ईश्वर पर आस्था रखो तो ईश्वर स्वयं आपके साथ हो जाते है। हां, हो सकता है कि वो प्रत्यक्ष तौर पर साथ न रहें लेकिन अपने प्रतिनिधि के तौर पर आपके जीवन में कुछ अच्छे लोगों को भेज देते है ताकि वो आपका ध्यान रख सकें!!
प्रिय दोस्त, दुष्ट!
तुम मेरे जीवन में आए वहीं प्रतिनिधि हो !!
♥️🤗
प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित
हम सब थे भूले मद में;
भोले थे, हाँ तिरते केवल,
सब विलासिता के नद में।
वे सब डूबे; डूबा उनका
विभव, बन गया पारावार;
उमड़ रहा था देव-सुखों पर
दु:ख-जलधि का नाद अपार।
- जय शंकर प्रसाद (कामायनी)
समस्या बिकिनी या कपड़ों से नहीं, संदर्भ से है। भाई-बहन के पवित्र पर्व पर बहन की भूमिका में बिकनी पहनना निहायती घटिया एक धर्म विशेष को अपमानित करना है। संस्कृति के साथ कपड़े होते है। आप ब्राजील के बीच में नहीं जन्मे हो जो वहां की संस्कृति भारत में रखोगे त्यौहार पर।
@Prad_Rajput मां करणी के नाम पर जितनी भी सेनाएं बनी हुई है उनमें सबसे सही व्यक्ति कोई है तो वो ये महिपाल जी ही है और दूसरी तरफ सबसे घटिया व्यक्ति यदि कोई है तो तो वो ब्लाउज वाले राज के राज़ है 😁
आओ बैठें
इसी ढाल की हरी घास पर।
माली-चौकीदारों का यह समय नहीं है,
और घास तो अधुनातन मानव-मन की भावना की तरह
सदा बिछी है-हरी, न्यौतती, कोई आ कर रौंदे।
आओ, बैठो।
तनिक और सट कर, कि हमारे बीच स्नेह-भर का व्यवधान रहे,
बस,
नहीं दरारें सभ्य शिष्ट जीवन की।
~अज्ञेय
मैं अजीत भारती का उनकी भाषा को लेकर आलोचक हूं और ये मेरी व्यक्तिगत राय है। बावजूद इसके यदि कोई आपकी माता या बहन को अपशब्द बोल रहा है तो उसके प्रतिकार में अजीत ने जो कुछ भी कहा है वो उचित है , उन्हें ऐसा कहने का हक़ आपने ही दिया है। रही बात केस की तो कुछ नहीं होना है भारती को ।
जब तक वोटबैंक है तब तक आरक्षण ऐसे ही चलता रहेगा जैसा है । हां बढ़ जरूर सकता है खत्म नहीं हो सकता ... रही बात स्वर्ण वर्ग की तो इसके लिए जिम्मेदार खुद स्वर्ण वर्ग ही है जो धर्म और राष्ट्रवाद के तथाकथित चश्में से अपने क्रूर यथार्थ को नहीं देख पा रहा .... चश्मा हटेगा तो सब हटेंगे !!