Official community of All India Gig & Platform Workers Union (AIGPWU)
A national community working for rights, security & welfare of gig and platform workers.
10 मिनट की डिलीवरी के पीछे छिपी है लाखों गिग वर्कर्स की मेहनत और संघर्ष।
आज देश में लाखों लोग फूड डिलीवरी, कैब और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए अपनी रोज़ी-रोटी कमा रहे हैं। लेकिन बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स अब भी स्थायी नौकरी, पीएफ, ईएसआई, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा जैसी
सुविधाओं से वंचित हैं। उनकी आय अक्सर ऑर्डर, इंसेंटिव और रेटिंग पर निर्भर करती है, जबकि हर दिन उन्हें ट्रैफिक, खराब मौसम और समय के दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
बारिश हो या लू, डिलीवरी नहीं रुकती!
भीषण गर्मी हो, मूसलाधार बारिश हो या खराब मौसम गिग वर्कर्स हर परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। लेकिन अक्सर मौसम का सबसे बड़ा जोखिम भी उन्हीं के हिस्से आता है।
कठिन परिस्थितियों में लगातार काम करने वाले इन वर्कर्स के लिए विशेष सुरक्षा नियम, बीमा, पर्याप्त विश्राम और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण श्रम नीति का विषय बन चुका है।
कठिन परिस्थितियों में लगातार काम करने वाले इन वर्कर्स के लिए विशेष सुरक्षा नियम, बीमा, पर्याप्त विश्राम और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण श्रम नीति का विषय बन चुका है।
सामना करना पड़ता है।
सवाल केवल तेज़ सेवा का नहीं, बल्कि उन लोगों की सुरक्षा और सम्मान का भी है जो हर मौसम और हर परिस्थिति में यह सेवा उपलब्ध कराते हैं।
क्या तेज़ डिलीवरी की रफ्तार के साथ गिग वर्कर्स की सुरक्षा और अधिकारों को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए?
#Gigworkers
10 मिनट की डिलीवरी... लेकिन किस कीमत पर?
तेज़ डिलीवरी की बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने गिग वर्कर्स पर काम का दबाव पहले से कहीं अधिक बढ़ा दिया है। समय पर ऑर्डर पहुंचाने की दौड़ में उन्हें सड़क दुर्घटनाओं, ग्राहक विवाद, गलत पते, कमाई में अनिश्चितता और मानसिक तनाव जैसी कई चुनौतियों का
काम पूरा, लेकिन सामाजिक सुरक्षा अब भी अधूरी!
देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने वाले लाखों गिग वर्कर्स हर दिन अपनी मेहनत से लोगों तक सेवाएं पहुंचा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्हें भी कर्मचारियों जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा मिल रही है?
आज भी अधिकांश गिग वर्कर्स को PF, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना सुरक्षा और आय की स्थिर गारंटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। किसी हादसे या बीमारी की स्थिति में पूरा आर्थिक बोझ उन्हीं पर आ जाता है।
यूपी एग्रीगेटर पॉलिसी का संदेश साफ़ है—
कंपनियों के मुनाफ़े सुरक्षित, ड्राइवरों पर जुर्माना तय।
न न्यूनतम आय, न सामाजिक सुरक्षा, न श्रमिक का दर्जा।
गिग वर्कर्स को दंड नहीं, अधिकार चाहिए।
#GigWorkers#WorkersRights
https://t.co/D5EC4YCo6i
X (Twitter) की 280-character limit के करीब एक संस्करण:
ऐतिहासिक जीत!
114वें ILC में Platform Economy Convention 2026 पारित। अब गिग/प्लेटफॉर्म वर्कर्स को यूनियन, Collective Bargaining, Social Security, न्यूनतम वेतन, डेटा सुरक्षा और मनमाने Deactivation से संरक्षण का अधिकार मिलेगा।
Dear Ambani Ji,
Store Code: T42N, Nizamabad.
If delivery partners are forced to rest on plastic pallets beside exposed wires after working in 45°C , something is wrong.
The people who deliver JioMart's promises to customers deserve safety, basil human facilities
@_MukeshAmbani
Store Code: T42N
JioMart Nizamabad seems to have a clear priority:
Parking space for bikes ✔️
Safe resting space for delivery partners ✖️
Workers are forced to rest on plastic pallets beside charging boards and exposed wires.
If an accident happens tomorrow, responsible ?
Store Code: T42N
जियो मार्ट, निजामाबाद में डिलीवरी पार्टनर्स के लिए बैठने की जगह नहीं, लेकिन बाइक पार्किंग के लिए जगह है।
लगता है @jiomart के लिए बाइक की कीमत इंसान से ज्यादा है।
#JioMart#T42N#DeliveryWorkers
सावधान ड्राइवर्स!
बल्लभगढ़ में संदिग्ध लोग किसी भी रेट पर ट्रिप के लिए तैयार दिखे। ₹16/km + टोल/पार्किंग पर भी तुरंत हां!
ये सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं—ऐसे लोग कहीं भी, किसी भी स्टेशन/बस स्टैंड पर मिल सकते हैं।
सतर्क रहें।
सरकार सुरक्षा पर कदम उठाए।
#aigpwu#gigworkerssafety
🚨 लोकसभा में गिग वर्कर्स का मुद्दा उठा
राहुल गांधी ने सवाल किए
⚠️ न्यूनतम वेतन
⚠️ एक्सीडेंट/मौत का डेटा
⚠️ महिला वर्कर्स की सुरक्षा
❗ स्पष्ट जवाब नहीं मिला
📊 eShram पर सीमित रजिस्ट्रेशन, बीमा में भी कम भागीदारी
सवाल: गिग वर्कर्स साझेदार या सस्ता श्रम?
#GigWorkers#aigpwu