शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा उन लाखों छात्रों के संघर्ष और राहुल गांधी जी के लगातार दबाव की जीत है।
ये उन सभी परिवारों की जीत हैं जिन्होंने अपने ख़ून, अपने बच्चों को खोया, क्योंकि यह सरकार भ्रष्टाचारी है।
लेकिन यह लड़ाई यहीं समाप्त नहीं होती। अब समय है कि मोदी जी को देश के छात्र-छात्राओं से माफ़ी माँगने की और जिन्होंने उनपर लाठी-डंडे-Pellet Guns चलवाई है, उनपर कठोर कार्यवाही करने की।
जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह देश के छात्र-छात्राओं से माफी नहीं मांगते और इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
सिर्फ़ इस्तीफ़ा नहीं, छात्रों के साथ हुए अन्याय का पूरा हिसाब चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
अभिजीत- कल आप लोगो ने 12-12 साल की बच्चियो का सर फोडा है😠
दिल्ली पुलिस- अभी का इश्यू बताइए
अभिजीत- हम भूल जाए वो चीजे🥺
लडकियो की छाती पर पैर रखकर मेल पुलिस ने उन्हे पीटा है उसके बाद भी आप लोगो का मन नही भरा
दिल्ली पुलिस- आइए ऑफिस मे बात करते है
अभिजीत- अब बैठकर कोई बात नही होगी
जो बात करनी है यही मीडिया के सामने करिए
मैंने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लड़ते हुए नहीं देखा, लेकिन कल दिल्ली की सड़कों पर इस देश के भविष्य के लिए लड़ते हुए युवाओं को जरूर देखा। उनकी आँखों में उम्मीद थी, दिल में जुनून था और आवाज़ में बदलाव की गूंज थी। यही युवा भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। 🇮🇳
ये लोग कौन हैं जो लाठी लेकर आए थे? एक समय था जब क्राइम रिपोर्टर पुलिस से पहले बता देते थे। लगता है अब वे भी व्हाट्स ग्रुप के खटाल में बाँध दिए गए हैं। JNU के साबरमती हॉस्टल में अचानक गुंडे घुस आए। उस केस का क्या हुआ? किसी को सज़ा हुई?
केन्द्र सरकार स्पष्ट करें कि दिल्ली पुलिस के साथ सिविल कपड़ों में लाठी लेकर मौजूद लोग कौन थे? उन्हें किसके आदेश पर कार्रवाई करने और लाठीचार्ज में शामिल होने की अनुमति दी गई?
लोकतांत्रिक देश में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने वाले युवाओं और छात्रों पर लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का प्रयोग अत्यंत चिंताजनक है। लोकतंत्र में असहमति को बल प्रयोग से नहीं, संवाद से सुना और सुलझाया जाना चाहिए।
देश के युवाओं की आवाज़ लाठियों और आंसू गैस से दबाई नहीं जा सकती।
हमने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर संसद में छात्रों के मुद्दों पर चर्चा करने की मांग की।
लेकिन लोकसभा स्पीकर ने कहा है कि चर्चा करवाने के लिए उन्हें सरकार से 'परमिशन' लेनी होगी।
ये छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, जिन्हें मारा-पीटा जा रहा है, जो ठीक नहीं है। नरेंद्र मोदी ने इसके लिए माफी तक नहीं मांगी है।
ये युवा देश की ध्वस्त हो चुकी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
Why is the Prime Minister silent? He should apologise to the students and stop this nonsense of thrashing students.
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi जी
आज जो हक़ के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, उन पर लाठियाँ बरसाई जा रही हैं।
और जो चुपचाप सब देख रहे हैं, याद रखिए—अन्याय की यह आग एक दिन आपके दरवाज़े तक भी पहुँचेगी।
अपने हाथों में किताबों को लेकर भागती हुई इस बच्ची को देखिए, फिर बुलडोज़र चलाने वाले अफ़सर की हनक को देखिए। परीक्षा पर चर्चा कराने वाले प्रधानमंत्री से पूछिए कि क्या किताबों को लेकर भागती बच्ची से नज़रें मिला सकते हैं ?
सुनीता विलियम्स जी को 9 महीने 14 दिन बाद अंतरिक्ष से धरती पर सुरक्षित लौटने के लिए हृदय से बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएँ! "भारत की बेटी" के रूप में आपने अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा से न सिर्फ देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि असंभव को संभव करने का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया।