चित्र में दिख रही लड़की ज्योति अहिरवार है। इसका भाई इसका हाथ पकड़कर रो रहा है और कह रहा है, बहन ऐसा मत कर। लेकिन ज्योति अहिरवार अपने भाई को धक्का देकर अपने प्रेमी की बाइक पर चढ़कर फरार हो जाती है, यानी लव मैरिज करके।
इसका कारण है कि ज्योति अहिरवार जब सोशल मीडिया खोलती होगी, तब वह देखती होगी कि किस प्रकार के पोस्ट धर्म के प्रति किए जाते हैं। वहीं से ज्योति अहिरवार जैसी लड़कियों का चरित्र बिगड़ता है और उनमें ऐसा आत्मविश्वास आता है कि वे अपने बाप भाई को ठोकर मारकर धक्का देकर प्रेमी की बाइक पर चढ़कर फरार हो जाती हैं, जबकि भाई गिड़गिड़ाता रह जाता है।
इसका भाई भी कुछ नहीं कर पाएगा, केवल गिड़गिड़ाने के अलावा, क्योंकि देश में कानून ही ऐसा है कि भाई-बाप केवल गिड़गिड़ाते ही रहेंगे।
मैं यह पोस्ट किसी समाज के किसी वर्ग का अपमान करने के लिए नहीं कर रही हूँ, बल्कि अपने समाज के बापों और भाइयों को शिक्षा देने के लिए कर रही हूँ कि जब बहन छोटी हो, तभी से उसे धर्म और संस्कार के प्रति कट्टर बनाओ।
उसके मन में बचपन से संस्कार भरो, धर्म की शिक्षा दो और उसके मन में बचपन से पुरुषों-लड़कों के प्रति नफरत धीरे-धीरे भर दो। नफरत ऐसी हो कि बाप-भाई तो उसे खूब प्यार करें, उससे उल्टा न बोलें, न मारे-पीटें, बस सॉफ्ट तरीके से नरेटिव भरो उसके मन में गैर-पुरुषों के प्रति।
यहाँ आपको यह ध्यान देना है कि कोई बाप-भाई अपनी बहन-बेटी को बचपन में प्यार न देगा या उसे डाँटेगा बात-बात पर, तो अंदर ही अंदर वो आपसे नफरत करने लगेगी। और जैसे ही वो थोड़ी बड़ी होगी, बाहर कोई लड़का थोड़ा सा भी अच्छे से बात कर लेगा तो वो उसी पुरुष के प्रति आकर्षित हो जाएगी और आपसे और ज्यादा नफरत करने लगेगी।
मैं जानती हूँ कि आप लोग अपनी लड़कियों-बहनों को प्यार तो बहुत करते हो, बहुत केयर भी करते हो, लेकिन आपका तरीका सही नहीं है। आप दिन के 12 घंटे प्यार करते हो और उसकी छोटी सी गलती पर उसे डाँट देते हो या मार देते हो, कोई ऐसा शब्द बोल देते हो जिससे उसे हर्ट हो जाता है।
कभी भी बाप-भाई अपनी बहन-बेटियों के अपमान करने वाले शब्द न बोलें। भले ही वो कितनी भी छोटी हो, जितनी छोटी होगी, यदि आप उसको ताने मारेंगे तो उसे हर्ट होगा और जितनी छोटी होगी, हर्ट करने वाली बात उसको उतना ही ज्यादा दिल पर लगेगी।
