाज़ का विरोध करना शुरू कर दिया। @uttarakhandcops इन फ्रिंज एलिमेंट्स के खिलाफ एक्शन लेने का साहस दिखाएगी? @pushkardhami सरकार ने क्या इन फ्रिंज एलिमेंट्स को दूसरों की इबादत में बाधा डालने का अधिकार दे रखा है? महोदय @NCM_GoI कभी मुसलमानों के साथ होते इस दुर्व्यवहार पर भी कोई संज्ञान लोगे? या सिर्फ सरकारी खजाने से बिना कुछ किए ही वेतन लेते रहोगे?
ग़ाज़ियाबाद में हुए मोहम्मद ज़ैद हत्याकांड का दूसरा आरोपी भी गिरफ्तार किया जा चुका है। बुलडोजर और एनकाउंटर से ‘न्याय’ दिलाने वाली पुलिस ने ज़ैद के हत्यारों का एनकाउंटर नहीं किया है, उनकी संपत्तियों पर बुलडोज़र नहीं चलाया है। जिस मनीष प्रॉपर्टीज़ के ऑफिस में ले जाकर एक मासूम बच्चे को इन दरिंदों ने पीट-पीट कर मार डाला, उस ऑफिस पर भी बुलडोज़र नहीं चलाया गया है। जबकि वह ऑफिस ज़ैद की कत्लगाह है।
ज़ैद अपने पिता का इकलौता बेटा था। उसकी सात बहने हैं। राहुल और अनुज नामी दरिंदों ने मामूली से विवाद में उस मासूम बच्चे की पीट-पीट कर हत्या कर दी। ज़ैद के बूढ़े पिता से इकलौता सहारा छीन लिया, उसकी बहनों से उसका भाई छीन लिया। यूपी के मुख्यमंत्री @myogiadityanath अपराध और माफियाओं के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का दंभ भरते हैं। लेकिन देखा यह गया है कि उनकी सरकार में धर्म और जाति आधारित भेदभाव चरम पर है।
जिस गाजियाबाद में राहुल और अनुज ने ज़ैद की हत्या की है, उसी गाजियाबाद में असद ने सूर्या की हत्या की थी। सूर्या की हत्या के कुछ ही घंटों बाद यूपी पुलिस ने असद को एनकाउंटर में मारकर सूर्या को ‘न्याय’ दिला दिया। यूपी सरकार ने ��ूर्या के परिवार को पांच लाख रुपये और परिवार के एक सदस्य को नोकरी देने की घोषणा कर दी। सूर्या के घर सांसद, विधायक, मंत्री सांत्वना देने पहुंचे। हिन्दुवादी संगठनों के फ्रिंज एलिमेंट्स और ज़हरीले ‘यू-ट्यूबिए’ सूर्या की हत्या का दोष पूरे समुदाय पर मढने के षडयंत्र में शामिल हो गए।
लेकिन ज़ैद के लिए यह सब नहीं हो रहा है। सरकार की ओर से मुआवज़ा देना तो दूर सांत्वना के दो बोल तक नहीं कहे गए हैं। आरोपितों का फुल एनकाउंटर तो दूर हाफ एनकाउंटर भी नहीं किया गया है, और बुलडोज़र तो मानो ऐसे खामोश है जैसे उसका इंजन बैठ गया हो। एक ‘महंत’ के शासन में राज्य में न्याय के लिए की जाने वाली कार्रावाई कितनी निष्पक्ष हैं उसका पक्ष एक दम स्पष्ट नज़र आता है! सत्ता शिखर पर पहुंच कर भी यदि निष्पक्ष न्याय का माद्दा नहीं है, तो फिर वह पद ही कुर्सी पर बोझ है।
RT Please: गाजियाबाद में 17 साल के ज़ैद की बाइक का हैंडल राहुल मावी उर्फ पहलवान की कार से टकरा गई। इतनी सी बात पर ज़ैद का नाम पूछा गया, बहस हुई। जिसके बाद राहुल मावी और उसका दोस्त अनुज कसाना उसे एक दूसरी जगह ले गए और पीट पीटकर मार डाला। इस मामले पर @StrikeOriginals पर हमने एक ग्राउंड रिपोर्ट रिलीज की है। लिंक- https://t.co/VBap9wzO6X
आपके द्वारा पिछले 27 दिन में 24 ट्वीट है यह राम मंदिर के संबंध में एवं 15 प्रेस वार्ता कर चुके हैं आप, लेकिन पिछले 9 सालों उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की मस्जिद, मदरसों और खानकाहो को टारगेट किया गया, मुसलमानों की मोबलिंचिंग हुई,मुसलमानों के कारोबार पर हमले हुए, फर्जी एनकाउंटर हुए, बुलडोजर का दुरूपयोग हुआ लेकिन एक बार भी आपने मुसलमान पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ मोर्चा नहीं खोला।
आपके 111 विधायक और 37 सांसदों ने कोई आंदोलन नहीं किया?
माननीय @yadavakhilesh जी ओवैसी सहाब का शागिर्द आपको चुनौती देता है कि जब वक्फ का काला कानून आया तो आपने क्या बोला अपनी पार्लियामेंट की वीडियो ट्वीट करने की हिम्मत है आप में?
