'आम जनमत पार्टी' नाम की फर्जी पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में 620 करोड़ रुपए का चंदा म���ला.
इस पार्टी ने चुनाव में सिर्फ 1 कैंडिडेट उतारा. पार्टी की अध्यक्ष BJP की नेता थीं. पार्टी का ऑफिस गुजरात में है.
इसी तरह 2024 में 6 फर्जी पार्टियों को कुल 1700 करोड़ का चंदा मिला जो कि 5 राष्ट्रीय पार्टियों को मिले चंदे से ज्यादा है. ये 6 फर्जी पार्टियों भी गुजरात की हैं.
आप कुछ समझ पा रहे हैं?
पूरे देश से जो पैसा लूटा जा रहा है, वो इस तरह गुजरात में ठिकाने लगाया जा रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी जीडीपी के आँकड़ों के बल पर वाहवाही लूटना चाहते थे। कल उन्होंने अपनी पीठ थपथपाते हुए 7.8 फ़ीसदी ग्रोथ रेट का डंका पीटा और देशवासियों से कहा कि खुश हो जाओ, तुम्हारे अच्छे दिन चल रहे हैं। उन्होंने विपक्ष को ये कहते हुए कोसा कि वह अच्छे दिनों को बुरा दिन बताकर निराशा फैला रहा है।
लेकिन चौबीस घंटों में ही उनका ये विजयोल्लास शोक सभा में बदलता दिखा और उनकी फ़ज़ीहत शुरू हो गई। फ़ज़ीहत इसलिए शुरू हो गई क्योंकि जिस 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ रेट की बात वे कर रहे थे, वो झूठी थी, फ़र्जी थी। हमने कल के कार्यक्रम में उसका पोस्टमार्टम करके बता दिया था कि दरअसल, जीडीपी विकास दर ढाई फ़ीसदी के आसपास है।
कल के शो में प्रोफेसर अरुण कुमार ने ये ब��त दो टूक शब्दों में कही थी। लेकिन वही नहीं, दूसरे अर्थशास्त्री और आर्थिक मामलों के जानकार भी यही कह रहे थे। कोई मानने को तैयार ही नहीं था कि मोदी सरकार ने ये चमत्कार कर दिखाया है, क्योंकि अर्थव्यवस्था के तमाम आँकड़े दूसरी कहानी बयान कर रहे थे।
लेकिन प्रधानमंत्री के दावे को असली चोट पहुँची अडानी के न्यूज चैनल एनडीटीवी से। एनडीटीवी के कार्यक्रम में पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने बाकायदा आँक���़े देकर कहा कि ग्रोथ रेट 2.6 प्रतिशत है। उनके दावे से ऐंकर हिल गई, बौखला गई, क्योंकि उसे तो उम्मीद रही होगी कि मोदी की जय जयकार करेंगे।
बहरहाल, इस इंटरव्यू की क्लिप वायरल हो गई और मोदी सरकार की छीछालेदर भी शुरू हो गई। अव्वल तो मोदी जी का दावा ही झूठा साबित हो गया। दूसरे जीडीपी के आँकड़े को आधार बनाकर उन्होंने जो राजनीतिक चाल चली थी वह उल्टी पड़ गई।
प्रधानमंत्री ने सोचा होगा कि एक चमकदार आँकड़ा दिखाकर वे आर्थिक बदहाली को छिपा लेंगे और देश को समझा देंगे कि सब चंगा है, चिंता की कोई बात नहीं, विपक्ष सरकार को बदनाम करने के लिए झूठ-मूठ में ही छाती पीटता रहता है।
अब सवाल उठता है कि प्रधानमंत्री ने ऐसा किया क्यों....क्या उन्हें इस बात की ज़रा भी समझ नहीं है कि आँकड़ों के मामले में सरकार की साख ख़त्म हो चुकी है और अगर उन्होंने इतनी बड़ी बाज़ीगरी की तो शर्तिया पकड़े जाएंगे....