फिर उसे कहीं बाहर थोड़ा भी सम्मान या प्यार से बात कर लेगा तो वो उसी पुरुष की दीवानी हो जाएगी और आप भाई-बाप से नफरत करने लगेगी। उसे उसी गैर-पुरुष में अपनी पूरी दुनिया दिखने लगेगी और आप उसे अंदर ही अंदर दुश्मन लगने लगेंगे।
दूसरी बात, समय पर विवाह कर दें। अगर उसको पढ़ना-लिखना है तो विवाह के बाद भी उसकी पढ़ाई जारी रखें। भले ही विवाह के बाद भी आपको उसकी पढ़ाई का पैसा देना पड़े, आप उसे पैसे दीजिए, लेकिन कोशिश करिए 20 साल के आस-पास विवाह कर दें।
ये सब चीजें बारीकी से ध्यान दें, तो आपकी इज्जत बची रहेगी।
और उसको मोबाइल ना दिलवाएं। घर में टीवी लगा दें या मोबाइल की जरूरत हो तो एक मोबाइल घर में रखें जिसमें सोशल मीडिया न हो। यदि वो बोले कि मोबाइल चाहिए तो उसको अगले साल-अगले साल करके टालते रहें।
लेकिन यह भी ध्यान रखें कि बिना मोबाइल के वह डिप्रेशन में न जाए। उसके लिए घर में टीवी लगाएं या फिर उसके खेल-कूद की व्यवस्था रखें। घर में लूडो, कैरम आदि रखें। उसके साथ रोज एक-दो घंटे खेलें, हँसी-मजाक करते हुए उससे बात करें और उसे इतना ओपन रखें कि संस्कारों के साथ वह कोई बात बताने में आपसे डरे ना।
यदि आप उसके दिल की बात नहीं सुनेंगे तो वह अपने दिल की बात गैर-पुरुषों से करने लगेगी। इसलिए इसमें माताओं का रोल भी बहुत महत्वपूर्ण है।
माताएँ सेक्स एजुकेशन से लेकर हर चीज में अपनी बेटियों को ओपन रखें। उसे हड़काएँ या डाँटें नहीं। उसे अपने साथ इतना ओपन रखें कि बड़ी से बड़ी बात भी तुरंत सबसे पहले अपनी माँ को बताए।
यदि आप अपनी बेटियों को बचपन से संस्कार, धर्म और सबसे मुख्य बात समय नहीं देंगे, उससे दूर रहेंगे, उससे बात नहीं करेंगे, उससे गुस्सा रहेंगे, उसे मारेंगे-पीटेंगे, छोटी-छोटी बातों पर उसे डपट लेंगे, तो वो कहीं और अपना दिल लगा लेगी और अपने प्रेमी की बाइक पर चढ़कर चल देगी। फिर आप ज्योति अहिरवार के भाई की तरह उसका पैर पकड़कर गिड़गिड़ाएंगे। बस आपके हाथ में गिड़गिड़ाने के सिवा कुछ और नहीं रहेगा।
और मुख्य बात भूल गई जब उसके साथ कोई खेल खेलें तो खुद जीतने की कोशिश न करें। लूडो या कैरम में ऐसा भी न लगे कि आप जानबूझकर उससे हार रहे हैं।
आप बस अच्छी एक्टिंग करके उसे जीतने दें। और जब वह खेल जीते तो पूरा घर मिलकर उसकी खूब तारीफ करे।
शेष 👉 कमेंट बॉक्स में....
इतनी परफेक्ट ढपली कोई बिना सीखे कैसे बजा सकता है भला ??
और यदि ये सब वहां JNU में ढपली सीखते हैं, तो पढ़ाई कैसे करते होगे ??
