@richaanirudh माम रिपोर्टर्स बेचारों को भेजने की जरूरत नहीं है जो टीवी में star एंकर्स है जैसे चित्रा, अंजना, सुधीर इनको ग्राउंड पर जाना चाहिए क्योंकि इनको काफी अनुभव भी है कैसे दे डील करना है भीड़ से। इन लोगों को इंटरनेशनल एक्सपीरियंस भी है।
@akhileshsharma1 बहुत बड़ा भ्रम है कि आप लोग खुद को पत्रकार समझते हो जनता के नजर में सिर्फ और सिर्फ आप लोग चाटुकार हो एक पार्टी और एक आदमी का चाटने वाला ,नाम और पार्टी अब दोनों जानते हैं.
As an educator, I find it deeply painful to watch the image of our students being tarnished on media.
The students' protest is taking place peacefully at Jantar Mantar. If there are reports of violence elsewhere in Delhi, please do not rush to attribute them to this movement without evidence. Those who genuinely know these young people have seen their extraordinary patience, discipline and restraint.
I often wonder: what kind of system is so quick to distrust its own students? Why is it easier to question their intentions than to hear their concerns?
Our children deserve to be protected, not portrayed as villains. Their voices deserve to be heard, not drowned out by narratives that serve vested interests.
@SDhawan25 Dhawan ji,public is sarkar ko vote dekar apna bharosa jata di hai. But sarkar paper leak kr us bharosa ko toda hai. Bas usi ka accountability public ab mang rhi.
दिलचस्प है ये जानना
गोदी मीडियाकर्मी बहुत ही अहंकार और नीचता के भाव के साथ यूट्यूबर्स को यूट्यूबर्स लिख देते हैं। गोदी चैनलों के वैसे कर्मचारी, जिनको ज़मीन पर चेहरे से कोई नहीं पहचानता, वे अब यूट्यूबर की तरह ही जंतर मंतर प्रदर्शन कवर करने जाने लगे हैं, बिना अपने चैनल की माइक-आईडी के, ताकि कोई ये न जान जाए कि किस गोदी चैनल से हैं!
डर माइक-आई दिख जाने का नहीं होना चाहिए, डर इस बात का होना चाहिए कि वे सच रिपोर्ट करते हैं या नहीं। क्योंकि ये ट्रिक एकाध बार ही चलेगा।
You are the one who has harmed the future of our youth the most.
You allowed and encouraged the total capture and destruction of our education system - and protected every person responsible for it.
The students’ demands are clear:
1. Sack Dharmendra Pradhan.
2. Apologise to the students.
3. Take action against those who assaulted them.
आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है।
आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया - और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।
छात्रों की मांगें साफ़ हैं:
1. धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं।
2. छात्रों से माफ़ी मांगे।
3. छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें।
तीन दिन हो गए। दिल्ली पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस तक नहीं की है। कम से कम अफ़सोस ही जता देती कि बच्चों के साथ ज़्यादती हो गई। सब वक़्त के गुज़रने के इंतज़ार में हैं या किसी कमज़ोर क्षण के इंतज़ार में हैं कि कोई ग़लती हो जाए, बड़ी घटना प्लांट कर दी जाए फिर कार्रवाई करेंगे। इससे कुछ भी हासिल नहीं होगा।
शुक्र है कि अभी बात केवल इस्तीफ़े की हो रही है, शिक्षा व्यवस्था की होने लगेगी और ये नौजवान ढक्कन उठा कर देखने लगेंगे तब फिर कोई जवाब बचेगा नहीं। सरकार सचमुच इस शिक्षा व्यवस्था को डिफेंड नहीं कर पाएंगी। कम से कम अपने मंत्री और सांसदों से ही पूछ लीजिए कि उनके बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं तो वहाँ क्या अच्छा है जो यहाँ नहीं हो सकता। कहने में अच्छा नहीं लगता लेकिन सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का हाल कबाड़ जैसा बना दिया गया है।
मैं बीजेपी के सांसदों और मंत्रियों को शानदार पिता मानता हूँ जिन्होंने अपने बच्चों को यहाँ के कबाड़ कॉलेजों में नहीं भेजा। वे मंत्री के रूप फेल हो गए मगर डैडी के रूप में पास। बस देश के बाक़ी बच्चों के लिए नहीं सोचा। दो चार दस कॉलेज ही बचे रह गए हैं वहाँ भी संघ की भक्ति चल रही है, पढ़ाई कम। बच्चों को शिक्षा की बर्बादी ने घेर लिया है। यह काम वही कर सकता है जिसका इस देश के कॉलेजों से लगाव जुड़ाव न हो। और कॉलेजों से नफरत की चिढ़ पैदा हुई थी 2016 के साल से। आप जानते हैं।
आपको एक अपील यह भी करनी चाहिए कि जो भी रिपोर्ट करने आ रहा है, चाहे वो गोदी मीडिया का ही क्यों न हो, उसे लेकर हुल्लड़बाज़ी न करें। हिंसा तो बिल्कुल ही नहीं। पत्रकारों के साथ किसी भी तरह की धक्कामुक्की आपके शांतिपूर्ण आंदोलन को संदेह के घेरे में लाएगी। इसकी जगह आप मंच से केरला के पत्रकार सिद्दीक कप्पन के बारे में बताइये, उनके साथ क्या-क्या हुआ, उनके हक को लेकर गोदी मीडिया का कौन संपादक बोल रहा था, उसका नाम भी आदर के साथ बताइये। जम्मू कश्मीर के पत्रकार आसिफ़ सुल्तान छह साल जेल में रहे, एक पत्रकार को आतंक के चार्ज में जेल भेज दिया गया, दो साल बाद कोर्ट ने कहा कि इनके खिलाफ कोई मामला ही नहीं बनता, तब भी जेल में रहे। UAPA के नाम पर जेल में रखा गया। इरफान मेहराज को तीन साल तक हिरासत में रखा गया। प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखा गया। मणिपुर के पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेमचा को बीजेपी की सरकार ने सरकार की निंदा करने के आरोप में एक साल तक जेल में रखा। क्या ये सब हिंसा नहीं है और इस हिंसा के खिलाफ कब गोदी मीडिया खड़ा हुआ? इस गोदी मीडिया ने रिया चक्रवर्ती के साथ क्या किया, यह सब मंच से बताइये। गोदी मीडिया की कहानी लोगों को बताइये न कि उनके साथ धक्का मुक्की करें। रिया चक्रवर्ती के कवरेज को आप सभी युवाओं को अध्ययन करना चाहिए। पता चलेगा कि इस गोदी मीडिया के बाद भी जनता ज़िंदा है।
@chitraaum मैडम रवीश जी ने कहीं भी यह नहीं लिखा है कि हिंसा होनी चाहिए बल्कि उन्होंने तो इसे मना ही किया है लेकिन उन्होंने जरूर बोला है कि यह गोदी मीडिया लोकतंत्र की हत्यारा है।
यह बात बिल्कुल सही और सच है। गोदी एंकरो के लिस्ट में आप टाप 5 में आती है।