अगर वे इतनी सी बात भी नहीं समझते तो प्रधानमंत्री काहे के हैं या फिर उन्होंने ऐसे सलाहकार क्यों पाल रखे हैं जो उन्हें ऐसी सलाह देकर उनकी बेइज्जती का इंतज़ाम करते रहते हैं....
तीसरा सवाल, उनके नरैटिव को सबसे ज़्यादा डैमेज उनके मित्र अडानी के चैनल एनडीटीवी यानी गोदी मीडिया ने किया है...क्या ये दुर्घटनावश हुआ या फिर लापरवाही के कारण....
चौथा सवाल ये है कि ��स भंडाफोड़ से सरकार की साख और बीजेपी की राजनीति को क्या नुक़सान होगा और क्या इसकी भरपाई किसी नए झूठ से की जाएगी.....
इस देश को राहुल गांधी क�� कब से जरूरत थी ! उन सभी लोगों का धन्यवाद ,जिन्होंने भी इस आदमी को पप्पू कहा ! अपमानित किया, तिरस्कृत किया ! राहुल गांधी के खिलाफ षड्यंत्र किया। यह सब न होता तो यह सामने कैसे आता कि एक आदमी की अंतर्मन की शक्ति कितनी अधिक हो सकती है ! -
यह आदमी देश बदल रहा है, नजरिया बदल रहा है। संघर्षो का आदर्श बन चुका है। लोग घरों में कहने लगे हैं, ज्यादा नवाब मत बन , राहुल गांधी से बड़ा नवाब नही है तू , वो प्रधानमंत्र��यों के खानदान में पैदा हुआ है। देख कितनी मेहनत और संघर्ष कर रहा है !
हर दिन राहुल गांधी कुछ नया लेकर आ रहे हैं, लोग इन्तेजार कर रहे हैं कि वो सामाजिक बुराइयों से भी लड़ेंगे, वो दहेज़ , रूढ़िवादीता, धर्मांधता के खिलाफ भी आवाज़ उठाएंगे। यह आदमी Voice of india बनता जा रहा है।
पता नही किस मिट्टी का बना है , टूट ही नही पाया, आज पुणे में महिलाओं के जिन मुद��दों को राहुल गांधी ने उठाया वो असली महिला क्रांति लाएगा।
राहुल गांधी के भाषण का एक हिस्सा -
एक बात गांठ बांध लीजिए - सिर्फ मां, बेटी, बहन या पत्नी होना महिलाओं की पहचान नहीं है।
आपकी पहचान आप खुद हैं - आपके सपने, आपकी आकांक्षाएं और आपकी अपनी उपलब्धियां।
हर रिश्ता ज़रूरी है, मगर उन सबसे ज़्यादा ज़रूरी है आपका अपना अस्तित्व।
#ChhatronKiGoonj
@RahulGandhi @priyankagandhi
“चीनी कड़वी होती है।चीनी से सेहत ख़राब होती है। चीनी से बहुत सारी बीमारी होती है।चीनी घटाने से मोटापा घटेगा।हमें घर में चीनी की खपत कम करने के बारे में सोचना होगा।चीनी खाना कम करेंगे या छोड़ेंगे तो पैसों की बचत होगी।”
Say No To Suger Campaign
ट्रम्प के एपस्टीन से रिश्तों को लेकर वॉल स्ट्रीट जर्नल अख़बार में खबरें ब्रेक करने वाले पत्रकारों को सम्मान किया जा रहा है।
ट्रम्प ख़ुद कार्यक्रम में मौजूद हैं सभी खोजी पत्रकारों से हाथ भ�� मिला रहे हैं। इन पत्रकारों ने ट्रंप की धमकियों और मुक़दमे के बावजूद ��पना काम जारी रखा।
मुस्कुराता अमेरिका राष्ट्रपति निर्लज्ज है लेकिन मुस्कुरा लोकतंत्र भी रहा है और पत्रकारिता भी।
⁉️ पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर जनरल ���ुनीर और मियां शरीफ के लिए गले की घेघ बन चुका है।
आवाम के प्रदर्शन को बारूद डालकर जलाना चाहते थे लेकिन वह ऐसा भभका है कि इस्लामाबाद की नींद उड़ी हुई है 🔥
2011 में रामदेव के आंदोलन को रामलीला मैदान से हटाने के लिए दिल्ली पुलिस ने तब हल्का बल प्रयोग किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने स्वत Suo Motu के तहत संज्ञान लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था, आधी रात को पुलिस की कार्यवाही सही नही थी.