पता नहीं कैसे माता पिता होगें इनके ।
🌼🚩 जय जगन्नाथ! 🚩🌼
जब प्रभु जगन्नाथ के दर्शन होते हैं,
तो केवल नेत्र ही नहीं,
आत्मा भी तृप्त हो जाती है।
यह अद्भुत दृश्य श्रद्धा,भक्ति और सनातन संस्कृति की दिव्यता का जीवंत प्रमाण है।
#जयजगन्नाथ#JaiJagannath
एक देश है वहाँ दो दोस्त थे। एक जनरल कैटेगरी का राहुल शर्मा था और दूसरा आरक्षण कैटेगरी का अमित कुमार था। दोनों साथ में एक सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे।
वे दोनों ने राज्य लोक सेवा आयोग (State PSC) की परीक्षा साथ में दी थी। जनरल कैटेगरी वाले राहुल शर्मा के पास बहुत ही ज्यादा बुद्धि और पढ़ने में तेज था, जबकि आरक्षण वाला अमित कुमार मंदबुद्धि था।
दोनों साथ में परीक्षा दिए। जनरल वाले राहुल शर्मा के 90 नंबर आये उसके बाद भी अयोग्य घोषित हो गया, वहीं उसके आरक्षित दोस्त अमित कुमार के 40 नंबर आये और वो सरकारी पुलिस कर्मचारी बन गया।
फिर जनरल कैटेगरी वाला छात्र राहुल शर्मा यह सब देखकर बहुत आहत हो गया और वो डकैत बन गया। वह केवल भ्रष्टाचारी नेताओं के घर को टारगेट करता और अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से खूब डकैती करता।
जो नेता देश को लूटकर भ्रष्टाचार करके पैसा घर में छिपाते, वह जनरल कैटेगरी का छात्र राहुल शर्मा लूट लेता और उस पैसों को गरीबों के स्कूल बनवाता, उनके लिए हॉस्पिटल बनवाता, जिससे जनता के बीच उसकी छवि हीरो वाली बन रही थी।
वहीं भ्रष्टाचारी लुटेरे नेता लोग परेशान हो गए और जनरल कैटेगरी के लुटेरे राहुल शर्मा को पकड़वाने को उसी को ये काम मिला जो उसका दोस्त था, उसके साथ पढ़ता था।
लेकिन वो बेचारा आरक्षण से नौकरी पाया था, उसमें बुद्धि कम थी और जनरल वाले लुटेरे राहुल शर्मा के पास बहुत ही ज्यादा बुद्धि थी। वह लूटने के बाद कोई सबूत नहीं छोड़ता था और इधर इस आरक्षण वाली टीम जो उसको पकड़ने के लिए लगाई गई थी वो उसे पकड़ ही नहीं पा रही थी क्योंकि उस लुटेरे राहुल शर्मा के पास पुलिस से ज्यादा बुद्धि थी।
फिर इस आरक्षण वाले पुलिस अधिकारी अमित कुमार ने अपने डिपार्टमेंट को बोला कि इसे पकड़ना हमारे बस की बात नहीं है क्योंकि उसके पास हमसे ज्यादा बुद्धि है।
इसको पकड़ने के लिए कोई ऐसी टीम लगाओ जो मेरिट पर डिपार्टमेंट में आये हो, जो सामान्य वर्ग के बुद्धिमान कर्मचारी हों।
फिर सामान्य वर्ग के बुद्धिमान कर्मचारियों की उसको पकड़ने के लिए टीम लगाई गई जो उसी के जितना बुद्धिमान थे। फिर वो किसी तरह पकड़ा गया लेकिन वो बुद्धिमान तो था ही, उसने सारे भ्रष्टाचारी और लुटेरे नेताओं को भी अपने साथ लपेट दिया कि हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे।
फिर भ्रष्टाचारी नेता खुद को फंसता देख उसको बचाने में जुट गए और नेता खुद केस कमजोर करवाने लगे। उसका खुद को फंसता देखकर जिससे वह सामान्य वर्ग लुटेरा लड़का राहुल शर्मा बाइज्जत बरी हो जाता है।
फिर वो जेल से वापिस आकर वो संसदीय चुनाव लड़ता है और जनता की मदद करने से जनता उसे एकतरफा वोट देकर सांसद बना देती है।
अब उसके आस पास 75 आरक्षित कर्मचारी उसको सुरक्षा देते हैं और वह अपने जिले को देश का नंबर एक जिला बना देता है अपनी बुद्धि, संघर्ष, मेहनत और ईश्वर के आशीर्वाद से।