आप तो अ���ने आप को समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता का चैंपियन कहते हैं फिर संविधान को दूसरे नंबर पर क्यों बताने लगे? कितने आंदोलन आपने महंगाई,बेरोजगारी,भ्रष्टाचार,लचर कानून व्यवस्��ा,किसानों, महिला सुरक्षा एवं पेपर लीक के संबंध में 111 विधायक एवं 37 सांसदों के साथ सड़क पर किया?
क्योंकि लोहिया जी ने कहा था कि "जब सड़कें सूनी हो जाएंगी तो संसद आवारा हो जाएगी" तो जिनको आप आदर्श मानने की बात करते हो उन्हीं की बात नहीं मान रहे।
यह पिछले 12 वर्षों के इतिहास में किसी भी न्यायालय द्वारा दिया गया अकेला न्याय है जिसमें संविधान, देश और आम आदमी के मौलिक अधिकारों की विजय हुई है। यह बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार हैं। इस विद्वान न्यायाधीश ने अपने एक फैसले में जो कहा है वो नजीर है, नजीर रहेगीं। इनका फैसला बीजेपी और मोदी एवं शाह की आँखों के किरचों की तरह चुभेगी।
दरअसल सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी के खिलाफ एक साल के लिए जिला बदर आदेश पारित किया था। सईद केंद्र सरकार के विभिन्�� फैसलों जैसे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे
जस्टिस जामदार इस आदेश पर आगबबूला हो गए। उन्होंने कहा "यह क्या है? सभी नागरिकों को भारतीय सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते ।यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो रहे हैं। अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे। यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।
याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद', 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए.।नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?"
जस्टिस जामदार ने आगे मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पुलिस नागरिकों को सिर्फ इसलिए बाहर नहीं कर सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है।"पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है, वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगा��ंगा।"
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे "हॉर्स ट्रेडिंग" पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा "कल परसों एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में क्या चर्चा हो रही थी कि प्रेसिडिंग ऑफिसर कैसे चुना जाए और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे शिफ्ट हो गया।यह क्या है? वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। आपके पास कुछ FIRs हैं।केस बदलने पर विचार करें, वॉशिंग मशीन है।" और सईद अहमद का जिला बदर रद्द कर दिया गया।
सैल्यूट जस्टिस माधव, सैल्यूट बॉम्बे हाईकोर्ट
E20 इथेनॉल के नाम पर अर्थव्यवस्था की हालत ऐसी हो गई है कि पेट्रोल अब इतने रंगों में दिखने लगा है, मानो पेट्रोल पंप पर पेट्रोल नहीं, रूह अफ़ज़ा बिक रहा हो।
यदि उमर खालिद पर वास्तव में आतंकवाद भड़काने के आरोप हैं, तो सरकार उन्हें अदालत में विधिसम्मत प्रक्रिया द्वारा साबित क्यों नहीं करती? बिना मुकदमे के छह वर्षों तक जेल में रखा जाना न्यायिक प्रक्रिया और
निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
--शशि थरूर
अयोध्या में दर्शन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अमित शाह से सवाल किया।
अमित जी का बेटा दुनिया भर के स्टेडियमों में VIP बनकर बैठता है, लेकिन आज तक न खुद राम मंदिर गए, न बेटे को दर्शन के लिए भेजा।
अगर तरुण और सूर्या के मामलों में त्वरित कार्रवाई, मुआवज़ा और सख्त कानूनी कदम उठाए गए, तो मोहम्मद ज़ैद के मामले में भी समान और निष्पक्ष न्याय क्यों नहीं? कानून का एक ही पैमाना हर नागरिक पर लागू होना चाहिए।
#JusticeForZaid
Happy Doctors' Day to the doctors portrayed in Gabbar Is Back and the television show Satyamev Jayate, who exploit the helplessness of the poor and middle class for financial gain.
#NationalDoctorsDay
गब्बर इज़ बैक फिल्म तथा सत्यमेव जयते टीवी शो में दिखाए गए उन डॉक्टरों को, जो गरीब और मध्यम वर्ग की मजबूरी का फायदा उठाकर उनका आर्थिक शोषण करते हैं, डॉक्टर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
#NationalDoctorsDay
आयुष ने अपनी मर्ज़ी से इस्���ाम अपनाकर निकाह किया, फिर अब हिंदू धर्म में वापसी कर ली। लेकिन इस ��टनाक्रम में जिस मुस्लिम परिवार पर FIR हुई, गिरफ्तारियां हुईं और जो कानूनी व सामाजिक संकट झेल रहा है, उसका क्या होगा? यदि किसी ने अपनी इच्छा से फैसला लिया , तो जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
@AkasaAir, my father reached Darbhanga Airport at 12:27 PM on 27 June for a 12:45 PM flight but was denied boarding. We had to pay ₹4,000 extra for a 28 June ticket, which departed late at 1:30 PM. Please review and compensate. @DGCAIndia@MoCA_GoI#AkasaAir#PassengerRights