आज सुप्रीम कोर्ट को Police atrocities पर सुनवाई करने के लिए तैयार नही है. वकील नर कहा atrocities के वीडियोज हैं, तब चीफ जस्टिस ने कहा हमारे पास वीडियो देखने के लिए टाइम नही है.
🚨 कल से यह थ्योरी गढ़ी जा रही है की यह ब्लास्ट बहुत बड़ा हो सकता था लेकिन इंटेंसिटी कम रही,
⚠️यह एक पैनिक ब्लास्ट था जिसमें आतंकी ने खुद को उ��़ा लिया।
न सप्लीनटर निकला और न क्रेटर और ना हीं शार्पनेल...
❓क्या इन दलीलों के जरिए इस आतंकी और फिदायीन हमले को एक्सिडेंट में बदलने का काम हो रहा है?
❓क्या इन दलीलों से यह सच धुंधला हो जाएगा की दिल्ली के ठीक बगल फरीदाबाद में आतंकी अपना गढ़ बना चुके थे और एजेंसियों को कानों कान खबर नहीं थी?
❓भारी पैमाने पर विस्फोटक इकट्ठा था और दिल्ली एनसीआर बारूद के ढेर पर बैठा था?
❓जरा सोचिए, अगर जेके पुलिस ने लीड नहीं ली होती तो क्या होनेवाला था?
❓और आखिर में, न भूलें की तीन घंटा वह आतंकी लाल किले कैंपस स्थित पार्किंग में कार बॉम्ब के साथ बैठा हुआ था, जब समय भीड़ भाड़ का हुआ तो वह कार बॉम्ब के साथ निकला और निकलने के बाद उस प्वाइंट को ब्लास्ट के लिए चुना जो ऐतिहासिक महत्व के कई प्रतीकों को आमने सामने खड़ा करता है।
कोलंबिया विश्वविद्यालय में गणित के एक कोर्स के दौरान एक छात्र कक्षा में सो गया। जब उसकी नींद खुली, तो उसने देखा कि प्रोफेसर ने व्हाइटबोर्ड पर दो समस्याएँ लिखी थीं। उसने सोचा कि ये होमवर्क हैं, इसलिए वह उन्हें अपनी नोटबुक में नोट कर के घर ले गया।
जब उसने उन समस्याओं को हल करने की कोशिश की, तो वे उसे बेहद कठिन लगीं। लेकिन उसने हार नहीं मानी। घंटों लाइब्रेरी में बैठकर उसने संदर्भ ���ुस्तकों की मदद से अध्ययन किया और अंततः वह एक समस्या को हल करने में सफल हो गया, भले ही यह काफी चुनौतीपूर्ण था।
अगली कक्षा में प्रोफेसर ने जब होमवर्क के बारे में कुछ नहीं पूछा, तो वह चकित हुआ और खड़ा होकर पूछा, "सर, आपने पिछले लेक्चर में दिए गए असाइनमेंट के बारे में कुछ क्यों नहीं पूछा?"