डिस्क्लेमर: यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। यह किसी भी वास्तविक व्यक्ति, घटना या संगठन से प्रेरित नहीं है। यह केवल मनोरंजन और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के उद्देश्य से लिखी गई एक काल्पनिक कहानी है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 22 के तहत मिलने वाला प्राथमिकता का अधिकार यानी पहले खरीदने का हक, कृषि भूमि यानी खेती की जमीन पर भी लागू होगा।
अदालत ने कहा है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 22 जो क्लास वन उत्तराधिकारियों को किसी अन्य सह उत्तराधिकारी द्वारा ट्रांसफर की जाने वाली संपत्ति खरीदने की प्राथमिकता देने वाला अधिकार देती है, कृषि भूमि पर भी समान रूप से लागू होती है।
इसका मतलब है कि अगर परिवार में किसी सदस्य को विरासत में जमीन मिली है और वो अपने हिस्से को किसी बाहरी व्यक्ति को बेचना चाहता है तो उसे पहले अपने ही परिवार के अन्य क्लास वन उत्तराधिकारियों को मौका देना होगा।
हिंदुओं के पैतृक संपत्ति के अधिकार पर असर डालने वाला यह दूरगामी प्रभाव वाला फैसला न्यायमूर्ति संजय करोल और एन. कोटीश्वर सिंह ने महिंदर तथा अन्य बनाम पूरन सिंह मामले में सुनाया है।
कोर्ट ने महिंदर की अपील खारिज करते हुए पहली अपीलीय अदालत और हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है जिसने माना था कि धारा 22 कृषि भूमि पर भी लागू होगी।
इस मामले में याचिकाकर्ता और प्रतिवादी भाई-भाई थे जिन्होंने क्लास वन उत्तराधिकारियों की हैसियत से पिता की कृषि भूमि विरासत में पाई थी।
इनमें से कुछ उत्तराधिकारियों ने विरासत में मिली अपने हिस्से की कृषि भूमि मिल कर 28 दिसंबर 2011 को तीसरे पक्ष यानी श्रीमती पूनम को बेच दी।
लेकिन परिवार के एक अन्य सदस्य ने इसका विरोध किया और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 22 का आधार लेते हुए सिविल कोर्ट में वाद दायर कर बिक्री को चुनौती दे दी।
उसका कहना था कि धारा 22 के तहत उसे पहले खरीदने का अधिकार है। यानी बाहर वाले को बेचने से पहले परिवार को मौका मिलना चाहिए। सिविल कोर्ट ने यह कहते हुए वाद खारिज कर दिया कि कृषि भूमि पर ऐसा अधिकार लागू नहीं होता।
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दतिया में समर्थकों को संबोधित करते हुए नरोत्तम बोले- मेरे आँसुओं का बदला आशुतोष से क्यों लोगे..आशुतोष की मेरी टिकट कटवाने की हैसियत नहीं. मेरा टिकट ऊपर से कटा है...!
मेरे आँसुओं का बदला भाजपा से क्यों लोगे?
आशुतोष की क्षमता है मेरा टिकट काटने की?
मेरा टिकट ऊपर से कटा हैं वहां हम बात करेंगे।
आपके प्रेम के आगे MLA का पद भी छोटा हैं
~ पूर्व गृह मंत्री, डॉ. नरोत्तम मिश्रा
भूमिकाएँ बदल दीजिए।
वीडियो में मोदी को रखिए और किसी भी नेता से झुकने को कहिए।
शाम तक लोकतंत्र खतरे में आ जाएगा, संविधान खतरे के निशान तक पहुँच जाएगा और आरक्षण अधर में लटक जाएगा।
हरियाणा के महेंद्रगढ़ के संतलाल को गर्मी में सर्दी लगती है और सर्दी में गर्मी लगती है.
संतलाल को कोई बीमारी नहीं है.
संतलाल का केस ऐसा अजूबा हैं, जो सर्दी में सुबह 5 बजे से ही नहाने लगते हैं, जबकि गर्मी में उन्हें कंबल ओढ़ते हैं.