प्रोफेसर ने उत्तर दिया, "असाइनमेंट? वो तो मैंने केवल ऐसे उदाहरण के तौर पर लिखी थीं जिन्हें अभी तक वैज्ञानिक हल ���हीं कर पाए हैं, वे सांख्यिकी में सबसे प्रसिद्ध अनसुलझी समस्याओं में से दो थीं।
छात्र चौंक गया और बोला, "लेकिन मैंने उनको हल कर लिया है! मैंने इस पर चार पेपर भी लिखे हैं।" उसकी इस उपलब्धि को बाद में मान्यता मिली और कोलंबिया विश्वविद्यालय में उसके लिखे चारों पेपर आज भी प्रदर्शित हैं।
इस कहानी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि छात्र ने यह नहीं सुना था कि "इन समस्याओं का कोई हल नहीं है।" उसने सिर्फ यही माना कि ये कठिन प्रश्न हैं, जिन्हें हल करना ज़रूरी है, और उसने पूरे मन से उन्हें हल करने की कोशिश की – और सफल हुआ।
यह कहानी हमें याद दिलाती है – उन लोगों की बात मत सुनो जो कहते हैं कि तुम कुछ नहीं कर सकते। आज की पीढ़ी अक्सर निराशा और नकारात्मकता से घिरी होती है। कुछ लोग जानबूझकर दूसरों के भीतर असफलता और हार का बीज बोते हैं।
लेकिन तुम्हारे पास अपनी मंज़िल पाने की ताकत है, बाधाओं को पार करने की शक्ति है, और अपने सपनों को साकार करने का साहस है। बस खुद पर विश्वास रखो – और लगातार प्रयास करते रहो।
इस छात्र का नाम था जॉर्ज डैंटज़िग, और यह समस्या Math Stack Exchange से ली गई थी।
"डैंटज़िग ने यह सिद्ध किया कि Student’s t-test के संदर्भ में, एकमात्र तरीका जिससे हम ऐसी hypothesis testing बना सकते हैं जो standard deviation से स्वतंत्र हो, वह है एक निरर्थक परीक्षण, जो हमेशा समान संभावना से रिजेक्ट या एक्सेप्ट करता है जो व्���ावहारिक नहीं है।"
बात पते की #4
कोई भी प्लॉट ��रीदने से पहले सबसे मुख्य दस्तावेज होता है - पट्टा। अगर आप बिना पट्टे के सिर्फ रजिस्ट्री से प्लॉट खरीद रहे हो तो नगरपालिका या पंचायत से NOC अवश्य लें, ताकि भविष्य में आपको कोई कानूनी दिक्कत न हो।ये सिर्फ आबादी के प्लॉट के लिए है।
अब मुंबई से लेकर जयपुर और नागौर से कॉल आ रहे हैं, यह सिर्फ मेरी समस्या नहीं बल्कि पूरे राजस्थान की समस्या है, पैसे देकर नेटवर्क ��हीं मिल रहा तो यह महा ठगी है🙏🙏
#Jio_का_घटिया_नेटवर्क
"आतंकवादी जकीउर रहमान लखवी जेल में बैठे-बैठे एक बच्चे का बाप बन गया था"
◆ AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा
#AsaduddinOwaisi | @asadowaisi | Zakiur Rehman Lakhvi | Asaduddin Owaisi
अलीगढ़ में गोश्त कारोबारियों पर जो हमला हुआ है, उसे एक आतंकवादी हमला ही माना जाना चाहिए। आख़िर भीड़ को किसने इजाज़त दी थी कि वह क़ानून को अपने हाथ में ले? पहले इन लोगों ने रंगदारी माँगी, और जब उसमें नाकाम रहे, तो जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में चार लोग ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
सरकार पूरी दुनिया को यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि भारत में सभी लोग एकजुट हैं, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही है — यहाँ हिंदू और मुसलमानों के बीच नफ़रत लगातार बढ़ाई जा रही है।
सवाल यह है कि क्या ऐसे आतंकियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होगी? UAPA और NSA लगाया जाएगा?